Gwalior Madrasa : मध्य प्रदेश के ग्वालियर में मदरसा दारुल कुरआन को लेकर बाल संरक्षण आयोग की जांच के बाद बच्चों के साथ कथित दुर्व्यवहार का मामला चर्चा में है। जांच से जुड़ी जानकारी के अनुसार, मदरसे के संचालन की अनुमति और वहां रह रहे बच्चों को उपलब्ध कराए जा रहे माहौल की पड़ताल की गई। इस दौरान बच्चों को अनुशासन के नाम पर कथित तौर पर शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना दिए जाने के आरोप सामने आए हैं। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि संबंधित अधिकारियों की अंतिम रिपोर्ट और आगे की जांच के आधार पर होना बाकी है।

सजा के नाम पर 500 तक उठक-बैठक कराने का आरोप
मदरसे में बच्चों को कथित तौर पर अनुशासन सिखाने के नाम पर सख्त सजा दी जाती थी। आरोप है कि बच्चों से एक बार में 500 तक उठक-बैठक करवाई जाती थी। यदि ये आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो यह बच्चों की सुरक्षा और उनके साथ मानवीय व्यवहार को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर सकता है। फिलहाल, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह स्पष्ट नहीं है कि कथित सजा किन परिस्थितियों में और कितनी बार दी जाती थी।

सात साल की बच्ची को उल्टा लटकाने का दावा
इस मामले में सबसे गंभीर आरोप सात साल की एक बच्ची से जुड़ा है। आरोप लगाया गया है कि बच्ची को सजा देने के लिए उल्टा लटकाया गया था। इस घटना की परिस्थितियों और जिम्मेदार लोगों की भूमिका की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। बच्चों के साथ किसी भी प्रकार की शारीरिक हिंसा के आरोप को गंभीरता से लेते हुए तथ्यों की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
बच्चियों से शौचालय साफ कराने और कमरे में बंद रखने के आरोप
जांच से जुड़ी जानकारी में यह आरोप भी सामने आया है कि मदरसे में रहने वाली बच्चियों से शौचालय साफ करवाया जाता था। कुछ बच्चियों को कथित तौर पर कमरे में बंद रखे जाने की बात भी कही गई है। इन आरोपों के सामने आने के बाद मदरसे में बच्चों के रहने, पढ़ाई करने और रोजमर्रा की गतिविधियों से जुड़ी परिस्थितियों की जांच महत्वपूर्ण हो गई है। संबंधित अधिकारियों को इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करनी होगी।
मदरसे में मिले 26 बच्चे, 23 परिजनों को सौंपे गए
मामले में मदरसे से कुल 26 बच्चों को संरक्षण के लिए अपने नियंत्रण में लिए जाने की जानकारी सामने आई है। बाल कल्याण समिति ने इनमें से 23 बच्चों को उनके परिजनों के सुपुर्द कर दिया। शेष बच्चों की स्थिति और उनके संबंध में की गई कार्रवाई को लेकर उपलब्ध जानकारी में विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है। बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और जरूरत पड़ने पर उन्हें उचित संरक्षण उपलब्ध कराना संबंधित एजेंसियों की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

मध्य प्रदेश के अलावा यूपी और राजस्थान के बच्चे भी मौजूद
बताया गया है कि मदरसे में मध्य प्रदेश के बच्चों के साथ उत्तर प्रदेश और राजस्थान से आए बच्चे भी रह रहे थे। ऐसे में जांच का दायरा बच्चों के निवास, उनके अभिभावकों से संपर्क और संस्थान के संचालन से जुड़े रिकॉर्ड तक पहुंच सकता है। हालांकि, दूसरे राज्यों से आए बच्चों की संख्या और उनकी व्यक्तिगत परिस्थितियों को लेकर विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है।
बाल संरक्षण आयोग की कार्रवाई के बाद जांच पर नजर
बाल संरक्षण आयोग की टीम ने मदरसे में छापा मारकर वहां की व्यवस्थाओं और बच्चों की स्थिति से जुड़े पहलुओं की पड़ताल की। अब मामले में आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों और संबंधित अधिकारियों की रिपोर्ट पर निर्भर करेगी। फिलहाल, कथित प्रताड़ना से जुड़े आरोपों को अंतिम रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता। जांच में आरोप सही पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। इस पूरे मामले में बच्चों की सुरक्षा, निष्पक्ष जांच और तथ्यों के आधार पर जवाबदेही तय करना अहम होगा।
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