Gyanesh Kumar Protest : दिल्ली में मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जारी विरोध-प्रदर्शनों के बीच शुक्रवार को नया घटनाक्रम सामने आया। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा को अलग-अलग स्थानों से हिरासत में लिया गया। दीपके कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में प्रस्तावित ‘लहरा दो तिरंगा’ कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे, जबकि नेहा बोरा मंडी हाउस से कार्यकर्ताओं के साथ आगे बढ़ रही थीं।
तिरंगे के जरिए शांतिपूर्ण विरोध की अपील
CJP की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, पार्टी ने समर्थकों से बड़े जमावड़े से बचने और छोटे समूहों में तिरंगे के साथ तस्वीर लेकर शांतिपूर्वक लौटने की अपील की थी। पार्टी का दावा है कि दीपके अकेले कनॉट प्लेस की ओर जा रहे थे, तभी पुलिस ने उन्हें रोककर हिरासत में ले लिया। CJP ने सवाल उठाया कि शांतिपूर्ण तरीके से तिरंगा लेकर चलने पर किसी व्यक्ति को क्यों रोका गया। हालांकि, हिरासत की परिस्थितियों और पुलिस की कार्रवाई पर आधिकारिक पक्ष की पुष्टि जरूरी है।
नेहा बोरा की हिरासत से छात्र संगठनों की भूमिका अहम
AISA अध्यक्ष नेहा बोरा को मंडी हाउस के पास हिरासत में लिया गया। बताया गया कि वह वामपंथी कार्यकर्ताओं के साथ कनॉट प्लेस की ओर बढ़ रही थीं। दीपके और बोरा की हिरासत के बाद आंदोलन में छात्र संगठनों और अन्य सहयोगी समूहों की भूमिका पर ध्यान केंद्रित हो गया है। CJP से जुड़े सौरव दास और आशुतोष रांका पहले से न्यायिक हिरासत में बताए गए हैं। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि आने वाले दिनों में आंदोलन की अगुवाई कौन करेगा और प्रदर्शन किस रूप में आगे बढ़ेगा।
स्टालिन और केजरीवाल ने भी उठाए सवाल
इस घटनाक्रम पर दिल्ली से बाहर भी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने नेहा बोरा और अभिजीत दीपके की हिरासत को लेकर सवाल उठाए और उनकी स्थिति जानने की बात कही। वहीं, दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल पहले भी CJP नेताओं की हिरासत पर प्रतिक्रिया दे चुके हैं। विपक्षी नेताओं की इन प्रतिक्रियाओं से यह मुद्दा राजनीतिक चर्चा में बना हुआ है।
एक नवंबर की प्रस्तावित रैली पर विपक्ष की नजर
आंदोलन के अगले चरण में एक नवंबर की तारीख महत्वपूर्ण मानी जा रही है। खबर के मुताबिक, INDIA गठबंधन ने दिल्ली के रामलीला मैदान में मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ बड़े प्रदर्शन की योजना बनाई है। विपक्षी दल चुनाव आयोग की भूमिका, मतदाता सूची में बदलाव और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। प्रस्तावित रैली के जरिए इन मुद्दों को व्यापक राजनीतिक मंच पर उठाने की कोशिश की जा सकती है। हालांकि, कार्यक्रम की अंतिम रूपरेखा और भागीदारी की पुष्टि संबंधित संगठनों की औपचारिक घोषणाओं से की जानी चाहिए।
क्या हिरासत के बावजूद जारी रहेगा आंदोलन?
सूत्रों के हवाले से छात्र संगठनों के एक नवंबर तक विरोध जारी रखने की रणनीति पर विचार करने की बात कही गई है। यदि ऐसा होता है, तो छोटे समूहों में प्रदर्शन, तिरंगे के साथ प्रतीकात्मक विरोध और विश्वविद्यालयों में लामबंदी आंदोलन का हिस्सा बन सकते हैं। फिलहाल इसे संगठनों की अंतिम घोषित रणनीति नहीं माना जा सकता।
आंदोलन की दिशा तय करेंगे तीन अहम सवाल
आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि छात्र संगठन हिरासतों के बावजूद कितने सक्रिय रहते हैं, विपक्षी दल साझा कार्यक्रम पर कितनी एकजुटता दिखाते हैं और शांतिपूर्ण विरोध का मुद्दा कितना व्यापक समर्थन हासिल करता है। शुक्रवार की कार्रवाई के बाद आंदोलन का अगला चरण और एक नवंबर की प्रस्तावित रैली राजनीतिक घटनाक्रम के केंद्र में रह सकती है।
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