Jauhar University ED Action : उत्तर प्रदेश की राजनीति से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बुधवार को पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान और उनसे जुड़े मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कार्रवाई की। ईडी के लखनऊ जोनल कार्यालय ने रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की जमीन और इमारतों को अस्थायी रूप से अटैच कर लिया है। एजेंसी के मुताबिक, यह कदम धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत उठाया गया है।

426.46 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच
ईडी की कार्रवाई में जिन संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया गया है, उनका मूल्य 426.46 करोड़ रुपये बताया गया है। वहीं, इन संपत्तियों की मौजूदा बाजार कीमत लगभग 1,170 करोड़ रुपये आंकी गई है। यह कार्रवाई रामपुर में स्थित जौहर यूनिवर्सिटी के परिसर से संबंधित है। यूनिवर्सिटी उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले के सिंहानखेड़ा गांव के जौहर नगर क्षेत्र में स्थित है। हालांकि, संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किए जाने का अर्थ अपने आप में अंतिम जब्ती या दोषसिद्धि नहीं है।

मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट की भूमिका
जौहर यूनिवर्सिटी का परिसर मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के अधीन है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस ट्रस्ट की स्थापना आजम खान ने की थी और वह इसके नियंत्रण से जुड़े हैं। आजम खान यूनिवर्सिटी के मानद चांसलर भी हैं। ईडी की जांच का केंद्र ट्रस्ट से संबंधित संपत्तियों और यूनिवर्सिटी के निर्माण में कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला है। एजेंसी इस बात की जांच कर रही है कि संपत्तियों और धन का इस्तेमाल किस प्रकार किया गया।
किसानों की जमीन पर कब्जे के आरोप
ईडी ने रामपुर के अजीमनगर थाने में दर्ज 26 एफआईआर के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की थी। इन मामलों में आरोप लगाया गया कि यूनिवर्सिटी के निर्माण के लिए किसानों की कृषि भूमि पर कथित तौर पर जबरन कब्जा किया गया। इसके अतिरिक्त, रामपुर जिला प्रशासन की जांच रिपोर्ट में सिंहानखेड़ा गांव की लगभग 34 एकड़ शत्रु संपत्ति के 45 भूखंडों पर कथित अवैध कब्जे का उल्लेख किया गया था। इन आरोपों की कानूनी स्थिति संबंधित जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।
शत्रु संपत्ति को लेकर भी जांच
ईडी के मुताबिक, संबंधित जमीन को ट्रस्ट के पक्ष में पट्टे पर देने का आदेश रद्द होने के बाद भी उस पर कब्जा जारी रहने का आरोप है। बाद में गृह मंत्रालय के शत्रु संपत्ति अभिरक्षक ने रामपुर जिला प्रशासन के माध्यम से जमीन का कब्जा वापस ले लिया। इस मामले में सरकारी रिकॉर्ड, जमीन के आवंटन और कब्जे से जुड़े दस्तावेज जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका
जांच के दौरान ईडी को कथित तौर पर ऐसे साक्ष्य मिले, जिनसे सरकारी कार्यों के लिए निर्धारित धनराशि का इस्तेमाल यूनिवर्सिटी के निर्माण में किए जाने की आशंका जताई गई। एजेंसी के अनुसार, सरकारी ठेके हासिल करने वाले कुछ ठेकेदारों से धन वापस ट्रस्ट को दान के रूप में भेजे जाने के आरोप भी सामने आए। अब जांच में इन लेनदेन, संपत्तियों और धन के स्रोतों की पड़ताल की जा रही है। मामले में आरोपों को अंतिम निष्कर्ष मानने से पहले जांच और अदालत की प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है।
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