Haldwani Row : उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की रैली के बाद शुरू हुआ विवाद अब कानूनी कार्रवाई तक पहुंच गया है। रामलीला मैदान में आयोजित कांग्रेस की रैली के बाद कथित तौर पर एक “शुद्धिकरण अनुष्ठान” किए जाने को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। आरोप है कि इस आयोजन के जरिए दलित नेता खरगे की मौजूदगी को लेकर आपत्तिजनक और जातिवादी संदेश देने की कोशिश की गई।
बेंगलुरु में दर्ज हुई प्राथमिकी
मामले में बेंगलुरु के विधान सौध पुलिस स्टेशन में बीजेपी के वरिष्ठ पदाधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। यह कार्रवाई कांग्रेस के एसटी विभाग के पूर्व उपाध्यक्ष टी.आर. रामप्पा की शिकायत के आधार पर की गई। शिकायत में पूरे घटनाक्रम को सामाजिक सम्मान और जातिगत समानता से जुड़ा गंभीर मामला बताया गया है।
टी.आर. रामप्पा ने लगाए गंभीर आरोप
शिकायतकर्ता टी.आर. रामप्पा का आरोप है कि मल्लिकार्जुन खरगे के कार्यक्रम से लौटने के बाद जानबूझकर रामलीला मैदान में कथित शुद्धिकरण अनुष्ठान कराया गया। उनका कहना है कि इस गतिविधि का उद्देश्य यह संदेश देना था कि खरगे के वहां आने से मैदान “अशुद्ध” हो गया था। रामप्पा ने इसे दलित नेता और उनके समुदाय का अपमान बताया है।
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट का नाम
इस मामले में उत्तराखंड बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट का नाम भी सामने आया है। शिकायत के मुताबिक, महेंद्र भट्ट ने कथित तौर पर इस अनुष्ठान का सार्वजनिक रूप से बचाव किया और इसे उचित ठहराने की कोशिश की। इसी वजह से पुलिस शिकायत में उनका नाम भी शामिल किया गया है। हालांकि, मामले में लगाए गए आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
BNS और SC/ST एक्ट के तहत मामला
पुलिस ने शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है। इसके अलावा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम और नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955 के प्रावधान भी लगाए गए हैं। इन धाराओं के तहत पुलिस अब आरोपों, घटनाक्रम और संबंधित पक्षों की भूमिका की जांच करेगी।
राजनीतिक विवाद ने पकड़ा तूल
घटना के सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में भी तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कांग्रेस ने इसे सामाजिक भेदभाव और दलित सम्मान से जोड़ते हुए गंभीर आपत्ति जताई है। वहीं, विवाद के केंद्र में आए बीजेपी नेताओं की भूमिका और कथित बयान भी जांच के दायरे में हैं। मामले को लेकर दोनों दलों के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज होने की संभावना है।
जातिगत भेदभाव पर फिर छिड़ी बहस
हल्द्वानी का यह विवाद केवल राजनीतिक टकराव तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसने जातिगत भेदभाव और सामाजिक समानता जैसे मुद्दों को भी फिर चर्चा में ला दिया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि सार्वजनिक स्थान पर किसी व्यक्ति की जाति या सामाजिक पहचान के आधार पर “शुद्ध-अशुद्ध” जैसी धारणा को बढ़ावा देना संविधान में निहित समानता के सिद्धांतों के खिलाफ है।
पुलिस जांच के बाद सामने आएगी तस्वीर
फिलहाल प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। जांच के दौरान कथित अनुष्ठान से जुड़े लोगों, आयोजकों, उपलब्ध वीडियो या अन्य साक्ष्यों और संबंधित बयानों की पड़ताल की जा सकती है। पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और किन लोगों की भूमिका इस मामले में सामने आती है।
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