Half electricity bill scheme : छत्तीसगढ़ में बिजली बिल हाफ योजना को बंद करने के सरकार के फैसले ने सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। कांग्रेस ने इसे आम जनता के खिलाफ अन्याय बताते हुए सरकार पर तीखा हमला बोला है। अंबिकापुर में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान कांग्रेस नेताओं ने इस फैसले को “जनविरोधी” और “उद्योगपति हितैषी” करार देते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है।

कांग्रेस शासन में शुरू की गई लोकप्रिय हाफ बिजली बिल योजना को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अगुवाई वाली भाजपा सरकार ने पूरी तरह से बंद कर दिया है। इसके विरोध में कांग्रेस नेताओं ने अंबिकापुर स्थित राजीव भवन में प्रेस वार्ता कर राज्य सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सरकार सोशल मीडिया पर सब्सिडी के आंकड़े दिखाकर जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रही है, जबकि जमीनी स्तर पर कोई सब्सिडी उपभोक्ताओं को नहीं मिल रही।

पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव के नेतृत्व में ऊर्जा विभाग द्वारा शुरू की गई जनकल्याणकारी योजनाओं को बंद करने और बिजली दरों में लगातार बढ़ोतरी के फैसले को लेकर कांग्रेस नेताओं ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पूरे प्रदेश में बिजली के रेट तो बढ़ा दिए गए, लेकिन आज तक कोई बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट शुरू नहीं हुआ है।
सरगुजा जिलाध्यक्ष बालकृष्ण पाठक ने इस निर्णय को “विद्युत उपभोक्ताओं पर अत्याचार” बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में सरप्लस बिजली उत्पादन के बावजूद बिजली विभाग घाटे में है, जो कि सरकार के अकुशल प्रबंधन का परिणाम है। उन्होंने कहा, “स्मार्ट मीटर के नाम पर घर-घर निगरानी और वसूली की तैयारी चल रही है। सरकार अडानी के फायदे के लिए काम कर रही है।”
कांग्रेस नेता राकेश गुप्ता ने सरकार के उस दावे को खारिज किया जिसमें कहा गया था कि “80 प्रतिशत उपभोक्ताओं पर असर नहीं पड़ेगा।” उन्होंने इसे पूरी तरह भ्रामक और झूठा बताया।
जेपी श्रीवास्तव ने मुख्यमंत्री के बयान पर तंज कसते हुए कहा कि “बिजली दर बढ़ाना जनहित में है” – यह कथन आठवें आश्चर्य के रूप में दर्ज होना चाहिए। उन्होंने सरकार पर निजीकरण की ओर बढ़ने और उद्योगपतियों के पक्ष में काम करने का आरोप लगाया।
पूर्व महापौर डॉ. अजय तिर्की ने भी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “जब पहले ही 80 पैसे प्रति यूनिट की दर से बिजली महंगी की जा चुकी थी, तो हाफ बिजली बिल योजना को हटाने की क्या जरूरत थी?” उन्होंने सरकार को शिक्षा, कृषि, सुरक्षा और आधारभूत सेवाओं में विफल बताते हुए कहा कि यह सरकार आम लोगों की नहीं, पूंजीपतियों की है।
कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट किया कि यदि हाफ बिजली बिल योजना को बहाल नहीं किया गया, तो राज्यभर में विरोध प्रदर्शन तेज किए जाएंगे। उन्होंने सरकार को चेताया कि “जनविरोधी नीतियों” का जवाब जनता आने वाले समय में ज़रूर देगी। वहीं, अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि भाजपा सरकार इस बढ़ते राजनीतिक दबाव का क्या जवाब देती है।










