Peter Navarro India: अमेरिका में 2024 के राष्ट्रपति चुनाव की सरगर्मी के बीच डोनाल्ड ट्रंप के ट्रेड एडवाइजर पीटर नवारो के बयानों ने भारत-अमेरिका रिश्तों में नया विवाद खड़ा कर दिया है। नवारो ने भारत पर रूस से सस्ता तेल खरीदकर मुनाफा कमाने और क्रेमलिन की ‘मनी लॉन्ड्रिंग मशीन’ बनने का आरोप लगाया है। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शंघाई सहयोग संगठन (SCO) समिट में हिस्सा लेने चीन पहुंचे हैं और वहां राष्ट्रपति शी जिनपिंग और व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात कर रहे हैं।

नवारो के तीखे आरोप: भारत पर वॉर फंडिंग का आरोप
पीटर नवारो ने कहा “भारत क्रेमलिन के लिए मनी लॉन्ड्रिंग मशीन बन गया है। भारतीय रिफाइनरियां रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीद रही हैं और उसे महंगे दाम पर एक्सपोर्ट कर रही हैं। इससे सीधे तौर पर रूस को आर्थिक मदद मिल रही है, जो यूक्रेन में मासूम लोगों की मौत का कारण बन रही है।”उन्होंने दावा किया कि रूस-यूक्रेन युद्ध से पहले भारत रूस से इतना तेल नहीं खरीदता था, लेकिन अब वह “रूसी युद्ध मशीन को फंड” कर रहा है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी टैक्सपेयर्स को भारत की इस नीति का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है, क्योंकि उन्हें यूक्रेन की मदद के लिए और ज्यादा पैसा देना पड़ रहा है।

ब्राह्मणों पर विवादित टिप्पणी
नवारो यहीं नहीं रुके, उन्होंने कहा “ब्राह्मण, भारतीय लोगों के खर्च पर मुनाफा कमा रहे हैं। हमें इसे रोकना होगा।” उनका यह बयान जातिगत रूप से संवेदनशील माना जा रहा है और भारत में इसकी आलोचना भी शुरू हो गई है। विदेश नीति जैसे गंभीर मसले में जातिवादी रुख अपनाना अमेरिका के कूटनीतिक व्यवहार पर भी सवाल खड़े करता है।
मोदी-पुतिन-शी की मुलाकात पर उठाए सवाल
पीटर नवारो ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की SCO समिट में भागीदारी और पुतिन व शी जिनपिंग के साथ बैठक पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा:“मोदी एक महान नेता हैं, लेकिन समझ नहीं आता कि वो पुतिन और शी से क्यों मिल रहे हैं, जबकि वो दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के प्रतिनिधि हैं।”
ट्रंप के टैरिफ को बताया सही
नवारो ने भारत पर डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के दौरान लगाए गए 50% टैरिफ का बचाव करते हुए कहा कि यही कदम उठाकर रूस की फंडिंग को रोका जा सकता है। उन्होंने दावा किया कि भारत, रूस और चीन के बीच बढ़ती नजदीकियां वैश्विक स्थिरता को कमजोर कर रही हैं।
भारत की विदेश नीति पर क्या है रुख?
भारत ने शुरू से ही रूस-यूक्रेन युद्ध पर न्यूट्रल स्टैंड रखा है और बार-बार कहा है कि वह राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देता है। भारत ने रूस से तेल खरीद को लेकर सफाई दी है कि यह ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने और वैश्विक बाजार में स्थिरता बनाए रखने का हिस्सा है। हाल ही में एक रिपोर्ट में कहा गया कि भारत की यह नीति वैश्विक ऊर्जा संकट को टालने में मददगार साबित हुई है।
पीटर नवारो के बयान अमेरिका की बदलती रणनीति और 2024 के चुनावी माहौल में भारत को लेकर ट्रंप खेमे की सोच को उजागर करते हैं। इस बयान से भारत-अमेरिका व्यापारिक और कूटनीतिक संबंधों में तनाव बढ़ सकता है। अब देखना होगा कि भारत इस बयान पर क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया देता है।










