Heart Blockage : बहुत से मरीजों के मन में यह धारणा रहती है कि एंजियोग्राफी में जैसे ही हृदय की किसी धमनी में ब्लॉकेज दिखाई देता है, वैसे ही स्टेंट डालना आवश्यक हो जाता है। हालांकि, इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट के अनुसार ब्लॉकेज का दिखाई देना और उसके इलाज के लिए स्टेंट की जरूरत होना दो अलग-अलग बातें हैं। स्टेंट का निर्णय मरीज की पूरी स्थिति, लक्षणों और हृदय में रक्त प्रवाह पर पड़ रहे प्रभाव को देखकर किया जाता है।
सिर्फ ब्लॉकेज प्रतिशत देखकर नहीं होता फैसला
हर कोरोनरी ब्लॉकेज में स्टेंट लगाना जरूरी नहीं होता। डॉक्टर आमतौर पर यह देखते हैं कि धमनी कितनी संकरी हुई है, ब्लॉकेज किस स्थान पर मौजूद है और उससे हृदय की मांसपेशियों तक पहुंचने वाले रक्त प्रवाह पर कितना असर पड़ा है। इसके अलावा मरीज को सीने में दर्द, सांस फूलने या अन्य लक्षण कितने गंभीर हैं, यह भी उपचार तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
मरीज की पूरी मेडिकल स्थिति भी होती है महत्वपूर्ण
स्टेंट लगाने का फैसला केवल एंजियोग्राफी की रिपोर्ट देखकर नहीं किया जाता। डॉक्टर मरीज की उम्र, अन्य बीमारियों, हृदय की पंपिंग क्षमता, ब्लॉकेज की संख्या और लक्षणों समेत कई पहलुओं का मूल्यांकन करते हैं। कुछ मामलों में अतिरिक्त जांचों के जरिए यह पता लगाया जाता है कि ब्लॉकेज वास्तव में रक्त प्रवाह को कितना प्रभावित कर रहा है। इसके आधार पर दवा, स्टेंट या सर्जरी में से उचित विकल्प चुना जाता है।
हार्ट अटैक में स्टेंट कब बन सकता है जीवनरक्षक
अचानक कोरोनरी धमनी पूरी तरह बंद हो जाने पर स्थिति गंभीर हो सकती है। विशेष रूप से गंभीर हार्ट अटैक में बंद धमनी को जल्द से जल्द खोलना हृदय की मांसपेशियों को होने वाले नुकसान को कम करने में मदद कर सकता है। ऐसे मामलों में एंजियोप्लास्टी और जरूरत पड़ने पर स्टेंट जीवनरक्षक उपचार साबित हो सकता है। जितनी जल्दी रक्त प्रवाह बहाल किया जाए, उतना ही हृदय को बचाने का अवसर बढ़ता है।
सीने के दर्द को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी
सीने में दर्द होने का मतलब हर बार स्टेंट की जरूरत होना नहीं है, लेकिन कुछ लक्षणों को गंभीरता से लेना बेहद जरूरी है। लगातार या तेजी से बढ़ता सीने का दर्द, सांस लेने में परेशानी, असामान्य धड़कन, ब्लड प्रेशर में अस्थिरता या हृदय की कार्यक्षमता कमजोर होने के संकेत आपात स्थिति की ओर इशारा कर सकते हैं। रक्त जांच में हृदय की मांसपेशी को नुकसान के संकेत मिलने पर भी तत्काल चिकित्सकीय मूल्यांकन जरूरी होता है।
ब्लॉकेज की जगह उपचार तय करने में अहम
ब्लॉकेज किस धमनी में है, इसका उपचार के विकल्प पर बड़ा प्रभाव पड़ता है। लेफ्ट मेन कोरोनरी आर्टरी में महत्वपूर्ण संकुचन, कई धमनियों में गंभीर ब्लॉकेज या हृदय की पंपिंग क्षमता कम होने जैसी परिस्थितियों में रक्त प्रवाह बहाल करना जरूरी हो सकता है। हालांकि, हर ऐसे मरीज में स्टेंट ही सर्वोत्तम विकल्प हो, यह जरूरी नहीं है। कुछ मामलों में डॉक्टर बाईपास सर्जरी को अधिक उपयुक्त मान सकते हैं।
स्टेंट के बाद भी इलाज और सावधानी जरूरी
हृदय की बीमारी का इलाज केवल स्टेंट लगाने के साथ समाप्त नहीं होता। मरीज को डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाएं नियमित रूप से लेनी चाहिए और अपनी जीवनशैली में भी जरूरी बदलाव करने चाहिए। धूम्रपान से दूरी, संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि, वजन पर नियंत्रण और तनाव कम करने की कोशिश हृदय स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हैं। कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखना भी उपचार का अहम हिस्सा है।
लक्षण दिखने पर खुद फैसला लेने से बचें
ब्लॉकेज की गंभीरता और स्टेंट की जरूरत का निर्णय इंटरनेट पर उपलब्ध सामान्य जानकारी के आधार पर नहीं किया जा सकता। हर मरीज की स्थिति अलग होती है और उपचार का विकल्प डॉक्टर की जांच तथा आवश्यक परीक्षणों के आधार पर तय किया जाना चाहिए। खासकर अचानक तेज सीने में दर्द या हार्ट अटैक के लक्षण दिखाई देने पर देरी करने के बजाय तत्काल आपात चिकित्सा सहायता लेना महत्वपूर्ण है।
Read More : Breast Cancer Screening : सरगुजा पुलिस की महिला कर्मियों के लिए विशेष पहल, पहली बार हुई कैंसर स्क्रीनिंग