Sawan Purnima 2026: हिंदू धर्म में सावन मास की पूर्णिमा को बेहद पवित्र और महत्वपूर्ण तिथि माना जाता है। यह दिन सावन महीने के समापन के साथ रक्षाबंधन जैसे प्रमुख पर्व से भी जुड़ा होता है। इस अवसर पर भगवान शिव, माता पार्वती और मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूर्णिमा के दिन स्नान, व्रत, पूजा और दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। हालांकि, पूजा-पाठ के दौरान कुछ ऐसी गलतियां हैं, जिनसे बचने की सलाह दी जाती है।
27 या 28 अगस्त को मनाई जाएगी सावन पूर्णिमा?
पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में सावन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त की सुबह 9 बजकर 9 मिनट से प्रारंभ होगी और 28 अगस्त की सुबह 9 बजकर 47 मिनट पर समाप्त होगी। चूंकि 28 अगस्त को सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि मौजूद रहेगी, इसलिए उदया तिथि के नियम के अनुसार सावन पूर्णिमा का पर्व 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। अलग-अलग स्थानों पर मुहूर्त में मामूली अंतर हो सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग देखना उचित रहेगा।
शिवलिंग पर कुछ सामग्री चढ़ाने से बचें
सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित होता है, इसलिए पूर्णिमा के दिन भी शिव पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। हालांकि, शिवलिंग पर पूजा सामग्री अर्पित करते समय धार्मिक परंपराओं का ध्यान रखना चाहिए। मान्यताओं के अनुसार शिवलिंग पर तुलसी दल, हल्दी और सिंदूर जैसी सामग्री अर्पित नहीं की जाती। इसके अलावा पौराणिक कथाओं में केतकी के फूल को भी शिव पूजा में चढ़ाने की मनाही बताई गई है।
पूजा स्थल की स्वच्छता का रखें ध्यान
सावन पूर्णिमा पर पूजा से पहले घर और पूजा स्थल की साफ-सफाई करना महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक परंपरा के अनुसार पूजा करने से पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। पूजा सामग्री को भी साफ स्थान पर व्यवस्थित तरीके से रखना चाहिए। पूजा स्थल के आसपास गंदगी, जूठे बर्तन या इस्तेमाल की हुई वस्तुएं नहीं रखनी चाहिए। मान्यता है कि पूजा में बाहरी स्वच्छता के साथ मन की शुद्धता भी महत्वपूर्ण होती है।
किसी का अपमान या विवाद करने से बचें
पूर्णिमा के दिन धार्मिक गतिविधियों के साथ व्यक्ति के व्यवहार को भी महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन किसी से अनावश्यक विवाद करना, अपशब्द बोलना या किसी व्यक्ति का अपमान करने से बचना चाहिए। मन को शांत रखने और दूसरों के प्रति सम्मान तथा प्रेम का भाव बनाए रखने की कोशिश करनी चाहिए। जरूरतमंदों की सहायता करना और अपनी क्षमता के अनुसार दान-पुण्य करना भी शुभ माना जाता है।
पूजा के बाद प्रसाद का न करें अनादर
पूजा संपन्न होने के बाद भगवान को अर्पित किया गया प्रसाद श्रद्धापूर्वक परिवार और अन्य लोगों में वितरित करना चाहिए। प्रसाद को फेंकना या उसका अनादर करना धार्मिक दृष्टि से उचित नहीं माना जाता। इसी तरह पूजा के बाद बची सामग्री को इधर-उधर फेंकने के बजाय स्थानीय धार्मिक परंपरा के अनुसार उचित तरीके से विसर्जित या व्यवस्थित करना चाहिए।
पूजा में श्रद्धा और संयम रखें
सावन पूर्णिमा पर पूजा करते समय केवल विधि-विधान ही नहीं, बल्कि श्रद्धा, स्वच्छता और सकारात्मक व्यवहार को भी महत्व दिया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का स्मरण करने के साथ जरूरतमंदों की मदद और दान करना शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान किसी तरह की जल्दबाजी या अनादर से बचते हुए शांत मन से आराधना करना बेहतर माना जाता है।
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