Assam Politics 2026
Assam Politics 2026: असम की राजनीति में इन दिनों भूचाल आया हुआ है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस पार्टी के शीर्ष नेताओं के खिलाफ एक निर्णायक कानूनी लड़ाई छेड़ दी है। सीएम सरमा ने कांग्रेस नेताओं द्वारा लगाए गए भ्रष्टाचार और जमीन कब्जे के आरोपों को पूरी तरह से आधारहीन, झूठा और छवि खराब करने की सोची-समझी साजिश करार दिया है। मुख्यमंत्री का कहना है कि विपक्ष के पास विकास के मुद्दों पर लड़ने के लिए कुछ नहीं बचा है, इसलिए वे अब व्यक्तिगत चरित्र हनन और झूठे दावों का सहारा ले रहे हैं। इसी क्रम में उन्होंने कड़ा रुख अपनाते हुए मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया है।
हिमंत बिस्वा सरमा ने जिन नेताओं को कानूनी दायरे में घसीटा है, उनमें कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव और असम प्रभारी जितेंद्र सिंह, छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने इन तीनों नेताओं के खिलाफ कुल 500 करोड़ रुपए की मानहानि का केस किया है। सीएम सरमा का तर्क है कि इन नेताओं ने सार्वजनिक मंचों और प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से उनके खिलाफ ऐसी बातें कही हैं जिनसे न केवल उनकी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा धूमिल हुई है, बल्कि मुख्यमंत्री कार्यालय की गरिमा को भी ठेस पहुंची है।
इस पूरे विवाद की शुरुआत 4 फरवरी को हुई थी, जब असम कांग्रेस के कद्दावर नेता गौरव गोगोई ने एक सनसनीखेज दावा किया था। गोगोई ने प्रेस को संबोधित करते हुए आरोप लगाया था कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और उनके परिवार के सदस्यों ने राज्य के विभिन्न हिस्सों में सत्ता का दुरुपयोग कर लगभग 12 हजार बीघा सरकारी और निजी जमीन पर अवैध कब्जा किया है। गोगोई के इस बयान के बाद भूपेश बघेल और जितेंद्र सिंह ने भी दिल्ली और गुवाहाटी में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इन आरोपों को हवा दी और मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग की थी।
जमीन विवाद के साथ-साथ कांग्रेस ने मुख्यमंत्री पर सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने का भी आरोप लगाया है। गौरव गोगोई ने अपने बयानों में यह भी कहा था कि सीएम सरमा अक्सर अल्पसंख्यक समुदाय (मुसलमानों) के खिलाफ भड़काऊ बयानबाजी करते हैं ताकि राज्य में ध्रुवीकरण की राजनीति को बढ़ावा दिया जा सके। कांग्रेस का आरोप है कि मुख्यमंत्री अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए सांप्रदायिक विभाजन का सहारा लेते हैं। हालांकि, मुख्यमंत्री ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि वे केवल घुसपैठियों और अवैध गतिविधियों के खिलाफ बोलते हैं, किसी समुदाय विशेष के खिलाफ नहीं।
500 करोड़ का यह मानहानि का मामला अब अदालत की दहलीज पर है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कांग्रेस नेता अपने दावों के पक्ष में ठोस सबूत पेश नहीं कर पाते हैं, तो उनके लिए आने वाले दिन मुश्किल भरे हो सकते हैं। दूसरी ओर, सीएम सरमा ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अपनी और अपने परिवार की गरिमा से कोई समझौता नहीं करेंगे। इस कानूनी जंग ने असम में आगामी चुनावों से पहले राजनीतिक तापमान को चरम पर पहुंचा दिया है, जहाँ अब विकास के दावों के साथ-साथ अदालती कार्यवाहियों पर भी जनता की नजर रहेगी।
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