Himanta Biswa Sarma
Himanta Biswa Sarma: असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने अपने उत्तर प्रदेश प्रवास के दौरान मिर्जापुर स्थित प्रसिद्ध शक्तिपीठ विंध्याचल धाम का दौरा किया। सोमवार को विंध्य पर्वत की गोद में स्थित मां विंध्यवासिनी के दरबार में पहुँचकर उन्होंने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। मुख्यमंत्री ने मां का आशीर्वाद लिया और देश तथा अपने राज्य की सुख-समृद्धि की कामना की। उनके इस धार्मिक दौरे ने न केवल उनके आध्यात्मिक पक्ष को उजागर किया, बल्कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी उनकी उपस्थिति को दर्ज कराया। दर्शन के उपरांत उन्होंने मंदिर परिसर में मौजूद मीडियाकर्मियों से मुखातिब होते हुए विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रखी।
विंध्याचल में दर्शन के बाद हुई प्रेस वार्ता में हिमंता बिस्वा सरमा का रुख काफी आक्रामक नजर आया। उन्होंने कांग्रेस के शीर्ष नेता राहुल गांधी पर सीधा प्रहार करते हुए उनकी मानसिक स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े किए। सरमा ने कहा कि राहुल गांधी जिस तरह के बयान दे रहे हैं, उससे उनकी स्थिति ठीक नहीं लगती और उन्हें उचित इलाज की आवश्यकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी की भाषा और विचार अक्सर अलोकतांत्रिक होते हैं, जो देश के संवैधानिक ढांचे के अनुकूल नहीं हैं। सरमा ने स्पष्ट किया कि जहां राहुल गांधी के बयान विवाद पैदा करते हैं, वहीं वह स्वयं हमेशा हिंदू समाज की एकता और राष्ट्रहित के मुद्दों को प्राथमिकता देते हैं।
राजनीतिक हमलों के साथ-साथ मुख्यमंत्री सरमा ने अपने गृह राज्य असम की सुरक्षा स्थिति और बदलती जनसांख्यिकी (Demographics) पर भी गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने दावा किया कि असम में बांग्लादेशी मूल की आबादी अब बढ़कर 35% हो गई है, जो राज्य की सांस्कृतिक और सुरक्षा पहचान के लिए एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने इस मुद्दे को केवल राजनीतिक नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का विषय बताया। सरमा ने जोर देकर कहा कि इस तरह का असंतुलन भविष्य में राज्य के मूल निवासियों के अधिकारों और संसाधनों पर प्रभाव डाल सकता है, जिसके लिए सख्त कदम उठाए जाने अनिवार्य हैं।
अपने संबोधन के दौरान हिमंता बिस्वा सरमा ने खुद को हिंदू हितों के रक्षक के रूप में मजबूती से पेश किया। उन्होंने कहा कि वह जो भी बोलते हैं, उसके मूल में राष्ट्रवाद और हिंदू समाज का कल्याण होता है। उन्होंने विपक्ष पर तुष्टीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ नेता केवल एक वर्ग विशेष को खुश करने के लिए देश के बहुसंख्यक समाज की अनदेखी करते हैं। विंध्याचल की पवित्र धरती से उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की कि वह अपनी विचारधारा पर अडिग हैं और राष्ट्र के सामने आने वाली चुनौतियों का डटकर मुकाबला करेंगे।
सर्मा ने विपक्षी गठबंधन की कार्यप्रणाली पर कटाक्ष करते हुए कहा कि उनके पास देश के विकास के लिए कोई ठोस विजन नहीं है। उन्होंने उत्तर प्रदेश और असम जैसे राज्यों में भाजपा सरकार द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना की और इसे ‘डबल इंजन’ सरकार का प्रभाव बताया। उनके अनुसार, राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेता केवल जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं, जबकि असल मुद्दे सीमा सुरक्षा और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण हैं। विंध्याचल से शुरू हुआ यह राजनीतिक वाकयुद्ध आने वाले दिनों में असम और उत्तर प्रदेश की राजनीति में और गरमाने की संभावना है।
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