Hindu mythology squirrel
Hindu mythology squirrel: हिंदू मान्यताओं और परंपराओं में गिलहरी को केवल एक जीव नहीं, बल्कि आस्था का केंद्र माना जाता है। प्रसिद्ध ज्योतिषी डॉ. बसवराज गुरुजी के अनुसार, गिलहरी का नाम आते ही त्रेतायुग में भगवान श्री राम द्वारा लंका पर सेतु निर्माण का दृश्य आंखों के सामने आ जाता है। गिलहरी वह नन्हा जीव है जिसने अपनी क्षमता के अनुसार राम काज में सहयोग किया था। यही कारण है कि इसे अत्यंत पवित्र माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र में गिलहरी को देवी लक्ष्मी का प्रतीक भी माना गया है, जो सौभाग्य और समृद्धि का संदेश लेकर आती है।
यदि कोई गिलहरी आपके घर के दरवाजे या खिड़की से भीतर प्रवेश करती है, तो इसे ज्योतिषीय दृष्टि से बहुत ही मंगलकारी माना जाता है। गुरुजी के अनुसार, गिलहरी का घर में आना आर्थिक स्थिति में सुधार का स्पष्ट संकेत है। इसके आगमन से धन में वृद्धि होती है और परिवार पर से नकारात्मक शक्तियों या बुरी नजर का प्रभाव कम हो जाता है। यदि यह किसी विशेष तिथि या नक्षत्र में आपके घर आती है, तो ‘शक्ति योग’ की प्राप्ति होती है, जो आपको समाज में प्रतिष्ठा दिलाती है। मान्यता है कि गिलहरी की सेवा के कारण ही प्रभु राम को विजय प्राप्त हुई थी, अतः इसका घर आना कार्य सिद्धि का प्रतीक है।
गिलहरी स्वभाव से अत्यंत सौम्य और शांत होती है। गुरुजी बताते हैं कि यदि गिलहरी स्वयं आकर आपके कंधे पर बैठ जाए, तो यह आपके जीवन में आने वाले स्वर्णिम समय का सूचक है। यहाँ तक कि यदि गिलहरी आपके शरीर पर अचानक गिर जाए, तो उसे अशुभ मानने के बजाय शुभ शगुन मानना चाहिए। यह यश, कीर्ति और संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वालों के लिए सकारात्मक संकेत है। विशेष रूप से यदि सुबह-सुबह गिलहरी के दर्शन हो जाएं, तो माना जाता है कि उस व्यक्ति के दिन भर के सभी रुके हुए कार्य सफलतापूर्वक संपन्न होंगे।
न केवल वास्तविकता में, बल्कि स्वप्न शास्त्र के अनुसार भी सपने में गिलहरी को देखना अत्यंत लाभकारी माना जाता है। यदि आप सपने में गिलहरी को उछल-कूद करते या खाते हुए देखते हैं, तो यह भविष्य में मिलने वाले किसी बड़े आर्थिक लाभ की ओर इशारा करता है। यह इस बात का प्रमाण है कि आपके ऊपर दैवीय कृपा बनी हुई है और जल्द ही आपके कष्टों का अंत होने वाला है।
अक्सर वाहन चलाते समय या अनजाने में किसी नन्हे जीव को चोट लग जाती है। डॉ. बसवराज गुरुजी कहते हैं कि यदि गलती से किसी गिलहरी को चोट लग जाए या उसकी मृत्यु हो जाए, तो इसे दोष माना जाता है। इसके निवारण और प्रायश्चित के लिए व्यक्ति को भगवान श्री राम या हनुमान जी के भजनों में सम्मिलित होना चाहिए। इसके अतिरिक्त, श्री राम की शोभायात्रा में सेवा देना और निर्धनों को भोजन कराना सबसे उत्तम प्रायश्चित माना गया है। इससे जीव हत्या के अनजाने पाप से मुक्ति मिलती है और मन को शांति प्राप्त होती है।बहरहाल, प्रकृति का यह सुंदर प्राणी हमें सिखाता है कि भक्ति और सेवा कभी व्यर्थ नहीं जाती। इसे परेशान करना या नुकसान पहुँचाना वर्जित है।
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