Strait of Hormuz : मिडल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव अब एक बेहद गंभीर और चिंताजनक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना की प्रतिष्ठित विंग, ‘यूएस सेंट्रल कमांड’ (CENTCOM) ने आधिकारिक तौर पर यह स्वीकार कर लिया है कि ओमान तट के पास भारतीय क्रू (नाविकों) की मौजूदगी वाले एक वाणिज्यिक जहाज पर उसी ने मिसाइल हमला किया था। इस हमले के बाद जहाज के इंजन रूम में भीषण आग लग गई थी, जिसके बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हड़कंप मच गया था। अमेरिकी सेना द्वारा इस हमले की जिम्मेदारी लेने के बाद दोनों देशों के कूटनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। चौंकाने वाली बात यह है कि चालू सप्ताह के भीतर ओमान के समुद्री क्षेत्र में भारतीय नाविकों वाले जहाजों पर हमले या उनके साथ टकराव की यह तीसरी बड़ी और गंभीर घटना है।

यूएस सेंट्रल कमांड का आधिकारिक बयान
इस पूरे सैन्य एक्शन पर सफाई देते हुए यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक विस्तृत पोस्ट साझा किया है। अमेरिकी सेना के मुताबिक, उनकी कार्रवाई गिनी-बिसाऊ के झंडे वाले ‘एम/टी जलवीर’ (M/T Jalveer) नामक जहाज के खिलाफ की गई थी। अमेरिकी खुफिया इनपुट के अनुसार, यह जहाज ओमान की खाड़ी के रास्ते प्रतिबंधित ईरान से कच्चे तेल का परिवहन करने का प्रयास कर रहा था। CENTCOM ने अपने बयान में दावा किया कि अमेरिकी नौसेना और वायुसेना द्वारा इस जहाज को बार-बार रुकने और निर्देशों का पालन करने की सख्त चेतावनी दी गई थी। जब जहाज ने अमेरिकी सेना के निर्देशों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया, तब अमेरिकी लड़ाकू विमान ने कार्रवाई करते हुए जहाज के मुख्य इंजन रूम को निशाना बनाकर दो बेहद घातक ‘हेलफायर मिसाइलें’ दाग दीं।

अमेरिकी नाकेबंदी के कड़े नियम और अब तक की बड़ी सैन्य कार्रवाइयों का लेखा-जोखा
यूएस सेंट्रल कमांड द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, 13 अप्रैल से ओमान और उसके आस-पास के समुद्री क्षेत्रों में एक सख्त अमेरिकी नाकेबंदी लागू है। इस सैन्य ब्लॉकेड की शुरुआत के बाद से अमेरिकी सेना नियमों का उल्लंघन करने वाले या अवैध परिवहन में लिप्त पाए गए कुल नौ बड़े जहाजों पर हमला करके उन्हें पूरी तरह निष्क्रिय (बेकार) कर चुकी है। इसके अतिरिक्त, अमेरिकी नौसेना ने अंतरराष्ट्रीय नियमों और रूट दिशा-निर्देशों का पालन करने वाले लगभग 135 वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा को देखते हुए उनका मार्ग (रास्ता) डाइवर्ट किया है। हालांकि, अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि युद्धग्रस्त या संकटग्रस्त क्षेत्रों में मानवीय सहायता, भोजन और जीवन रक्षक दवाएं ले जा रहे 42 जहाजों को बिना किसी बाधा के सुरक्षित जाने की अनुमति दी गई है।
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ईरानी मीडिया का दावा
इस बीच, ईरान की आधिकारिक ‘मेहर न्यूज एजेंसी’ ने इस मिसाइल हमले के बाद की जमीनी स्थिति पर एक रिपोर्ट जारी की है। ईरानी मीडिया के दावों के अनुसार, हमले का शिकार हुए ‘एम/टी जलवीर’ जहाज पर कुल 20 क्रू सदस्य सवार थे, जिनमें से अधिकांश भारतीय मूल के नाविक थे। मिसाइल दागने के बाद जब जहाज धूं-धूं कर जलने लगा, तो वहां से गुजर रहे अन्य अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक जहाजों ने तत्परता दिखाते हुए पांच क्रू सदस्यों को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया। इन बचाए गए नाविकों को तुरंत ओमान के तट पर पहुंचाया गया, जहां उन्हें आवश्यक चिकित्सा सहायता प्रदान की जा रही है। हालांकि, जहाज पर मौजूद शेष क्रू सदस्यों की वर्तमान स्थिति और सुरक्षा को लेकर अभी भी संशय बना हुआ है।
भारत सरकार ने हमले की तीखी निंदा की
भारत सरकार ने इस घटना को अत्यंत गंभीरता से लिया है और अमेरिकी सेना के इस घातक हमले की पुरजोर शब्दों में कड़ी निंदा की है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस सैन्य कार्रवाई को ‘बेहद चिंताजनक’ और अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों का उल्लंघन करार दिया है। विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने गुरुवार को मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि हाल के दिनों में पश्चिम एशिया के समुद्री क्षेत्रों में भारतीय नाविकों को निशाना बनाने वाली कई अवांछित घटनाएं हुई हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत सरकार अपने नाविक समुदाय की सुरक्षा और भलाई को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है और इस पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता। भारत ने कड़ा कूटनीतिक विरोध दर्ज कराते हुए 10 जून को अमेरिका के खिलाफ एक औपचारिक डिमार्शे (Demarche) जारी किया और नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास के चीफ डी अफेयर्स (CDA) को तलब कर अपनी सख्त नाराजगी व्यक्त की।










