Rajya Sabha Elections : देश के राजनीतिक गलियारों से राज्यसभा चुनाव को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है। राज्यसभा की कुल 26 खाली सीटों में से 23 सीटों पर उम्मीदवारों को निर्विरोध चुन लिया गया है। निर्विरोध चुने गए इन 23 सांसदों में सबसे ज्यादा 12 उम्मीदवार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से हैं। इसके अलावा कांग्रेस के 5, तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के 3, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) का 1, नेशनल पीपुल्स पार्टी (NPP) का 1 और जनसेना पार्टी का 1 उम्मीदवार शामिल है। इस निर्विरोध निर्वाचन में भाजपा को सीधे तौर पर 2 सीटों का बड़ा फायदा हुआ है। मध्य प्रदेश और गुजरात जैसे अहम राज्यों में कांग्रेस के हाथ से सीटें खिसककर भाजपा के पाले में आ गई हैं, जिससे उच्च सदन में सत्तारूढ़ गठबंधन की स्थिति और मजबूत हुई है।

दिग्गज नेताओं की जीत और मध्य प्रदेश-गुजरात में कांग्रेस को लगा बड़ा झटका
इस चुनाव में निर्विरोध जीत दर्ज करने वालों में कई बड़े सियासी चेहरे शामिल हैं। कर्नाटक से कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और पार्टी के मीडिया व प्रचार प्रमुख पवन खेड़ा ने आसानी से जीत हासिल की है। सीटों के गणित को समझें तो मध्य प्रदेश में खाली हुई 3 सीटों में से पहले 2 भाजपा और 1 कांग्रेस के पास थी। वहीं गुजरात की 4 खाली सीटों में से 3 भाजपा और 1 कांग्रेस के पास थी। लेकिन इस बार बदले राजनीतिक समीकरणों के कारण इन दोनों राज्यों की सभी 7 सीटों पर भाजपा के उम्मीदवारों ने निर्विरोध जीत का परचम लहराया है। अब बाकी बची 3 सीटों के लिए आगामी 18 जून को मतदान कराया जाएगा।

मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज होने पर भड़के राहुल
मध्य प्रदेश से भाजपा उम्मीदवार रजनीश अग्रवाल, तरुण चुग और महेश केवट को चुनाव आयोग द्वारा निर्वाचन सर्टिफिकेट भी सौंप दिए गए हैं। इस बीच, कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है, जिसने इस पर सुनवाई शुक्रवार तक के लिए टाल दी है। इस पूरे घटनाक्रम पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि भाजपा और चुनाव आयोग की जुगलबंदी के कारण यह ‘सीट चोरी’ हुई है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस प्रत्याशी का पर्चा बेहद मामूली आपत्ति के आधार पर निरस्त कर दिया गया, जबकि भाजपा समर्थित उम्मीदवार को अपनी त्रुटियां सुधारने का पूरा मौका दिया गया। चुनाव आयोग का यह दोहरा रवैया लोकतंत्र के खिलाफ है।
एनडीए बनाम इंडिया गठबंधन का गणित
इस चुनाव के बाद भी संसद के उच्च सदन में स्थिति लगभग सामान्य रहने की उम्मीद है। महाराष्ट्र और तमिलनाडु में हुए उपचुनावों में एनडीए को एक सीट का नुकसान उठाना पड़ा है। आंध्र प्रदेश की बात करें तो वहां की चारों सीटें एनडीए के खाते में गई हैं, जिनमें से तीन पहले वाईएसआरसीपी के पास थीं। झारखंड की 2 सीटों पर विपक्षी ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन की पकड़ मजबूत दिख रही है, लेकिन यदि भाजपा के पक्ष में क्रॉस वोटिंग होती है तो समीकरण बदल सकते हैं। राजस्थान में स्थिति यथावत है, जहां 2 सीटें भाजपा और 1 कांग्रेस को मिली है। वहीं, कर्नाटक में कांग्रेस ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 3 सीटों पर कब्जा जमाया है, जबकि एनडीए को सिर्फ 1 सीट से संतोष करना पड़ा है।
पूर्वोत्तर राज्यों की स्थिति और 245 सदस्यों वाली राज्यसभा में दलीय स्थिति
पूर्वोत्तर भारत के राज्यों में भी एनडीए का दबदबा देखने को मिला है। मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश की एक-एक सीट भाजपा के खाते में गई है, जबकि मेघालय में नेशनल पीपुल्स पार्टी (NPP) अपनी सीट सुरक्षित रखने में कामयाब रही है। मिजोरम में जोरम पीपल्स मूवमेंट की स्थिति मजबूत नजर आ रही है। वर्तमान में 245 सदस्यों वाली राज्यसभा की कुल दलीय स्थिति पर नजर डालें तो राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के पास अब 147 सांसदों का भारी-भरकम बहुमत है। इसके मुकाबले मुख्य विपक्षी खेमे के पास कुल 67 सांसद हैं, जबकि किसी भी गठबंधन का हिस्सा नहीं रहे अन्य क्षेत्रीय दलों के पास 28 सीटें बची हैं।
Read More : Lucknow Crime : लखनऊ में मानवता शर्मसार, मूक मासूम से दुष्कर्म, पुलिस हिरासत में आरोपी नाबालिग










