Humayun Kabir
Humayun Kabir: तृणमूल कांग्रेस (TMC) विधायक हुमायूं कबीर द्वारा मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में बाबरी मस्जिद का निर्माण करने के ऐलान के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में भारी भूचाल आ गया है। इस संवेदनशील मुद्दे ने राज्य में कानून और व्यवस्था (Law and Order) पर चिंताएं बढ़ा दी हैं, जिसके मद्देनजर राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने सख्त रुख अपनाया है और राज्य सरकार को निवारक गिरफ्तारी (Preventive Arrest) का आदेश दिया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए, बुधवार को राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि विधायक हुमायूं कबीर के भड़काऊ बयानों और प्रस्तावित गतिविधियों के परिणामस्वरूप यदि राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति में जरा भी गिरावट आती है, तो तत्काल कड़ी कार्रवाई की जाए। राज्यपाल ने विशेष रूप से निर्देश दिया है कि कबीर को ‘पहले से गिरफ्तार’ किया जाए, जिसे ‘निवारक गिरफ्तारी’ कहा जाता है। गवर्नर ने स्पष्ट किया है कि यदि राज्य सरकार समय पर कार्रवाई करने में विफल रहती है, तो वह स्वयं अपनी संवैधानिक शक्तियों का उपयोग करते हुए इस संबंध में कदम उठाएंगे। उन्होंने इस आशय का एक पत्र राज्य सरकार को भेजा है। राज्यपाल के इस कड़े रुख ने राजभवन और राज्य सचिवालय के बीच एक नए टकराव को जन्म दे दिया है।
हुमायूं कबीर ने विवादित बयान देते हुए सार्वजनिक रूप से ऐलान किया है कि वह 6 दिसंबर को बेलडांगा में बाबरी मस्जिद का शिलान्यास समारोह आयोजित करेंगे। हालांकि, उन्होंने इस परियोजना के लिए जमीन 확보 करने में राज्य प्रशासन पर सहयोग न करने का गंभीर आरोप लगाया है। कबीर ने प्रशासन की कथित निष्क्रियता को लेकर राज्य सरकार पर कड़ा निशाना साधा है, यहां तक कि उन्होंने अधिकारियों को खुली चुनौती देते हुए उनका उपहास भी उड़ाया। उनके इस आक्रामक रवैये और भड़काऊ बयानों ने राज्य की राजनीतिक फिजां को पूरी तरह से गरमा दिया है और विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच तीखी बहस छिड़ गई है।
राज्यपाल के ‘निवारक गिरफ्तारी’ के आदेश के जवाब में, विधायक हुमायूं कबीर ने पलटवार करते हुए राज्यपाल के अधिकार क्षेत्र पर ही सवाल उठा दिए हैं। कबीर ने कहा कि राज्यपाल ‘अपनी अथॉरिटी से बाहर जाकर’ बयान दे रहे हैं, क्योंकि कानून और व्यवस्था बनाए रखने की सीधी जिम्मेदारी चुनी हुई राज्य सरकार की होती है। उन्होंने कहा, “गवर्नर लॉ एंड ऑर्डर देखने के लिए जिम्मेदार नहीं हैं।”
कबीर ने आगे स्पष्ट किया, “लॉ एंड ऑर्डर देखने के लिए एक चुनी हुई सरकार होती है, एक चीफ मिनिस्टर, एक पुलिस मिनिस्टर, उस जिले के SP, OC, और IC होते हैं। जब लॉ एंड ऑर्डर बिगड़ेगा, तो वे मुझे अरेस्ट कर लेंगे। अगर पुलिस को कोई सबूत मिलता है कि मैं कहीं कानून तोड़ रहा हूं, या लॉ एंड ऑर्डर खराब कर रहा हूं, तो पक्का पुलिस को मुझे अरेस्ट करने का हक है।” उन्होंने एक तरह से प्रशासन और पुलिस को चुनौती देते हुए कहा कि वह अपने तय कार्यक्रम पर कायम हैं।
बाबरी मस्जिद के निर्माण की घोषणा के बाद से ही जिस जमीन पर यह प्रस्तावित था, उसे लेकर भी विवाद और अनिश्चितता पैदा हो गई थी। हालांकि, हुमायूं कबीर अब दावा कर रहे हैं कि जमीन तैयार है। उन्होंने कहा, “शनिवार को दोपहर 12 बजे दुनिया भर से लोग शिलान्यास समारोह देखेंगे।” यह दावा ऐसे समय में आया है जब पूरा प्रशासनिक तंत्र हाई अलर्ट पर है।
इस बीच, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी जिले के दौरे पर हैं और उन्होंने बरहामपुर में एक महत्वपूर्ण मीटिंग में भाग लिया है। हुमायूं कबीर का कहना है कि उन्हें भी इस मीटिंग में शामिल होने का निमंत्रण मिला है और वह निश्चित रूप से वहां जाएंगे। विधायक के मस्जिद निर्माण के ऐलान और मुख्यमंत्री के जिले के दौरे ने राजनीतिक तापमान को और बढ़ा दिया है, जिससे यह मामला राज्य की राजनीति के केंद्र में आ गया है। इस पूरे घटनाक्रम पर केंद्र सरकार और सुरक्षा एजेंसियों की भी करीबी नजर बनी हुई है।
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