Hungary Election 2026
Hungary Election 2026: हंगरी के प्रो-रूसी प्रधानमंत्री विक्टर ओरबान इन दिनों एक अभूतपूर्व राजनीतिक संकट से गुजर रहे हैं। आगामी 12 अप्रैल 2026 को होने वाले चुनावों में अपनी सत्ता बचाने के लिए उन्होंने एक ऐसा दांव खेला है जिसने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को हैरान कर दिया है। ओरबान अपने मतदाताओं को यह समझाने में जुटे हैं कि हंगरी के लिए सबसे बड़ा खतरा देश की डगमगाती अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि पड़ोसी देश यूक्रेन है। उन्होंने पूरे देश में यूक्रेन के खिलाफ एक आक्रामक मीडिया अभियान शुरू किया है, जिसमें रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार भारी मात्रा में भ्रामक जानकारियां और ‘डिसइन्फॉर्मेशन’ का सहारा लिया जा रहा है।
ओरबान के इस अभियान का मुख्य संदेश यह है कि यदि हंगरी ने यूरोपीय संघ (EU) के साथ मिलकर यूक्रेन का समर्थन जारी रखा, तो देश दिवालिया हो जाएगा और यहाँ के युवाओं को युद्ध के मोर्चे पर अपनी जान गंवानी पड़ेगी। देश की सड़कों पर ऐसे बिलबोर्ड्स लगाए गए हैं जिनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) द्वारा निर्मित तस्वीरों का उपयोग किया गया है। इन पोस्टरों में यूक्रेनी राष्ट्रपति व्लादिमिर ज़ेलेंस्की को यूरोपीय अधिकारियों के साथ खड़ा दिखाया गया है, जहाँ वे हाथ फैलाकर पैसे मांग रहे हैं। इसके जरिए ओरबान यह जताना चाहते हैं कि यूरोपीय संघ हंगरी का पैसा यूक्रेन की अंतहीन जंग में झोंक रहा है।
हंगरी की सरकार द्वारा वित्तपोषित इन विज्ञापनों पर स्पष्ट लिखा है— “ब्रसेल्स को हमारा संदेश: हम भुगतान नहीं करेंगे!” यह सीधे तौर पर यूरोपीय संघ की नीतियों को चुनौती है। ओरबान को पुतिन का सबसे करीबी सहयोगी माना जाता है। जब रूस-यूक्रेन युद्ध अपने पांचवें साल में प्रवेश कर रहा है, तब भी हंगरी ने रूस पर नए प्रतिबंधों के पैकेज को ब्लॉक कर दिया है। ओरबान का तर्क है कि जब तक यूक्रेन के रास्ते आने वाली रूसी तेल की आपूर्ति बहाल नहीं होती, वे किसी भी प्रो-यूक्रेन नीति को वीटो करते रहेंगे। उनका कहना है कि हंगरी की ऊर्जा सुरक्षा के लिए रूस के साथ ‘व्यावहारिक’ रिश्ते जरूरी हैं।
2010 से लगातार सत्ता पर काबिज ओरबान को इस बार सबसे कड़ी चुनौती अपने ही पूर्व सहयोगी पीटर माग्यार से मिल रही है। 44 वर्षीय वकील माग्यार ने ‘तिस्ज़ा पार्टी’ बनाकर ओरबान के 16 साल के शासन को हिला दिया है। अधिकांश स्वतंत्र ओपिनियन पोल्स में माग्यार की पार्टी ओरबान की ‘फिडेज़’ पार्टी से आगे चल रही है। माग्यार का ध्यान जीवनयापन की बढ़ती लागत, स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार और भ्रष्टाचार के खात्मे पर है। वे हंगरी की लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने और पश्चिमी देशों के साथ संबंधों को फिर से पटरी पर लाने का वादा कर रहे हैं।
ओरबान की लोकप्रियता में गिरावट की एक बड़ी वजह हालिया राजनीतिक घोटाले भी हैं। बच्चों के यौन शोषण मामले में एक सहयोगी को राष्ट्रपति द्वारा क्षमा दान देने के मामले ने जनता में भारी आक्रोश पैदा किया, जिसके कारण राष्ट्रपति और न्याय मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा। ओरबान अब पुतिन की शैली अपनाते हुए अपने आलोचकों को “विदेशी एजेंट” कह रहे हैं और मीडिया पर नकेल कस रहे हैं। 12 अप्रैल का चुनाव यह तय करेगा कि हंगरी यूरोपीय संघ के साथ चलेगा या रूस की छत्रछाया में अपनी अलग राह बनाएगा।
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