Ukraine Russia conflict: ‘आतंकवादी के देश में नहीं जाऊंगा’, जेलेंस्की ने पुतिन का मास्को निमंत्रण ठुकराया,

Ukraine Russia conflict : रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कोशिशों के बावजूद यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के मास्को में बातचीत के निमंत्रण को साफ़ तौर पर ठुकरा दिया है। जेलेंस्की ने कहा कि वह “उस देश की राजधानी नहीं जा सकते जो उनके देश पर रोजाना मिसाइल हमला कर रहा है।” यह बयान यूक्रेन-रूस के बीच चल रही कड़ी तनातनी और डिप्लोमैसी की चुनौतियों को दर्शाता है। जेलेंस्की का कड़ा रुख एक इंटरव्यू में जेलेंस्की ने स्पष्ट कहा “मैं उस आतंकवादी की राजधानी नहीं जा सकता। अगर पुतिन बातचीत करना चाहते हैं तो उन्हें कीव आना चाहिए।” उन्होंने पुतिन पर राजनीतिक चालबाजी का आरोप लगाया और कहा कि रूस वार्ता में देरी करने के लिए रणनीति अपना रहा है। जेलेंस्की ने यह भी कहा कि पुतिन अमेरिका के साथ “खेल” खेल रहे हैं ताकि बातचीत को टाला जा सके। पुतिन का मास्को में बैठक प्रस्ताव रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने इस बैठक के लिए शर्तें रखी हैं कि वार्ता की “अच्छी तैयारी” हो और इसका उद्देश्य सकारात्मक परिणाम निकालना हो। पुतिन ने कहा है, “मैंने कभी बैठक की संभावना से इनकार नहीं किया। अगर जेलेंस्की तैयार हैं तो वह मास्को आ सकते हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से इस बात पर चर्चा की है कि क्या बैठक संभव हो सकती है। Завод Flextronics у Мукачеві – підприємство з американськими інвестиціями. Тут виробляли побутову техніку. Росія завдала по ньому ракетного удару вранці 21 серпня. Через цей удар постраждали 17 людей, деякі з них досі в лікарні. Сьогодні на місці поспілкувався з представниками… pic.twitter.com/c4AgmvjFFM — Volodymyr Zelenskyy / Володимир Зеленський (@ZelenskyyUa) September 5, 2025 ट्रंप की मध्यस्थता और अब उठ रहे सवाल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दोनों देशों के नेताओं से अलग-अलग मुलाकात कर युद्ध को रोकने की कोशिश की थी। शुरुआती सहमति के बाद अब मास्को में वार्ता को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। जेलेंस्की के इस कड़े रुख के बाद सवाल उठने लगे हैं कि क्या ट्रंप की इस मध्यस्थता से युद्ध को समाप्त कराने का प्रयास सफल होगा या नहीं। ट्रंप की कोशिशों के बाद भी अगर वार्ता नहीं हो पाती, तो इसका असर यूक्रेन संकट पर पड़ सकता है, जिससे वैश्विक राजनीति और सुरक्षा पर भी गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। यूक्रेनी राष्ट्रपति का मास्को न जाने का निर्णय युद्ध विराम की दिशा में एक बड़ी बाधा साबित हो सकता है। पुतिन की शर्तें और जेलेंस्की की सख्ती से यह स्पष्ट है कि अभी शांति वार्ता के लिए दोनों पक्षों के बीच विश्वास की कमी है। डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता प्रयासों को एक बड़ा झटका लग सकता है, जबकि दुनिया इस संघर्ष के जल्द खत्म होने की आशा लगाए बैठी है। Read More : Engineer Rashid attack: तिहाड़ जेल में बारामुला सांसद इंजीनियर राशिद पर हमला, परिवार और पार्टी ने जताई नाराज़गी

Ukraine Russia conflict : रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कोशिशों के बावजूद यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के मास्को में बातचीत के निमंत्रण को साफ़ तौर पर ठुकरा दिया है। जेलेंस्की ने कहा कि वह “उस देश की राजधानी नहीं जा सकते जो उनके देश पर रोजाना मिसाइल हमला कर रहा है।” यह बयान यूक्रेन-रूस के बीच चल रही कड़ी तनातनी और डिप्लोमैसी की चुनौतियों को दर्शाता है।

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जेलेंस्की का कड़ा रुख

एक इंटरव्यू में जेलेंस्की ने स्पष्ट कहा “मैं उस आतंकवादी की राजधानी नहीं जा सकता। अगर पुतिन बातचीत करना चाहते हैं तो उन्हें कीव आना चाहिए।”
उन्होंने पुतिन पर राजनीतिक चालबाजी का आरोप लगाया और कहा कि रूस वार्ता में देरी करने के लिए रणनीति अपना रहा है। जेलेंस्की ने यह भी कहा कि पुतिन अमेरिका के साथ “खेल” खेल रहे हैं ताकि बातचीत को टाला जा सके।

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पुतिन का मास्को में बैठक प्रस्ताव

रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने इस बैठक के लिए शर्तें रखी हैं कि वार्ता की “अच्छी तैयारी” हो और इसका उद्देश्य सकारात्मक परिणाम निकालना हो। पुतिन ने कहा है,
“मैंने कभी बैठक की संभावना से इनकार नहीं किया। अगर जेलेंस्की तैयार हैं तो वह मास्को आ सकते हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से इस बात पर चर्चा की है कि क्या बैठक संभव हो सकती है।

ट्रंप की मध्यस्थता और अब उठ रहे सवाल

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दोनों देशों के नेताओं से अलग-अलग मुलाकात कर युद्ध को रोकने की कोशिश की थी। शुरुआती सहमति के बाद अब मास्को में वार्ता को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। जेलेंस्की के इस कड़े रुख के बाद सवाल उठने लगे हैं कि क्या ट्रंप की इस मध्यस्थता से युद्ध को समाप्त कराने का प्रयास सफल होगा या नहीं। ट्रंप की कोशिशों के बाद भी अगर वार्ता नहीं हो पाती, तो इसका असर यूक्रेन संकट पर पड़ सकता है, जिससे वैश्विक राजनीति और सुरक्षा पर भी गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

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यूक्रेनी राष्ट्रपति का मास्को न जाने का निर्णय युद्ध विराम की दिशा में एक बड़ी बाधा साबित हो सकता है। पुतिन की शर्तें और जेलेंस्की की सख्ती से यह स्पष्ट है कि अभी शांति वार्ता के लिए दोनों पक्षों के बीच विश्वास की कमी है। डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता प्रयासों को एक बड़ा झटका लग सकता है, जबकि दुनिया इस संघर्ष के जल्द खत्म होने की आशा लगाए बैठी है।

Read More : Engineer Rashid attack: तिहाड़ जेल में बारामुला सांसद इंजीनियर राशिद पर हमला, परिवार और पार्टी ने जताई नाराज़गी

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