IMD Red Alert
IMD Red Alert : भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने देश के कई हिस्सों में बढ़ते तापमान और भीषण गर्मी को देखते हुए अगले तीन दिनों के लिए हीटवेव (लू) का अलर्ट जारी किया है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, उत्तर-पश्चिम भारत और मध्य भारत के अधिकांश क्षेत्रों में गर्मी अब ‘खतरनाक’ स्तर पर पहुंच चुकी है। कई राज्यों में पारा सामान्य से 4 से 6 डिग्री सेल्सियस ऊपर दर्ज किया जा रहा है। IMD ने चेतावनी दी है कि आने वाले 72 घंटे नागरिकों के लिए काफी चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं, इसलिए सावधानी बरतना अनिवार्य है। विशेष रूप से मैदानी इलाकों में गर्म हवाओं का प्रकोप बढ़ने की संभावना है।
मौसम विभाग ने अपनी एडवाइजरी में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि दोपहर 12:00 बजे से शाम 4:00 बजे के बीच धूप सबसे प्रखर और हानिकारक होती है। इस समय अंतराल में लू (Heatwave) चलने की स्थिति सबसे गंभीर होती है। IMD ने लोगों को सलाह दी है कि जब तक बहुत जरूरी न हो, इस दौरान घर से बाहर न निकलें। सीधी धूप के संपर्क में आने से न केवल शरीर का तापमान तेजी से बढ़ता है, बल्कि त्वचा संबंधी बीमारियों और हीट स्ट्रोक का खतरा भी कई गुना बढ़ जाता है। यदि बाहर जाना अनिवार्य हो, तो सिर को ढककर रखें और छाते का प्रयोग करें।
गर्मी के इस भीषण प्रकोप से बचने के लिए शरीर को अंदरूनी रूप से ठंडा रखना बेहद जरूरी है। मौसम विभाग ने सुझाव दिया है कि लोग प्यास न लगने पर भी नियमित अंतराल पर पानी पीते रहें। शरीर को हाइड्रेटेड रखने के लिए केवल पानी ही नहीं, बल्कि ओआरएस (ORS), नींबू पानी, छाछ, लस्सी और नारियल पानी जैसे तरल पदार्थों का सेवन भी बढ़ाना चाहिए। इसके साथ ही, ढीले और हल्के रंग के सूती कपड़े पहनने की सलाह दी गई है, ताकि शरीर को हवा मिलती रहे और पसीना आसानी से सूख सके।
गर्मी के कारण होने वाली शारीरिक समस्याओं, विशेषकर हीट स्ट्रोक, के लक्षणों को पहचानना जीवन रक्षक साबित हो सकता है। यदि आपको या आपके आसपास किसी को बहुत तेज बुखार, सिर में असहनीय दर्द, चक्कर आना, जी मिचलाना, उल्टी या अचानक कमजोरी महसूस हो, तो इसे सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज न करें। ये हीट स्ट्रोक के प्रारंभिक लक्षण हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में व्यक्ति को तुरंत ठंडी या छायादार जगह पर ले जाएं और बिना देरी किए नजदीकी डॉक्टर या अस्पताल से संपर्क करें।
गर्मी की यह लहर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से किसी बीमारी (जैसे हृदय रोग या मधुमेह) से जूझ रहे लोगों के लिए घातक हो सकती है। इनका शरीर बढ़ते तापमान के प्रति अधिक संवेदनशील होता है। परिवार के सदस्यों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि घर के बुजुर्ग और बच्चे पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ ले रहे हैं और वे धूप के सीधे संपर्क में नहीं आ रहे हैं। प्रशासन ने भी अपील की है कि लोग पड़ोस में रहने वाले अकेले बुजुर्गों का भी हाल-चाल लेते रहें ताकि किसी भी मेडिकल इमरजेंसी से समय रहते निपटा जा सके।
IMD की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर-पश्चिम भारत में 28 अप्रैल तक तापमान में विशेष कमी की उम्मीद नहीं है। हालांकि, 29 और 30 अप्रैल को पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से तापमान में 3-5°C की गिरावट देखी जा सकती है। इसके बाद, 1 मई से फिर पारा चढ़ना शुरू होगा। मध्य भारत में भी 28 अप्रैल के बाद 2-3°C की मामूली गिरावट की संभावना है। पूर्वी भारत में 27 अप्रैल से 1 मई के बीच लोगों को गर्मी से थोड़ी राहत मिल सकती है, लेकिन तब तक लू का असर बरकरार रहेगा।
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