Manipur Meitei Agreement: मणिपुर में लंबे समय से जारी संघर्ष के बीच शनिवार को मैतेई संगठन अरंबाई तेंगगोल ने केंद्र सरकार और कुकी-जो समुदाय के दो प्रमुख समूहों के बीच हुए सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस (एसओओ) समझौते को शांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। हालांकि, कुकी नेशनल ऑर्गनाइजेशन (केएनओ) और यूनाइटेड पीपल्स फ्रंट (यूपीएफ) ने नेशनल हाईवे-2 को लेकर साफ किया कि बिना उचित मंजूरी के बफर जोन में खुली आवाजाही स्वीकार्य नहीं होगी और इसे गलत संदर्भ में पेश नहीं किया जाना चाहिए।

एसओ समझौता: मणिपुर में शांति की दिशा में बड़ा प्रयास
केन्द्रीय सरकार और कुकी-जो समुदाय के दो प्रमुख संगठनों के बीच पुनः हुए एसओ समझौते के तहत मणिपुर की क्षेत्रीय अखंडता को बनाए रखने, संवेदनशील इलाकों से हथियारबंद कैंप हटाने और स्थायी शांति स्थापित करने पर सहमति बनी है। यह समझौता लंबे समय से चले आ रहे विवाद को शांतिपूर्ण समाधान की ओर ले जाने का प्रयास है।

मैतेई संगठन अरंबाई तेंगगोल ने इस समझौते को शांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। संगठन ने कहा कि यह एक सकारात्मक संकेत है जो मणिपुर में दशकों से चली आ रही हिंसा को कम कर सकता है।
कुकी संगठन की चेतावनी: नेशनल हाईवे-2 पर नियंत्रण
वहीं, कुकी समुदाय के दो प्रमुख संगठन केएनओ और यूपीएफ ने स्पष्ट किया है कि नेशनल हाईवे-2 को बफर जोन में खुली आवाजाही के लिए नहीं खोला जाएगा। इन संगठनों ने कहा कि इस मामले को गलत तरीके से पेश न किया जाए, क्योंकि यह समझौता शांति स्थापित करने के लिए है न कि बफर जोन में अनियंत्रित आवाजाही की मंजूरी देने के लिए। यह स्पष्ट संदेश इस बात को दर्शाता है कि स्थिति पूरी तरह से नियंत्रित और व्यवस्थित तरीके से ही आगे बढ़ेगी, जिससे क्षेत्र में स्थिरता बनी रहे।
प्रधानमंत्री मोदी के संभावित मणिपुर दौरे की तैयारियां
मणिपुर में शांति प्रक्रिया के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इंफाल दौरे की तैयारियां जोरों पर हैं। कांगला किले में भव्य मंच का निर्माण तेजी से चल रहा है, जहां प्रधानमंत्री का स्वागत किया जाएगा। इस मंच के सामने लगभग 15,000 से अधिक लोगों के बैठने की व्यवस्था की जा रही है।
प्रधानमंत्री के दौरे से उम्मीद है कि मणिपुर में जारी संघर्ष के समाधान और विकास की दिशा में नई ऊर्जा मिलेगी। मणिपुर में मैतेई और कुकी-जो समुदायों के बीच सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस समझौता शांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि, दोनों पक्षों की चेतावनी और शर्तें यह दर्शाती हैं कि क्षेत्रीय स्थिरता के लिए अभी भी सावधानी और संवेदनशीलता की जरूरत है। प्रधानमंत्री मोदी के संभावित दौरे से मणिपुर में विकास और शांति के लिए नई उम्मीदें जगी हैं।










