Shamli Tragedy: उत्तर प्रदेश के शामली जिले के कैराना कस्बे से एक दर्दनाक खबर सामने आई है। मोहल्ला खेल कला निवासी 38 वर्षीय मजदूर सलमान ने शुक्रवार दोपहर अपने चार छोटे बच्चों के साथ यमुना नदी में छलांग लगा दी। बताया जा रहा है कि सलमान ने अपनी पत्नी की बेवफाई और ससुराल पक्ष के लोगों की लगातार प्रताड़ना से तंग आकर यह चरम कदम उठाया। इस हृदयविदारक घटना ने पूरे इलाके में शोक व आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है।

घटना का विवरण
जानकारी के मुताबिक, शुक्रवार दोपहर करीब 12 बजे सलमान अपनी 12 वर्षीय बेटी महक, 5 वर्षीय शिफा, 3 वर्षीय बेटे आयान और केवल आठ माह की इनायशा को लेकर यमुना नदी के पुराने पुल पर पहुंचा। वहां उसने अपने मोबाइल फोन से तीन वीडियो संदेश रिकॉर्ड किए और उन्हें अपनी बहन को भेजा। वीडियो में सलमान रोते हुए कहता नजर आ रहा है कि उसकी पत्नी और उसके प्रेमी ने सात महीने से उसकी जिंदगी नर्क बना दी है और उसकी मौत के लिए वही जिम्मेदार होंगे।

वीडियो में सलमान यह भी कहता है कि उसने पुलिस और कानून से मदद की कोशिश की, लेकिन कोई समाधान नहीं मिला। इसके कुछ ही समय बाद वह चारों बच्चों सहित नदी में कूद गया।
परिजनों का बयान और पुलिस की कार्रवाई
सलमान की बहन गुलिस्ता ने बताया कि भाई सुबह बच्चों को लेकर निकला था। कुछ देर बाद वीडियो मिला लेकिन देर से देखने पर पूरी घटना का पता चला। जब परिजन यमुना पुल पहुंचे तो स्थानीय लोगों ने बताया कि एक व्यक्ति चार बच्चों के साथ नदी में कूद गया है।
सूचना मिलते ही पुलिस, पीएसी और प्राइवेट गोताखोरों की टीम मौके पर पहुंची और तलाश अभियान शुरू किया गया। अपर पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार ने बताया कि परिजनों की सूचना के तत्काल बाद सर्च ऑपरेशन चलाया गया है और टीमों को नदी के आसपास तैनात किया गया है। देर रात तक पांचों की तलाश जारी रही।
क्षेत्र में मातम और सवाल
कैराना की यह घटना पूरे शामली जिले में चर्चा का विषय बन गई है। लोग इस बात से दुखी हैं कि एक मजदूर पिता ने कहाँ तक मजबूरी में ऐसा कदम उठाया। मोहल्लेवासियों ने बताया कि सलमान मेहनतकश और ईमानदार व्यक्ति था, परंतु पारिवारिक विवादों ने उसे मानसिक रूप से तोड़ दिया।
यह घटना एक बार फिर समाज में मानसिक तनाव, पारिवारिक कलह और समय पर परामर्श की कमी से होने वाली त्रासदियों पर गंभीर सवाल खड़े करती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते मदद और संवेदना मिलती, तो शायद पाँच जिंदगियाँ यूँ असमय खत्म न होतीं। यह दर्दनाक हादसा एक चेतावनी की तरह है कि पारिवारिक समस्याओं का समाधान संवाद और सामाजिक सहयोग से ही संभव है, आत्मघाती कदम से नहीं।











