India Bangladesh trade: भारत और बांग्लादेश के बीच बीते कुछ समय से रिश्तों में गहराता तनाव अब व्यापारिक स्तर पर भी साफ नजर आ रहा है। शेख हसीना सरकार के तख्तापलट और अंतरिम प्रधानमंत्री मुहम्मद यूनुस के चीन में दिए गए विवादास्पद बयानों के बाद दोनों देशों के रिश्तों में आई खटास ने अब आयात-निर्यात पर असर डालना शुरू कर दिया है।

जूट उत्पादों के लैंड रूट इम्पोर्ट पर रोक
भारत के विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) की हालिया अधिसूचना के मुताबिक, बांग्लादेश से जूट और उससे बने कुछ उत्पादों के लैंड रूट के जरिए आयात पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। प्रतिबंधित सामानों की सूची में जूट और बास्ट फाइबर से बने ब्लीच व अनब्लीच बुने हुए कपड़े, सुतली, डोरी, रस्सी, बोरे और थैले शामिल हैं।

हालांकि, इन वस्तुओं का आयात अब भी महाराष्ट्र के न्हावा शेवा बंदरगाह के जरिए किया जा सकता है। यानी लैंड पोर्ट्स के जरिए इम्पोर्ट पूरी तरह प्रतिबंधित है, लेकिन समुद्री मार्ग से सीमित मात्रा में छूट जारी है।
पहले भी लगे थे प्रतिबंध
इससे पहले 27 जून और फिर मई तथा अप्रैल में भारत ने बांग्लादेश से कुछ रेडीमेड कपड़ों, प्रोसेस्ड फूड और अन्य जूट उत्पादों पर लैंड इम्पोर्ट बैन लगाया था। 9 अप्रैल को भारत ने बांग्लादेश को दी गई ट्रांसशिपमेंट सुविधा को भी कई देशों के लिए वापस ले लिया था, जिसमें मध्य पूर्व, यूरोप को छोड़ अन्य कई बाजारों से निर्यात की छूट रद्द कर दी गई थी।
रिश्तों में खटास के पीछे राजनीतिक वजहें
भारत-बांग्लादेश संबंधों में खटास की शुरुआत तब हुई जब शेख हसीना की सरकार का तख्तापलट हुआ और अंतरिम शासन में अल्पसंख्यकों—खासकर हिंदुओं—के खिलाफ हिंसा के मामले सामने आए। भारत सरकार ने इन घटनाओं पर बार-बार चिंता जताई। इसके अलावा, मुहम्मद यूनुस के चीन में दिए गए भारत-विरोधी बयान भी दोनों देशों के बीच तनाव को और बढ़ा गए।
आर्थिक असर
भारत और बांग्लादेश का कुल द्विपक्षीय व्यापार 2023-24 में करीब 12.9 बिलियन अमेरिकी डॉलर रहा। 2024-25 में भारत का निर्यात 11.46 बिलियन डॉलर था, जबकि आयात महज 2 बिलियन डॉलर के करीब रहा। व्यापारिक संतुलन भारत के पक्ष में रहा, लेकिन बढ़ते प्रतिबंधों के चलते दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों पर असर पड़ने की आशंका है।
बांग्लादेश भारत के लिए न सिर्फ एक महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार है, बल्कि रणनीतिक दृष्टिकोण से भी अहम पड़ोसी देश है। हालांकि वर्तमान राजनीतिक हालात और सुरक्षा चिंताओं के मद्देनज़र भारत द्वारा लिए गए व्यापारिक निर्णय आवश्यक माने जा रहे हैं, लेकिन इनका दीर्घकालिक असर द्विपक्षीय रिश्तों पर पड़ सकता है। अब देखना यह होगा कि दोनों देश इस तनाव को कैसे संभालते हैं और क्या भविष्य में संबंधों में फिर से सुधार संभव हो पाता है।
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