CG News: छत्तीसगढ़ के पहाड़ी और दूरस्थ इलाकों में मलेरिया संक्रमण के मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। सरगुजा जिले के उदयपुर विकासखंड के कई संवेदनशील गांवों में अब तक 39 लोगों में मलेरिया की पुष्टि हुई है। हालांकि, हाल में की गई सैंपलिंग में संक्रमण की दर कम मिली है, जिसके बाद विभाग ने फिलहाल स्थिति नियंत्रण में होने का दावा किया है। इसके बावजूद प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी और जांच का अभियान लगातार जारी है।

सात गांवों में सामने आए संक्रमण के मामले
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, उदयपुर क्षेत्र के पीजीवीटी ग्राम मतरिंगा, खर्रानगर, मुसरडांड, मुकना पहाड़, बारोपहाड़, बकोई और सेमीघोघरा में मलेरिया के मरीज मिले हैं। 26 जुलाई को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र उदयपुर से जारी रिपोर्ट में 31 मरीजों के संक्रमित होने की जानकारी सामने आई थी। इसके बाद हुई जांच में मरीजों की संख्या बढ़कर 39 हो गई। सभी संक्रमित मरीजों में प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम यानी PF मलेरिया की पुष्टि हुई है।

बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक संक्रमित
स्वास्थ्य विभाग की जांच में सामने आए मरीजों में छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक शामिल हैं। प्रभावित गांवों में मतरिंगा, मुसरडांड और खर्रानगर में संक्रमण के मामले अपेक्षाकृत अधिक मिले हैं। दूरस्थ और पहाड़ी इलाका होने के कारण यहां स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच आसान नहीं है। ऐसे में विभाग ने इन क्षेत्रों को विशेष निगरानी में रखा है और लगातार जांच अभियान चलाया जा रहा है।
घर-घर पहुंच रही स्वास्थ्य विभाग की टीम
मलेरिया के मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की टीमें प्रभावित गांवों में घर-घर जाकर सर्वे कर रही हैं। स्वास्थ्यकर्मी लोगों में बुखार और मलेरिया से जुड़े लक्षणों की जानकारी ले रहे हैं। संदिग्ध मरीजों की मौके पर ही रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट यानी RDT किट से जांच की जा रही है। इसका उद्देश्य संक्रमित मरीजों की जल्द पहचान कर समय पर उपचार शुरू करना है।
संक्रमित मरीजों को तत्काल इलाज
विभाग के अनुसार, जांच में पॉजिटिव पाए गए मरीजों का निर्धारित उपचार प्रोटोकॉल के तहत इलाज शुरू कर दिया गया है। स्वास्थ्यकर्मी मरीजों की स्थिति पर लगातार नजर रख रहे हैं। इसके अलावा मलेरिया से बचाव के लिए प्रभावित परिवारों को मच्छरदानी भी वितरित की जा रही है। ग्रामीणों को मच्छरों से बचने और आसपास साफ-सफाई बनाए रखने के लिए भी जागरूक किया जा रहा है।

75 सैंपल में मिला सिर्फ एक पॉजिटिव
सीएमएचओ सरगुजा पीएस मार्को ने बताया कि करीब एक महीने की अवधि में प्रभावित क्षेत्र से कुल 39 मलेरिया मरीज सामने आए हैं। हालांकि, 6 अगस्त को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने क्षेत्र में 75 लोगों के सैंपल लिए थे। इनमें सिर्फ एक व्यक्ति की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। हालिया जांच के इस आंकड़े को विभाग संक्रमण की दर में कमी के संकेत के तौर पर देख रहा है।
अधिकारियों की टीम कर रही गांवों का दौरा
मलेरिया की स्थिति पर नजर रखने के लिए सीएमएचओ पीएस मार्को, एसडीएम रामराज सिंह, मलेरिया सुपरवाइजर श्रवण श्रीवास समेत स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी और कर्मचारी प्रभावित गांवों का दौरा कर रहे हैं। अधिकारियों की टीम स्थानीय लोगों से बातचीत कर रही है और उन्हें मलेरिया से बचाव के जरूरी उपायों की जानकारी दे रही है। ग्रामीणों से बुखार होने पर तुरंत जांच कराने की अपील की जा रही है।
6 मई से सामने आने लगे थे मामले
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, उदयपुर क्षेत्र में मलेरिया संक्रमण के मामले 6 मई से सामने आने शुरू हुए थे। इसके बाद अलग-अलग गांवों में जांच अभियान चलाकर मरीजों की पहचान की गई। स्वास्थ्य अमले ने संवेदनशील इलाकों में सर्वे, जांच और उपचार की प्रक्रिया तेज कर दी। विभाग का कहना है कि आने वाले दिनों में भी यह अभियान लगातार जारी रखा जाएगा।
दूरस्थ इलाकों पर विशेष निगरानी
पहाड़ी और दूरस्थ गांवों में स्वास्थ्य सुविधाओं की सीमित पहुंच को देखते हुए विभाग ने इन क्षेत्रों को विशेष निगरानी में रखा है। स्वास्थ्य विभाग का मुख्य फोकस संक्रमित मरीजों की समय पर पहचान, उपचार और मच्छरों से बचाव के उपायों पर है। अधिकारियों का कहना है कि हालिया जांच में संक्रमण की दर कम होने से स्थिति में सुधार के संकेत मिले हैं, लेकिन निगरानी में किसी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी।
ग्रामीणों को सावधानी बरतने की सलाह
स्वास्थ्य विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि बुखार या मलेरिया के लक्षण दिखाई देने पर घरेलू उपचार के बजाय तत्काल स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराएं। मच्छरों से बचने के लिए रात में मच्छरदानी का इस्तेमाल करने और आसपास पानी जमा नहीं होने देने की सलाह दी गई है। विभाग के मुताबिक, समय पर जांच और इलाज से मलेरिया के गंभीर प्रभावों को रोका जा सकता है।
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