LAC पर भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच टकराव को लेकर ITBP डीजी के बयान के बाद विदेश मंत्रालय ने प्रतिक्रिया दी है। भारत ने सीमा पर शांति और बातचीत पर जोर दिया। इसी बीच ईरान को जीवनरक्षक दवाओं की आपूर्ति में हवाई संपर्क की चुनौतियां सामने आई हैं।
LAC पर भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच टकराव को लेकर ITBP डीजी के बयान के बाद विदेश मंत्रालय ने प्रतिक्रिया दी है। भारत ने सीमा पर शांति और बातचीत पर जोर दिया। इसी बीच ईरान को जीवनरक्षक दवाओं की आपूर्ति में हवाई संपर्क की चुनौतियां सामने आई हैं।

India-China Border : भारत-चीन सीमा पर टकराव की स्थिति को लेकर भारत के विदेश मंत्रालय ने आईटीबीपी के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर के बयान पर प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत पहले भी स्पष्ट कर चुका है कि सीमा पर स्थिति उस समय बिगड़ती है, जब चीनी सैनिक निर्धारित गश्त प्रक्रिया से हटकर गतिविधियां करते हैं। उन्होंने कहा कि सीमा पर शांति बनाए रखना भारत की प्राथमिकता है और दोनों देशों के बीच लंबित मुद्दों को सुलझाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के मुताबिक, भारत और चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) से जुड़े लंबित मुद्दों के समाधान के लिए मौजूदा राजनयिक और सैन्य तंत्र का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसका उद्देश्य सीमा पर किसी भी तरह की गलतफहमी या गलत आकलन से बचना है। दोनों पक्षों के बीच बातचीत के जरिए विवादों को सुलझाने और परिस्थितियों को नियंत्रण में रखने पर जोर दिया जा रहा है। मंत्रालय ने संकेत दिया कि सीमा प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए संवाद और समन्वय महत्वपूर्ण बने हुए हैं।

रणधीर जायसवाल ने बताया कि भारत और चीन कुछ विशिष्ट क्षेत्रों में वास्तविक नियंत्रण रेखा को लेकर अपनी आपसी समझ बेहतर करने के तरीकों पर चर्चा करने के लिए सहमत हुए हैं। इसका उद्देश्य सीमा प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाना और संभावित गलतफहमियों को कम करना है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखना आवश्यक है। सीमा पर स्थिति सामान्य बनाए रखने के लिए राजनयिक और सैन्य स्तर पर संवाद की भूमिका अहम मानी जा रही है।
दरअसल, आईटीबीपी के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने हाल में कहा था कि पिछले कुछ समय के दौरान वास्तविक नियंत्रण रेखा पर कई मौकों पर भारत के सैनिकों और चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के जवानों का आमना-सामना हुआ है। उनके मुताबिक, इन परिस्थितियों में टकराव की स्थिति भी बनी और आईटीबीपी के जवानों ने उसका प्रभावी ढंग से मुकाबला किया। उन्होंने सीमा पर तैनात बल के जवानों और कमांडो के साहस की सराहना भी की थी।
आईटीबीपी डीजी के बयान के बाद भारत-चीन संबंधों और सीमा की स्थिति को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई। विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर सरकार से सवाल उठाए हैं। वहीं, विदेश मंत्रालय ने अपने जवाब में सीमा प्रबंधन, बातचीत और शांति बनाए रखने पर जोर दिया है। मंत्रालय के अनुसार, दोनों देशों के बीच लंबित मुद्दों को सुलझाने के लिए स्थापित व्यवस्थाओं के माध्यम से संपर्क जारी है। सीमा पर वास्तविक स्थिति और घटनाओं से जुड़े दावों को समझने के लिए आधिकारिक बयानों और पुष्ट जानकारी पर ध्यान देना जरूरी है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने ईरान को जीवनरक्षक दवाओं की आपूर्ति से जुड़े सवाल पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि भारत इस दिशा में लगातार मदद कर रहा है। क्षेत्र में जारी संघर्ष के कारण दोनों देशों के बीच विमान सेवाओं और उड़ानों की कनेक्टिविटी को लेकर कई चुनौतियां पैदा हुई हैं। इसके बावजूद भारत मानवीय आधार पर जरूरी दवाओं की आपूर्ति को सुगम बनाने के लिए प्रयास कर रहा है।
रणधीर जायसवाल ने बताया कि भारत जीवनरक्षक दवाओं की आपूर्ति में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए ईरान के संबंधित अधिकारियों के संपर्क में है। क्षेत्रीय संघर्ष के कारण हवाई मार्गों और उड़ानों से जुड़ी परिस्थितियां जटिल हुई हैं, जिससे आवश्यक सामान पहुंचाने में कठिनाई हो सकती है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, भारत का प्रयास है कि मानवीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए दवाओं की आपूर्ति जारी रखी जा सके। फिलहाल, सीमा प्रबंधन और ईरान को चिकित्सा सहायता दोनों मामलों में भारत की ओर से कूटनीतिक संपर्क बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है।
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