Delhi Health Alert: बारिश का मौसम आते ही कई तरह की संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। खासतौर पर डेंगू, चिकनगुनिया और स्वाइन फ्लू जैसे वायरल संक्रमण मानसून के दौरान तेजी से फैलने लगते हैं। बारिश के बाद जगह-जगह जमा पानी मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल माहौल तैयार करता है, जिससे डेंगू के मामलों में बढ़ोतरी देखी जाती है। वहीं, भीड़भाड़ वाले स्थानों और संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से स्वाइन फ्लू का संक्रमण तेजी से फैल सकता है।
हाल ही में सामने आए आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली में डेंगू के मामलों में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। दिल्ली में अब तक डेंगू के 1179 मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें 210 मरीज दिल्ली से बाहर के हैं। राजधानी के अस्पतालों में कुल 1389 डेंगू मरीजों का इलाज किया जा रहा है। इसके अलावा स्वाइन फ्लू के भी 1344 मामले दर्ज किए गए हैं। राहत की बात यह है कि अभी तक दोनों संक्रमणों से किसी मौत की पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि, बढ़ते मामलों को देखते हुए लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है।
डेंगू और स्वाइन फ्लू के संक्रमण का तरीका अलग-अलग
मैक्योर हॉस्पिटल के कंसल्टेंट मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. प्रतीक कादियान के अनुसार, डेंगू और स्वाइन फ्लू दोनों वायरल बीमारियां हैं, लेकिन इनके फैलने का तरीका अलग होता है। डेंगू एडीज प्रजाति के संक्रमित मच्छर के काटने से फैलता है। बारिश के बाद जमा पानी, नमी और आसपास गंदगी होने से मच्छरों की संख्या बढ़ जाती है, जिससे संक्रमण का खतरा अधिक हो जाता है।वहीं, स्वाइन फ्लू यानी H1N1 वायरस संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या उसके बेहद करीब रहने से फैल सकता है। बंद जगहों, भीड़भाड़ वाले इलाकों और संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने पर इसके फैलने की संभावना बढ़ जाती है।
डेंगू के शुरुआती और गंभीर लक्षणों को पहचानना जरूरी
डेंगू होने पर मरीज को तेज बुखार, सिर दर्द, आंखों के पीछे दर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, उल्टी तथा त्वचा पर लाल चकत्ते जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। कई बार बुखार ठीक होने के बाद भी शरीर में कुछ गंभीर संकेत नजर आ सकते हैं।पेट में तेज दर्द, लगातार उल्टी होना, नाक या मसूड़ों से खून आना, अत्यधिक कमजोरी, बेचैनी और सांस लेने में परेशानी गंभीर डेंगू के संकेत हो सकते हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।डेंगू के दौरान बिना डॉक्टर की सलाह के एस्पिरिन, आइबुप्रोफेन या अन्य दर्द कम करने वाली दवाएं नहीं लेनी चाहिए, क्योंकि इससे शरीर में रक्तस्राव का खतरा बढ़ सकता है। डॉक्टर की सलाह के अनुसार पैरासिटामोल और पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लेना सुरक्षित माना जाता है।
स्वाइन फ्लू में नजर आते हैं ये प्रमुख लक्षण
स्वाइन फ्लू के मरीजों में बुखार, खांसी, गले में खराश, नाक बहना, सिर दर्द, शरीर में दर्द और कमजोरी जैसे लक्षण आमतौर पर देखे जाते हैं। कई मामलों में मरीज को सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द, ऑक्सीजन का स्तर कम होना और अत्यधिक थकान जैसी गंभीर समस्याएं भी हो सकती हैं।बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं, छोटे बच्चे और ऐसे लोग जिन्हें पहले से अस्थमा, मधुमेह, हृदय या फेफड़ों से जुड़ी बीमारी है, उन्हें विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों में संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है।
मानसून में बीमारी से बचने के लिए अपनाएं ये उपाय
डेंगू से बचाव के लिए सबसे जरूरी है कि घर और आसपास पानी जमा न होने दिया जाए। पानी की टंकी, कूलर, गमले और अन्य बर्तनों को नियमित रूप से साफ करते रहें और उन्हें ढककर रखें। मच्छरों से बचने के लिए पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें और मच्छररोधी उपायों का इस्तेमाल करें।स्वाइन फ्लू से बचने के लिए साफ-सफाई का ध्यान रखना जरूरी है। फ्लू जैसे लक्षण होने पर मास्क पहनें, हाथों को बार-बार साफ करें और भीड़भाड़ वाले स्थानों से दूरी बनाए रखें।
सतर्कता और समय पर इलाज से कम होगा खतरा
मानसून के दौरान संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है, लेकिन सावधानी और सही जानकारी से इन बीमारियों से बचाव किया जा सकता है। लक्षणों को नजरअंदाज न करें और गंभीर संकेत दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग भी लोगों को जागरूक करने के लिए लगातार अभियान चला रहे हैं।
Read More : NEET Paper Leak: NTA के 3 विशेषज्ञों पर CBI का बड़ा खुलासा, ऐप बना मास्टर सबूत