India China: चीन का यह कहना कि वह भारत का प्रतिद्वंद्वी नहीं बल्कि एक साझेदार है, एआईएमआईएम प्रमुख और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी को बिल्कुल रास नहीं आया है। हाल ही में चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने दिल्ली में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के साथ मुलाकात के दौरान अपने देश का यह नजरिया सामने रखा था। चीन के इस बयान के बाद असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए उनसे इस मुद्दे पर कड़े जवाब मांगे हैं। ओवैसी ने सरकार की चीन के प्रति अपनाई जा रही रणनीतियों को लेकर गंभीर चिंताएं जाहिर की हैं।

सीमा विवाद को अलग रखने की चीनी मंशा
ओवैसी ने सोशल मीडिया पर अपनी बात रखते हुए इस बात पर जोर दिया कि असली मुद्दा यह नहीं है कि चीन क्या कह रहा है, बल्कि यह है कि बीजिंग की असल मंशा क्या है। उनका मानना है कि चीन चाहता है कि भारत सीमा से जुड़े अपने विवादों को अलग रखकर द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाए, जबकि इसके बदले में चीन कुछ भी देने को तैयार नहीं है। उन्होंने पाकिस्तान को दिए जा रहे सैन्य सहयोग और ब्रह्मपुत्र नदी का हाइड्रोलॉजिकल डेटा भारत के साथ साझा करने से इनकार करने जैसे मुद्दों को उठाकर चीन के दोहरे रवैये की पोल खोली है।

मोदी सरकार की ‘नरम’ नीतियों पर उठाए गंभीर सवाल
सांसद ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि भारत चीन को रियायतें देने की राह पर चल रहा है। उन्होंने कहा, ‘हम ही चीन को रियायतें देते जा रहे हैं, जिसमें सीमा विवाद पर शुरुआती समझौते यानी ‘अर्ली हार्वेस्ट’ पर विचार करना भी शामिल है।’ ओवैसी ने मोदी सरकार से पूछा है कि आखिर भारत इतनी नरमी क्यों दिखा रहा है और इस दिशा में सरकार की क्या मजबूरी है? उनका कहना है कि इस संबंध में सरकार की ओर से कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि चीन के साथ अच्छे और शांतिपूर्ण संबंध जरूरी हैं, लेकिन यह केवल चीन की शर्तों पर नहीं हो सकते।
हितों का सम्मान और राजनयिक बैठकों का संदर्भ
चीन के विदेश मंत्री वांग यी ब्रिक्स (BRICS) देशों के एनएसए की बैठक में शामिल होने के लिए भारत आए थे, इसी दौरान यह बैठक हुई थी। चीन की सरकारी न्यूज एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, बैठक में वांग यी ने कहा था कि भारत और चीन के लिए जरूरी है कि वे एक-दूसरे के हितों का सम्मान करें। गौरतलब है कि जून 2020 में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में दोनों देशों के सैनिकों के बीच हुए हिंसक संघर्ष के बाद पिछले कई वर्षों तक आपसी टकराव की स्थिति बनी रही थी। हालांकि, 2024 से दोनों देशों के बीच रिश्ते धीरे-धीरे सामान्य होने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
भारत के हितों को सर्वोपरि रखना होगा
अंत में असदुद्दीन ओवैसी ने अपनी बात दोहराते हुए कहा कि हर भारतीय नागरिक चीन के साथ सामान्य और शांतिपूर्ण संबंध चाहता है, लेकिन यह भारत के हितों को नजरअंदाज करके नहीं हो सकता। उन्होंने चेतावनी दी कि चीन के साथ हालात सामान्य करने के नाम पर भारत को अपनी शर्तों और हितों के साथ समझौता नहीं करना चाहिए। ओवैसी के अनुसार, हमारी वर्षों पुरानी विदेश नीति को बदलना देश के लिए विनाशकारी साबित हो सकता है। भारत को चीन के साथ संबंधों में अपनी शर्तों को सर्वोपरि रखना होगा।
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