अंतरराष्ट्रीय

Xi Jinping Letter India: शी जिनपिंग की चिट्ठी से बदले भारत-चीन संबंध, अमेरिका पर टिकी दुनिया की नजर

Xi Jinping Letter India: बीजिंग और नई दिल्ली के बीच रिश्तों में हालिया गर्मजोशी की शुरुआत एक चौंकाने वाली चिट्ठी से हुई थी। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक गोपनीय पत्र लिखकर अमेरिका-भारत के बीच बन रहे सौदों से चीन के संभावित नुकसान पर चिंता जताई थी। यह चिट्ठी न सिर्फ भारत-चीन संबंधों में एक अहम मोड़ बनी, बल्कि इसके जरिए बीजिंग ने द्विपक्षीय संबंधों में सुधार की संभावनाएं भी टटोलीं।

मार्च 2025 में भेजी गई इस चिट्ठी में शी ने स्पष्ट किया कि चीन नहीं चाहता कि भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी, खासकर व्यापार और सुरक्षा क्षेत्र में, उसके हितों को चोट पहुंचाए। यह पत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक भी पहुंचाया गया ताकि वे इस पहल का आकलन कर सकें। चीन ने यह भी संकेत दिया कि इस प्रयास का नेतृत्व एक प्रांतीय अधिकारी करेगा, जिससे यह साफ हुआ कि बीजिंग इस प्रक्रिया को गंभीरता से ले रहा है।

अमेरिका से नाराजगी और चीन की ओर झुकाव

भारत की अमेरिका से नाराजगी की दो बड़ी वजहें रहीं — पहला, राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा भारत-पाकिस्तान के बीच सीजफायर में भूमिका का दावा, जिसे भारत ने नकार दिया। दूसरा, भारत पर लगाए गए 50% टैरिफ ने द्विपक्षीय व्यापार संबंधों में तनाव और बढ़ा दिया। इसके बाद भारत ने चीन की ओर से आई पहल को गंभीरता से लेना शुरू किया।

मोदी की 7 साल बाद चीन यात्रा

अब, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गेनाइजेशन (SCO) समिट के लिए चीन जा रहे हैं। यह यात्रा सात साल बाद हो रही है और इसे रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है। इस दौरान मोदी की मुलाकात शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से होगी। अमेरिका इस मुलाकात पर नजर बनाए हुए है क्योंकि यह उसकी एशिया-पैसिफिक नीति पर असर डाल सकती है।

‘ड्रैगन-एलिफेंट टैंगो’: नई शुरुआत की उम्मीद

मार्च 2025 में शी जिनपिंग के पत्र के बाद चीन ने भारत के साथ संबंधों को ‘ड्रैगन-एलिफेंट टैंगो’ की संज्ञा दी — एक ऐसा रूपक जिसमें दोनों देश मिलकर तालमेल से आगे बढ़ते हैं। चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग समेत कई शीर्ष नेताओं ने इस शब्दावली को दोहराया, जो द्विपक्षीय संवाद की नयी भाषा बनती दिखी।

आर्थिक और सामरिक मजबूरी

भारत की डगमगाती अर्थव्यवस्था और 3,488 किलोमीटर लंबी सीमा पर भारी सैन्य खर्च ने भी मोदी सरकार को चीन से संबंध सुधारने की दिशा में सोचने पर मजबूर किया। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल इस पहल के अहम सूत्रधार बने और हाल के महीनों में चीन की कई यात्राएं कर चुके हैं।

भारत और चीन के रिश्तों में आया यह नया मोड़ क्षेत्रीय राजनीति के साथ-साथ वैश्विक शक्ति संतुलन को भी प्रभावित कर सकता है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि ‘ड्रैगन-एलिफेंट टैंगो’ वाकई एक संतुलित साझेदारी में बदलता है या यह सिर्फ कूटनीतिक शब्दों तक सीमित रह जाएगा।

Read More  : Akhilesh on Modi trip : PM मोदी के चीन-जापान दौरे पर विपक्ष की नजर, अखिलेश यादव ने दी चेतावनी

Thetarget365

Recent Posts

BJP Comeback 2024-2026: लोकसभा की टीस से बंगाल फतह तक, भाजपा का अद्भुत विजय रथ

BJP Comeback 2024-2026:  भारतीय राजनीति के इतिहास में 4 जून 2024 का दिन भाजपा के…

5 minutes ago

Shyama Prasad Mukherjee Legacy : 75 साल का लंबा इंतज़ार खत्म, क्या श्यामा प्रसाद का बंगाल अब बनेगा भगवा?

Shyama Prasad Mukherjee Legacy :  पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने भारतीय जनता…

33 minutes ago

RG Kar Victim Mother Win : आरजी कर पीड़िता की मां रत्ना देबनाथ की महाविजय, पनिहाटी में ढहाया टीएमसी का दुर्ग

RG Kar Victim Mother Win : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के परिणामों ने राज्य…

46 minutes ago

Amit Shah Bengal Strategy 2026 : अमित शाह के ‘तीन मोहरों’ ने ढाया ममता का किला, बंगाल में बीजेपी की महाविजय

Amit Shah Bengal Strategy 2026 :  पश्चिम बंगाल की राजनीति में साल 2026 एक ऐसे…

59 minutes ago

PM Modi Speech 2026 : गंगोत्री से गंगासागर तक खिला कमल, बंगाल विजय पर पीएम मोदी का ऐतिहासिक संबोधन

PM Modi Speech 2026 : पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता…

1 hour ago

This website uses cookies.