Drone Attack Alert India : केंद्र सरकार ने देश की सीमाओं पर स्थित बेहद महत्वपूर्ण और रणनीतिक ठिकानों पर संभावित दुश्मन ड्रोन हमलों को लेकर एक गंभीर चेतावनी जारी की है। ‘द हिंदू’ में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय के समुद्री सुरक्षा विंग ने जमीन और समुद्री सीमाओं के नजदीक मौजूद देश की महत्वपूर्ण संपत्तियों, बंदरगाहों और ठिकानों की सुरक्षा को लेकर एक हाई-अलर्ट जारी किया है।

सरकार का मानना है कि वर्तमान में चल रहे वैश्विक हालातों और तकनीकी बदलावों को देखते हुए सीमाओं पर तैनात सुरक्षा बुनियादी ढांचे को और अधिक मजबूत करने की सख्त जरूरत है। मंत्रालय की ओर से जारी इस आधिकारिक पत्र में साफ तौर पर कहा गया है कि वैश्विक स्तर पर युद्ध के बदलते तौर-तरीकों को ध्यान में रखते हुए यह बिल्कुल स्पष्ट है कि दुश्मन के आधुनिक ड्रोन हमारे जरूरी ठिकानों के कामकाज को पूरी तरह ठप करने की क्षमता रखते हैं।

सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एंटी-ड्रोन सिस्टम लगाने पर जोर
संभावित खतरों से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने तुरंत और ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। मंत्रालय के निर्देशानुसार, खासकर सीमावर्ती क्षेत्रों के पास बने भारतीय ठिकानों को खतरनाक और संदेहास्पद ड्रोनों से सुरक्षित रखने के लिए अत्याधुनिक एंटी-ड्रोन सिस्टम लगाए जाने की प्रक्रिया को तेज कर दिया गया है। गृह मंत्रालय ने इस दिशा में त्वरित कार्रवाई करते हुए सीमा सुरक्षा बल (BSF) के अंतर्गत एक विशेष उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया है।
इस तकनीकी कमेटी का मुख्य कार्य भारत की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुकूल सबसे बेहतरीन और अचूक एंटी-ड्रोन तकनीकों की जांच करना, उनका मूल्यांकन करना और उन्हें अंतिम मंजूरी देना है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, बीएसएफ अब पाकिस्तान सीमा से सटे पंजाब के संवेदनशील मैदानी इलाकों में इन प्रणालियों को तैनात करने की योजना बना रही है, जिसके लिए विभिन्न चरणों के ट्रायल और परीक्षण भी शुरू किए जा चुके हैं।
CISF और रक्षा विशेषज्ञों की संयुक्त टीम कर रही है ठिकानों का दौरा
सीमाओं के अलावा देश के आंतरिक और औद्योगिक ठिकानों को सुरक्षित करने के लिए केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) ने भी एक संयुक्त विशेषज्ञ टीम का गठन किया है। इस विशेष टीम में रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO), इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB), भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) और बीएसएफ के शीर्ष तकनीकी अधिकारी और सुरक्षा विशेषज्ञ शामिल हैं।
यह संयुक्त टीम वर्तमान में देश भर के अत्यधिक संवेदनशील और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों का हवाई सुरक्षा के नजरिए से विस्तृत दौरा कर रही है। इस विशेषज्ञ दल द्वारा तैयार की जाने वाली जमीनी रिपोर्ट और गृह मंत्रालय की अंतिम प्रशासनिक मंजूरी के बाद ही यह पूरी तरह से तय किया जाएगा कि देश के किस विशिष्ट ठिकाने की संवेदनशीलता को देखते हुए वहां कौन सा एंटी-ड्रोन सिस्टम स्थापित किया जाएगा।
तमिलनाडु का वी.ओ. चिदंबरनार पोर्ट बना देश का पहला सुरक्षित बंदरगाह
ड्रोन रोधी सुरक्षा उपायों को लागू करने के मामले में तमिलनाडु के थूथुकुडी में स्थित वी.ओ. चिदंबरनार पोर्ट ने देश में एक बड़ी मिसाल कायम की है। बंदरगाह की त्रिस्तरीय सुरक्षा को अभेद्य बनाने के उद्देश्य से फरवरी 2026 में यहां एक बेहद उन्नत और सर्वसुविधायुक्त एंटी-ड्रोन सिस्टम स्थापित किया गया है। इस तरह की आधुनिक हवाई सुरक्षा प्रणाली को व्यावहारिक रूप से अपनाने वाला यह पूरे भारत का पहला बंदरगाह बन गया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए बंदरगाह प्रशासन ने भारत सरकार की प्रतिष्ठित सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी ‘सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड’ के साथ एक विशेष तकनीकी समझौता किया है, जिसके तहत यहां सुरक्षा घेरा तैयार किया जा रहा है।
360 डिग्री रडार और विजन 2047 के तहत हवाई सुरक्षा होगी अभेद्य
थूथुकुडी बंदरगाह पर स्थापित किए जा रहे इस विशेष प्रोजेक्ट के अंतर्गत रेडियो फ्रीक्वेंसी और रडार तकनीक पर आधारित एक अत्यंत संवेदनशील और एकीकृत ढांचा तैयार किया जा रहा है। यह आधुनिक सिस्टम न केवल दूर से आ रहे दुश्मन के किसी भी संदिग्ध ड्रोन की सटीक पहचान करने में सक्षम है, बल्कि उसकी फ्रीक्वेंसी को तुरंत जाम करके उसे निष्क्रिय भी कर सकता है।
इस प्रणाली को बंदरगाह के तटीय माहौल और मौसमी चुनौतियों के हिसाब से विशेष रूप से डिजाइन किया गया है, जो चारों तरफ यानी पूरे 360 डिग्री के दायरे पर पैनी नजर रखने की क्षमता रखता है। सरकार का यह महत्वपूर्ण कदम देश की हवाई संप्रभुता और सुरक्षा को हर स्तर पर मजबूत करने के लिए तैयार किए गए ‘अमृत काल विजन 2047’ और ‘मैरीटाइम इंडिया विजन 2030’ के राष्ट्रीय लक्ष्यों के अनुरूप उठाया गया है। केंद्र की इस ताजा चेतावनी के बाद सभी राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं।
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