India EU FTA
India EU FTA: फ्रांस के साथ 114 राफेल लड़ाकू विमानों के निर्माण सौदे को मंजूरी मिलने के बाद, भारत अब यूरोपीय संघ (EU) के साथ एक ऐतिहासिक ‘सिक्योरिटी एंड डिफेंस पार्टनरशिप एग्रीमेंट’ पर हस्ताक्षर करने की तैयारी में है। यह समझौता वैश्विक राजनीति के बदलते समीकरणों के बीच अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यूरोपीय संघ की विदेश और सुरक्षा मामलों की उच्च प्रतिनिधि, काजा कैलस ने यूरोपीय संसद में इस बात की पुष्टि की है कि भारत इस रणनीतिक करार के लिए पूरी तरह तैयार है। एस्टोनिया की पूर्व प्रधानमंत्री कैलस, जो वर्तमान में यूरोपीय कमीशन की उपाध्यक्ष भी हैं, इस समझौते को अंतिम रूप देने के लिए जल्द ही नई दिल्ली का दौरा करेंगी।
वर्ष 2026 का गणतंत्र दिवस भारत और यूरोपीय संघ के संबंधों के लिए एक मील का पत्थर साबित होने जा रहा है। इस वर्ष कर्तव्य पथ पर आयोजित होने वाली परेड में यूरोपीय संघ के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय कमीशन की अध्यक्ष उर्सला वेन डेर लेयन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। यह पहली बार है जब ईयू का इतना उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल गणतंत्र दिवस समारोह की शोभा बढ़ाएगा। इतना ही नहीं, परेड के दौरान यूरोपीय संघ के नौसैनिकों की एक विशेष टुकड़ी भारतीय सैनिकों के साथ कदमताल करती नजर आएगी, जो दोनों शक्तियों के बीच बढ़ते सैन्य सहयोग का जीवंत प्रमाण होगा।
यह डिफेंस और सिक्योरिटी करार ऐसे समय में हो रहा है जब अमेरिका और यूरोप के बीच तनाव चरम पर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा डेनमार्क के स्वायत्त क्षेत्र ग्रीनलैंड पर कब्जे की मंशा जताए जाने के बाद पूरे यूरोप में बेचैनी का माहौल है। यूक्रेन युद्ध में रूस के प्रति अमेरिका के बदलते रुख और नाटो देशों के भीतर आंतरिक मतभेदों ने यूरोपीय संघ को नए विश्वसनीय सहयोगियों की तलाश के लिए प्रेरित किया है। ऐसे अनिश्चित वैश्विक परिवेश में भारत जैसा स्थिर और मजबूत लोकतांत्रिक देश यूरोपीय संघ के लिए एक अपरिहार्य सुरक्षा भागीदार बनकर उभरा है।
भारत और यूरोपीय संघ के बीच होने वाला यह समझौता मुख्य रूप से तीन प्रमुख क्षेत्रों—मेरीटाइम सिक्योरिटी (समुद्री सुरक्षा), साइबर डिफेंस और काउंटर-टेररिज्म (आतंकवाद विरोध)—पर केंद्रित होगा। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती चुनौतियों को देखते हुए दोनों पक्ष समुद्री सूचनाओं के आदान-प्रदान और संयुक्त नौसैनिक अभ्यास को बढ़ावा देंगे। इसके साथ ही, बढ़ते डिजिटल खतरों से निपटने के लिए साइबर सुरक्षा और वैश्विक आतंकवाद के विरुद्ध साझा खुफिया तंत्र विकसित करने पर भी सहमति बनने की उम्मीद है। हालांकि भारत ने अभी इस पर आधिकारिक तौर पर विस्तृत जानकारी साझा नहीं की है, लेकिन रक्षा मंत्रालय की सक्रियता बड़े बदलावों का संकेत दे रही है।
भारत हाल के दिनों में फ्रांस और जर्मनी जैसे यूरोपीय देशों के साथ रक्षा संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले गया है। पिछले सप्ताह ही भारत ने 114 राफेल लड़ाकू विमानों के लिए दासो एविएशन (Dassault Aviation) के साथ ‘मेक इन इंडिया’ के तहत निर्माण सौदे को हरी झंडी दी है। वहीं, जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की हालिया भारत यात्रा के दौरान भारतीय नौसेना के लिए उन्नत पनडुब्बियों के साझा निर्माण पर भी गहन चर्चा हुई थी। ये सभी घटनाक्रम दर्शाते हैं कि भारत अपनी रक्षा जरूरतों के लिए अब रूस और अमेरिका के साथ-साथ यूरोप को एक प्रमुख रणनीतिक स्तंभ के रूप में देख रहा है।
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