Naxalism In India: भारत में नक्सलवाद पर बड़ी कामयाबी! ‘सबसे ज्यादा प्रभावित’ जिलों की संख्या घटकर सिर्फ 3 हुई

Naxalism In India:  केंद्र सरकार ने देश में वामपंथी उग्रवाद (LWE) के खिलाफ जारी लड़ाई में एक ऐतिहासिक सफलता की घोषणा की है। सरकार के अनुसार, देश भर में LWE से ‘सबसे अधिक प्रभावित’ जिलों की संख्या अब घटकर केवल तीन रह गई है। यह संख्या पहले छह थी, जो अब आधी हो चुकी है। इसके साथ ही, LWE-प्रभावित जिलों की कुल संख्या भी 18 से घटकर 11 हो गई है। इसे ‘नक्सल-मुक्त भारत’ के लक्ष्य की दिशा में एक बड़ी और निर्णायक उपलब्धि माना जा रहा है। ‘सबसे अधिक प्रभावित’ सिर्फ 3 जिले वर्तमान में ‘सबसे अधिक प्रभावित’ बचे तीनों जिले छत्तीसगढ़ राज्य से हैं: बीजापुर सुकमा नारायणपुर वर्तमान में LWE-प्रभावित 11 जिलों की सूची में छत्तीसगढ़ के सात जिले (बीजापुर, दंतेवाड़ा, गरियाबंद, कांकेर, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, नारायणपुर, और सुकमा) शामिल हैं। इनके अलावा, झारखंड का पश्चिम सिंहभूम, मध्य प्रदेश का बालाघाट, महाराष्ट्र का गढ़चिरौली और ओडिशा का कंधमाल भी इस सूची में हैं। मोदी सरकार की ‘अभूतपूर्व सफलता’ सरकार का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, माओवादी खतरे से निपटने में ‘अभूतपूर्व सफलता’ हासिल हुई है। यह सफलता सुरक्षा अभियानों, विकास और कल्याणकारी उपायों के समन्वित संयोजन से मिली है। ऑपरेशन और आत्मसमर्पण के आंकड़े: माओवादी मारे गए: इस वर्ष अकेले 312 माओवादी कैडरों को मार गिराया गया है। इनमें सीपीआई (माओवादी) के महासचिव और आठ अन्य वरिष्ठ नेता भी शामिल थे। गिरफ्तार: 836 कैडरों को गिरफ्तार किया गया। आत्मसमर्पण: 1,639 ने आत्मसमर्पण किया है। आत्मसमर्पण करने वालों में एक पोलित ब्यूरो सदस्य और एक केंद्रीय समिति सदस्य भी शामिल हैं। अधिकारियों ने इस सफलता का श्रेय राष्ट्रीय कार्य योजना और नीति के कठोर कार्यान्वयन को दिया है, जो खुफिया जानकारी पर आधारित और लोगों के अनुकूल जवाबी-आतंकवादी अभियानों पर जोर देती है। लगातार घटता गया माओवाद का प्रभाव एक समय था जब तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 2010 में माओवाद को भारत की ‘सबसे बड़ी आंतरिक सुरक्षा चुनौती’ बताया था।2013: कई राज्यों के 126 जिलों में माओवादी-संबंधी हिंसा की सूचना थी. मार्च 2025: यह संख्या घटकर सिर्फ 18 रह गई थी, जिनमें से ‘सबसे अधिक प्रभावित’ जिले 6 थे।मोदी सरकार ने देश से वामपंथी उग्रवाद को पूरी तरह से समाप्त करने के लिए 31 मार्च, 2026 की लक्ष्य तिथि निर्धारित की है। ताजा आंकड़े बताते हैं कि देश इस लक्ष्य की ओर तीव्र गति से बढ़ रहा है। Read More : Sukma Naxal Surrender: नक्सलवाद पर ‘निर्णायक प्रहार’, सीएम साय ने बताया ‘नए युग की शुरुआत’

Naxalism In India:  केंद्र सरकार ने देश में वामपंथी उग्रवाद (LWE) के खिलाफ जारी लड़ाई में एक ऐतिहासिक सफलता की घोषणा की है। सरकार के अनुसार, देश भर में LWE से ‘सबसे अधिक प्रभावित’ जिलों की संख्या अब घटकर केवल तीन रह गई है। यह संख्या पहले छह थी, जो अब आधी हो चुकी है। इसके साथ ही, LWE-प्रभावित जिलों की कुल संख्या भी 18 से घटकर 11 हो गई है। इसे ‘नक्सल-मुक्त भारत’ के लक्ष्य की दिशा में एक बड़ी और निर्णायक उपलब्धि माना जा रहा है।

ads

‘सबसे अधिक प्रभावित’ सिर्फ 3 जिले

वर्तमान में ‘सबसे अधिक प्रभावित’ बचे तीनों जिले छत्तीसगढ़ राज्य से हैं:

Adst
  1. बीजापुर
  2. सुकमा
  3. नारायणपुर

वर्तमान में LWE-प्रभावित 11 जिलों की सूची में छत्तीसगढ़ के सात जिले (बीजापुर, दंतेवाड़ा, गरियाबंद, कांकेर, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, नारायणपुर, और सुकमा) शामिल हैं। इनके अलावा, झारखंड का पश्चिम सिंहभूम, मध्य प्रदेश का बालाघाट, महाराष्ट्र का गढ़चिरौली और ओडिशा का कंधमाल भी इस सूची में हैं।

मोदी सरकार की ‘अभूतपूर्व सफलता’

सरकार का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, माओवादी खतरे से निपटने में ‘अभूतपूर्व सफलता’ हासिल हुई है। यह सफलता सुरक्षा अभियानों, विकास और कल्याणकारी उपायों के समन्वित संयोजन से मिली है।

ऑपरेशन और आत्मसमर्पण के आंकड़े:

  • माओवादी मारे गए: इस वर्ष अकेले 312 माओवादी कैडरों को मार गिराया गया है। इनमें सीपीआई (माओवादी) के महासचिव और आठ अन्य वरिष्ठ नेता भी शामिल थे।
  • गिरफ्तार: 836 कैडरों को गिरफ्तार किया गया।
  • आत्मसमर्पण: 1,639 ने आत्मसमर्पण किया है। आत्मसमर्पण करने वालों में एक पोलित ब्यूरो सदस्य और एक केंद्रीय समिति सदस्य भी शामिल हैं।

अधिकारियों ने इस सफलता का श्रेय राष्ट्रीय कार्य योजना और नीति के कठोर कार्यान्वयन को दिया है, जो खुफिया जानकारी पर आधारित और लोगों के अनुकूल जवाबी-आतंकवादी अभियानों पर जोर देती है।

Adst

लगातार घटता गया माओवाद का प्रभाव

एक समय था जब तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 2010 में माओवाद को भारत की ‘सबसे बड़ी आंतरिक सुरक्षा चुनौती’ बताया था।2013: कई राज्यों के 126 जिलों में माओवादी-संबंधी हिंसा की सूचना थी. मार्च 2025: यह संख्या घटकर सिर्फ 18 रह गई थी, जिनमें से ‘सबसे अधिक प्रभावित’ जिले 6 थे।मोदी सरकार ने देश से वामपंथी उग्रवाद को पूरी तरह से समाप्त करने के लिए 31 मार्च, 2026 की लक्ष्य तिथि निर्धारित की है। ताजा आंकड़े बताते हैं कि देश इस लक्ष्य की ओर तीव्र गति से बढ़ रहा है।

Read More : Sukma Naxal Surrender: नक्सलवाद पर ‘निर्णायक प्रहार’, सीएम साय ने बताया ‘नए युग की शुरुआत’

Admin

Admin

Writer & Blogger

All Posts
पिछले पोस्ट
अगला पोस्ट

ताज़ा खबरे

  • All Posts
  • FIFA World Cup 2026
  • Thetarget365
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अन्य
  • अपराध
  • कारोबार
  • कृषि
  • खेल
  • छत्तीसगढ़
  • टेक
  • ट्रेंड
  • ताज़ा खबर
  • धर्म
  • पशु-पक्षी
  • मनोरंजन
  • मौसम
  • राजनीति
  • राष्ट्रीय
  • विचार/लेख
  • शिक्षा और नौकरी
  • साहित्य/मीडिया
  • सेहत-फिटनेस
    •   Back
    • मध्य प्रदेश
    • पश्चिम बंगाल
    • उत्तर प्रदेश
    • बिहार
    • महाराष्ट्र
    • झारखंड
    • राजस्थान
    • ओडिशा

© 2026 | All Rights Reserved | Thetarget365.com | Made By Top News Portal Development Company. 

Contacts

Call Us At – +91-:9406130006
WhatsApp – +91 62665 68872
Mail Us At – thetargetweb@gmail.com
Meet Us At – Shitla Ward, Ambikapur Dist. Surguja Chhattisgarh.497001.

Adst