World Food Day: हर साल 16 अक्टूबर को वर्ल्ड फूड डे (World Food Day) मनाया जाता है। यह दिन संयुक्त राष्ट्र की संस्था खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) द्वारा शुरू किया गया था। यह दिवस हमें याद दिलाता है कि एक ऐसे देश में, जो तेजी से विकास कर रहा है, आज भी लाखों लोग रात को भरपेट खाना खाए बिना सोने को मजबूर हैं। यह दिन खाद्य सुरक्षा, कुपोषण और भोजन की बर्बादी जैसे गंभीर वैश्विक मुद्दों की ओर ध्यान आकर्षित करने का महत्वपूर्ण अवसर है। भारत जैसे विशाल और विविध देश में जहां समृद्धि बढ़ रही है, वहीं भूख का यह भयावह आंकड़ा एक गंभीर चिंता का विषय है। भारत में भूख का भयावह आंकड़ा आंकड़े बताते हैं कि भारत में आज भी हर रोज 19 करोड़ से ज्यादा भारतीय भूखे पेट सोते हैं। यह संख्या दुनिया के कई छोटे-बड़े देशों की कुल आबादी से भी अधिक है। यह आंकड़ा तब और भी ज्यादा चौंकाने वाला हो जाता है जब हम देखते हैं कि जनसंख्या में लगभग बराबर होने के बावजूद, दुनिया में सबसे ज्यादा भूखे लोग भारत में रहते हैं—जो चीन से भी अधिक है। ग्लोबल हंगर इंडेक्स में स्थिति गंभीर भूख की समस्या की गंभीरता को ग्लोबल हंगर इंडेक्स (GHI) के आंकड़े दर्शाते हैं। ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2021 में भारत की रैंक 116 देशों में 101वीं थी। यह दिखाता है कि भारत उन देशों में शामिल है जहाँ भूख की समस्या को ‘बहुत गंभीर’ माना जाता है। भोजन की बर्बादी: एक बड़ा विरोधाभास एक तरफ जहाँ करोड़ों लोग भूखे हैं, वहीं दूसरी तरफ बड़े पैमाने पर भोजन की बर्बादी एक गंभीर विरोधाभास पैदा करती है।भारत में हर साल करीब 40 प्रतिशत खाना बर्बाद हो जाता है।यह बर्बादी आर्थिक रूप से लगभग 92,000 करोड़ रुपये के भोजन के नुकसान के बराबर है। वैश्विक बर्बादी: संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, दुनिया भर में हर साल करीब 250 करोड़ टन खाना बर्बाद होता है। महामारी से पहले के आंकड़ों के मुताबिक, 93 करोड़ टन खाना खराब हुआ था, जिसमें से 63% घरों से, 23% रेस्टोरेंट से और 13% खुदरा दुकानों (Retail Shops) से बर्बाद हुआ था। भूख मिटाने के सरकारी प्रयास इस गंभीर चुनौती से निपटने के लिए भारत सरकार कई योजनाओं के माध्यम से प्रयास कर रही है।राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) 2013 के तहत लाखों लोगों को सब्सिडी पर अनाज उपलब्ध कराया जाता है।सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS), मिड डे मील योजना, और आंगनवाड़ी कार्यक्रम जैसी योजनाएं कुपोषण और भूख को कम करने में लगी हुई हैं। वर्ल्ड फूड डे पर यह आवश्यक है कि नागरिक और सरकारें दोनों मिलकर भोजन की बर्बादी को रोकें और यह सुनिश्चित करें कि कोई भी भारतीय भूखा न सोए। Read More : Naxalism In India: भारत में नक्सलवाद पर बड़ी कामयाबी! ‘सबसे ज्यादा प्रभावित’ जिलों की संख्या घटकर सिर्फ 3 हुई














