India GDP Forecast: दुनियाभर में भू-राजनीतिक उथल-पुथल और आर्थिक अनिश्चितता के माहौल के बावजूद, भारतीय अर्थव्यवस्था अपनी रफ्तार बनाए हुए है। अंतरराष्ट्रीय आर्थिक एजेंसियों और रेटिंग फर्मों की भविष्यवाणियां बताती हैं कि भारत अगले कुछ वर्षों तक दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा। आइए, जानते हैं अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से लेकर डेलॉयट इंडिया और वर्ल्ड बैंक तक, भारत की आर्थिक सेहत पर क्या कह रहे हैं:
प्रोफेशनल सेवा कंपनी डेलॉयट इंडिया ने भारत के आर्थिक भविष्य पर मजबूत भरोसा जताया है। 23 अक्टूबर को जारी अपनी रिपोर्ट में, डेलॉयट ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भारत की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि दर 6.7% से 6.9% के बीच रहने का अनुमान लगाया है। यह उसका पिछला अनुमान से 0.3% अधिक है।
घरेलू मांग में उछाल: त्योहारों के दौरान उपभोग व्यय में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना है।
संरचनात्मक सुधार: जीएसटी 2.0 जैसे नीतिगत सुधारों से वृद्धि को बल मिलेगा।
मुद्रास्फीति का नियंत्रण: कम मुद्रास्फीति से क्रय शक्ति में सुधार होगा, जिससे खर्च बढ़ेगा।
डेलॉयट का अनुमान है कि मजबूत निजी निवेश और संभावित अमेरिकी-यूरोपीय संघ व्यापार समझौते से समग्र निवेश धारणा में सुधार होगा।
आईएमएफ: बेहतर प्रदर्शन के चलते 6.6% का संशोधित अनुमान
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भी भारत के प्रदर्शन को देखते हुए अपने अनुमान में सुधार किया है। 15 अक्टूबर को IMF ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान को 6.4% से बढ़ाकर 6.6% कर दिया। यह वृद्धि पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में दर्ज किए गए 7.8% के मजबूत प्रदर्शन के कारण हुई है।
IMF का मानना है कि व्यापक जीएसटी सुधारों और कर दरों में कमी के कारण घरेलू मांग में और तेजी आने की उम्मीद है, जो वैश्विक मांग में संभावित कमी की भरपाई करेगी।
विश्व बैंक (World Bank) ने भी भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती को स्वीकार किया है। 7 अक्टूबर को वर्ल्ड बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भारत की वृद्धि दर का अनुमान 6.3% से बढ़ाकर 6.5% कर दिया है।
वृद्धि के कारण:
मजबूत घरेलू मांग।
ग्रामीण मांग में रिकवरी।
कर सुधारों का सकारात्मक प्रभाव।
वर्ल्ड बैंक ने दोहराया है कि भारत इस साल भी दुनिया की सबसे तेज बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था बना रहेगा।
फिच (Fitch): अमेरिकी रेटिंग एजेंसी फिच ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए अपने पूर्वानुमान को जून के 6.5% से संशोधित कर 6.9% कर दिया है।
आरबीआई (RBI): भारतीय रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी वृद्धि अनुमान को 6.5% से बढ़ाकर 6.8% कर दिया है।
एसएंडपी (S&P): मजबूत घरेलू मांग और जीएसटी सुधारों के कारण जीडीपी ग्रोथ इस वित्त वर्ष में 6.5% पर स्थिर रहने की उम्मीद है।
एशियाई विकास बैंक (ADB) ने 30 सितंबर को चालू वित्त वर्ष के लिए भारत के वृद्धि अनुमान को सात प्रतिशत से घटाकर 6.5% कर दिया।
ADB का कहना है कि भारतीय निर्यात पर अमेरिका के 50% शुल्क लगाए जाने की चिंता है, जिसका नकारात्मक प्रभाव विशेष रूप से वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में देखने को मिल सकता है।
देश की आर्थिक स्थिरता के लिए एक और सकारात्मक संकेत विदेशी मुद्रा भंडार से आया है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के आंकड़ों के अनुसार, 17 अक्टूबर को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 4.5 अरब बढ़कर 702.3 अरब हो गया। गोल्ड रिजर्व 6.2 अरब बढ़कर 108.5 अरब हो गया। यह बढ़ोतरी वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच देश की मजबूत आर्थिक स्थिति को दर्शाती है।
कुल मिलाकर, वैश्विक एजेंसियां भारत की मजबूत घरेलू मांग, सरकारी सुधारों और बढ़ते विदेशी मुद्रा भंडार के दम पर इसकी आर्थिक स्थिति को बेहद मजबूत मान रही हैं, जो इसे अनिश्चित विश्व अर्थव्यवस्था में एक प्रमुख शक्ति के रूप में स्थापित करती है।
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