Australia Survey 2026 : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की वैश्विक छवि में निरंतर मजबूती आई है। एक ओर जहां भारत तेजी से आर्थिक शक्ति के रूप में उभर रहा है, वहीं दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के प्रति विश्वास और भरोसे का ग्राफ भी तेजी से बढ़ा है। इस बढ़ते प्रभाव का एक स्पष्ट उदाहरण हाल ही में ऑस्ट्रेलिया के प्रतिष्ठित थिंक-टैंक ‘लोवी इंस्टीट्यूट’ (Lowy Institute) द्वारा जारी किए गए सर्वे में देखने को मिला है। इस रिपोर्ट ने वैश्विक मंच पर भारत की बदलती साख को रेखांकित किया है, जिसमें भारत को अमेरिका, चीन और रूस जैसे प्रभावशाली देशों की तुलना में कहीं अधिक भरोसेमंद साझेदार के रूप में प्रदर्शित किया गया है।

50 प्रतिशत ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों का भारत पर अटूट विश्वास
लोवी इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 50 फीसदी ऑस्ट्रेलियाई नागरिक भारत पर भरोसा जताते हैं। यह आंकड़ा वैश्विक शक्तियों के प्रति लोगों के दृष्टिकोण में आ रहे बड़े बदलाव को दर्शाता है। सर्वे की तुलना करें तो, ऑस्ट्रेलिया में अमेरिका पर विश्वास करने वालों की संख्या महज 31 प्रतिशत है, जबकि चीन के प्रति भरोसा जताने वाले लोगों का प्रतिशत केवल 28 है। वहीं, रूस के लिए यह विश्वास घटकर मात्र 11 फीसदी रह गया है। ये आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भारत अब एक सुरक्षित और विश्वसनीय साथी के रूप में स्थापित हो चुका है।

वैश्विक मामलों में भारत की जिम्मेदार भूमिका को मिली सराहना
सर्वे में यह भी उभर कर आया है कि बड़ी संख्या में ऑस्ट्रेलियाई नागरिक भारत की वैश्विक नीति को जिम्मेदारीपूर्ण मानते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, 46 फीसदी ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों का मानना है कि भारत आने वाले समय में विश्व मामलों में एक महत्वपूर्ण और जिम्मेदारी भरा रोल निभाने में सक्षम है। इसके अलावा, सर्वे में शामिल 4 फीसदी लोगों ने भारत के नेतृत्व पर ‘बहुत ज्यादा भरोसा’ जताया है। यह विश्वास न केवल कूटनीतिक जीत है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि वैश्विक मंच पर ‘इंडिया ब्रांड’ की धारणा एक ऐसे राष्ट्र के रूप में बन चुकी है जो अंतरराष्ट्रीय शांति और स्थिरता का समर्थक है।
अमेरिका और चीन के प्रति घटा ऑस्ट्रेलियाई विश्वास
सर्वे की रिपोर्ट में एक और रोचक तथ्य सामने आया है—दुनिया की दो कथित बड़ी शक्तियों, अमेरिका और चीन, के प्रति ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों का सतर्क दृष्टिकोण। अमेरिका पर ऑस्ट्रेलिया के लोगों का विश्वास गिरकर 31 फीसदी पर आ गया है, जो कि लोवी इंस्टीट्यूट के सर्वे के इतिहास में सबसे निचला स्तर माना जा रहा है। चीन को लेकर भी लोगों में संशय की स्थिति है। यह बदलाव दर्शाता है कि अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीति में देशों के प्रति दृष्टिकोण तेजी से बदल रहे हैं और भारत अपनी ‘सक्रिय विदेश नीति’ के कारण इस भरोसे की दौड़ में आगे निकलता दिख रहा है।
आर्थिक मजबूती और सक्रिय कूटनीति का असर
भारत की इस बढ़ती विश्वसनीयता के पीछे प्रमुख कारकों में देश की आर्थिक मजबूती, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ती सक्रियता और प्रधानमंत्री मोदी की वैश्विक पहचान को माना जा रहा है। भारत की विदेश नीति को न केवल सधी हुई बल्कि सक्रिय भी माना जा रहा है, जिसने ऑस्ट्रेलिया जैसे अहम साझेदार देशों को भी प्रभावित किया है। वैश्विक मंच पर भारत के प्रति बढ़ता यह भरोसा यह संकेत देता है कि आने वाले समय में भारत की कूटनीतिक और आर्थिक भूमिका और भी अधिक निर्णायक होने वाली है।
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