Textile Export Strategy : अमेरिका द्वारा भारत के वस्त्र और परिधान उत्पादों पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लागू किए जाने के बाद भारत सरकार ने तत्काल रणनीतिक कदम उठाते हुए इसका ठोस जवाब तैयार कर लिया है। इस टैरिफ का सबसे अधिक असर भारत की टेक्सटाइल इंडस्ट्री पर पड़ने की आशंका है, जिससे निपटने के लिए भारत ने 40 नए वैश्विक बाजारों से संपर्क की योजना बनाई है।

भारत का ‘धांसू प्लान’: वैश्विक साझेदारी से टक्कर
सरकारी सूत्रों के मुताबिक भारत सरकार ने टेक्सटाइल एक्सपोर्ट को प्रभावित होने से बचाने के लिए यूके, जापान, दक्षिण कोरिया, जर्मनी, फ्रांस, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, UAE, मेक्सिको और रूस जैसे 40 देशों को चिन्हित किया है। इन देशों का सामूहिक वस्त्र आयात बाजार करीब 590 अरब डॉलर का है, जिसमें फिलहाल भारत की हिस्सेदारी महज 5-6% है। सरकार का लक्ष्य इस हिस्सेदारी को तेजी से बढ़ाना है। इसके लिए ‘ब्रांड इंडिया’ अभियान चलाकर अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों में भागीदारी बढ़ाई जाएगी और सूरत, तिरुपुर, भदोही जैसे प्रमुख वस्त्र क्लस्टरों को वैश्विक अवसरों से जोड़ा जाएगा।

EPCs निभाएंगी बड़ी भूमिका
इस मिशन में एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल्स (EPCs) को खास जिम्मेदारी दी गई है। ये काउंसिल्स न केवल निर्यात बाजारों का आकलन करेंगी बल्कि उच्च मांग वाले उत्पादों की पहचान कर वैश्विक स्तर पर ब्रांड इंडिया को मजबूत करेंगी। भारत पहले ही 220 से अधिक देशों को वस्त्र निर्यात करता है, लेकिन यह नया कदम मार्केट डायवर्सिफिकेशन के लिहाज़ से अहम माना जा रहा है।
25% टैरिफ से अमेरिकी बाजार में भारत की प्रतिस्पर्धा खतरे में
AEPC (Apparel Export Promotion Council) के महासचिव मिथिलेश्वर ठाकुर के अनुसार, अमेरिका में अब भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता 30-31% तक गिर गई है, जिससे भारत लगभग अमेरिकी वस्त्र बाजार से बाहर हो गया है। अकेले वस्त्र निर्यात में संभावित 10.3 अरब डॉलर का नुकसान हो सकता है।
सरकार से राहत की मांग
उद्योग संगठन सरकार से तत्काल वित्तीय राहत की मांग कर रहे हैं, ताकि उद्योग टैरिफ के असर से उबर सके। साथ ही ब्रिटेन और EFTA देशों के साथ FTA (Free Trade Agreements) को तेज़ी से लागू करने की अपील भी की जा रही है, जिससे नए बाज़ारों तक पहुंच बनाई जा सके।
चुनौती से अवसर की ओर
अमेरिका का यह टैरिफ भले ही भारत के टेक्सटाइल सेक्टर के लिए तगड़ा झटका है, लेकिन सरकार की प्रोएक्टिव रणनीति और नई वैश्विक साझेदारियों के जरिए यह संकट भारत के लिए एक बड़ा अवसर भी बन सकता है। अब देखना होगा कि यह पहल भारत को वैश्विक वस्त्र निर्यात का नेता बनाने की दिशा में कितनी सफल होती है।










