India Ukraine war role: रूस-यूक्रेन युद्ध और अमेरिकी राजनीति के बीच भारत की भूमिका एक बार फिर चर्चा में है। अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने शुक्रवार को भारत से अपील की कि वह पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की यूक्रेन युद्ध को खत्म कराने में मदद करे। उनका यह बयान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच हुई फोन बातचीत के कुछ घंटों बाद आया है।

ग्राहम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी पोस्ट में लिखा, “भारत और अमेरिका के रिश्ते सुधारने के लिए सबसे अहम कदम यह होगा कि भारत राष्ट्रपति ट्रंप की यूक्रेन में शांति स्थापना की कोशिशों में मदद करे।”

मोदी-पुतिन की बातचीत बनी आधार
प्रधानमंत्री मोदी ने 8 अगस्त को पुतिन से फोन पर बात की थी और इस बातचीत को “बहुत अच्छी और विस्तृत” बताया था। उन्होंने एक्स पर साझा किया कि दोनों नेताओं के बीच यूक्रेन संघर्ष सहित वैश्विक मुद्दों पर चर्चा हुई। इसके जवाब में अमेरिकी सीनेटर ग्राहम ने लिखा कि उन्हें उम्मीद है पीएम मोदी ने इस बातचीत में युद्ध को “न्यायपूर्ण और सम्मानजनक” तरीके से खत्म करने की बात कही होगी।
“भारत समझदारी से इस्तेमाल करे अपना प्रभाव”
लिंडसे ग्राहम ने कहा कि भारत रूस से सस्ता तेल खरीदने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश है और यह व्यापार रूस की युद्ध मशीन को ईंधन देता है। उन्होंने कहा, “भारत का रूस पर प्रभाव है, और मुझे उम्मीद है कि वह इसे समझदारी से इस्तेमाल करेगा।” उन्होंने जोर दिया कि भारत अगर ट्रंप की शांति प्रयासों में सहयोग करता है, तो यह भारत-अमेरिका संबंधों में सुधार के लिए निर्णायक कदम साबित हो सकता है।
अमेरिका में चुनावी पृष्ठभूमि और ट्रंप की भूमिका
यह बयान ऐसे समय में आया है जब डोनाल्ड ट्रंप आगामी अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी के प्रमुख दावेदार हैं। ट्रंप ने हाल ही में एलान किया है कि वे 15 अगस्त को अलास्का में रूसी राष्ट्रपति पुतिन से मुलाकात करेंगे और यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के संभावित रास्तों पर चर्चा करेंगे।
ट्रंप ने यह भी सुझाव दिया है कि युद्ध समाप्त करने के लिए यूक्रेन को अपनी कुछ भूमि रूस को सौंपनी चाहिए—जिसे यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने सिरे से खारिज कर दिया है।
भारत की संतुलित कूटनीति पर दुनिया की नजरें
भारत ने अब तक रूस-यूक्रेन युद्ध में संतुलित रुख अपनाया है। एक ओर भारत ने युद्ध की निंदा करते हुए संवाद और शांति की अपील की है, वहीं दूसरी ओर रूस से ऊर्जा खरीद जारी रखी है। अब जब अमेरिका के उच्च स्तर के नेता भारत से खुलकर मध्यस्थता और ट्रंप की मदद की उम्मीद जता रहे हैं, तो भारत के अगले कदम पर वैश्विक निगाहें टिकी हैं।
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