India Russia Oil Deal
India Russia Oil Deal : रूसी राष्ट्रपति के विशेष दूत किरिल दिमित्रीव ने हाल ही में वैश्विक ऊर्जा बाजार को लेकर एक महत्वपूर्ण बयान दिया है। दिमित्रीव के अनुसार, प्रतिबंधों में मिलने वाली पहली बड़ी छूट के परिणामस्वरूप लगभग 100 मिलियन बैरल रूसी कच्चे तेल की आपूर्ति अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए मुक्त हो जाएगी। यह मात्रा कितनी विशाल है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यह लगभग एक पूरे दिन के वैश्विक तेल उत्पादन के बराबर है। रूस का मानना है कि इस कदम से बाजार में तरलता आएगी और उन देशों को राहत मिलेगी जो पिछले काफी समय से ऊर्जा की किल्लत और आसमान छूती कीमतों से जूझ रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि रूसी तेल पर से प्रतिबंधों में ढील देने से वैश्विक स्तर पर पेट्रोलियम की उपलब्धता में अस्थायी रूप से वृद्धि देखी जा सकती है। आर्थिक दृष्टिकोण से, जब आपूर्ति बढ़ती है तो कीमतों में गिरावट की उम्मीद की जाती है। हालांकि, वर्तमान भू-राजनीतिक परिस्थितियां इतनी जटिल हैं कि रूसी आपूर्ति का यह लाभ अन्य संकटों के कारण ओझल होता दिख रहा है। दिमित्रीव के बयान के बावजूद, बाजार में स्थिरता की कमी बनी हुई है क्योंकि तेल की यह अतिरिक्त खेप अभी भी वितरण और लॉजिस्टिक्स की चुनौतियों का सामना कर रही है।
एक तरफ रूस की ओर से आपूर्ति बढ़ाने की खबरें आ रही हैं, तो दूसरी तरफ ईरान की सैन्य गतिविधियों ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। ईरान द्वारा सामरिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) को आंशिक रूप से बंद किए जाने के कारण पेट्रोलियम की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है। ईरान का यह कदम वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक बड़े खतरे के रूप में देखा जा रहा है। जैसे ही जलडमरूमध्य से आवाजाही बाधित हुई, वैश्विक बाजारों में कच्चे तेल के भाव रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गए, जिससे विकसित और विकासशील दोनों तरह की अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ गया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य की महत्ता को नजरअंदाज करना नामुमकिन है। युद्ध की स्थिति पैदा होने से पहले, दुनिया के कुल तेल और गैस उत्पादन का लगभग 20% हिस्सा इसी संकरे समुद्री मार्ग से होकर गुजरता था। यह खाड़ी देशों (जैसे सऊदी अरब, यूएई, कुवैत और इराक) से कच्चे तेल के निर्यात का मुख्य द्वार है। यदि यह मार्ग पूरी तरह या आंशिक रूप से लंबे समय तक बंद रहता है, तो रूसी तेल की अतिरिक्त आपूर्ति भी वैश्विक मांग को पूरा करने में नाकाफी साबित होगी। यह जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा व्यापार की वह नस है, जिसे दबाने मात्र से दुनिया भर में ईंधन की कीमतें अनियंत्रित हो जाती हैं।
वर्तमान में ऊर्जा को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। रूसी राष्ट्रपति के दूत का बयान जहाँ बाजार को शांत करने की कोशिश है, वहीं ईरान की कार्रवाई सीधे तौर पर पश्चिमी देशों को चुनौती देने की रणनीति का हिस्सा लगती है। इस ‘पावर गेम’ में आम उपभोक्ता सबसे ज्यादा पिस रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में आए इस भारी उछाल का असर सीधे तौर पर परिवहन, विनिर्माण और दैनिक उपभोग की वस्तुओं की महंगाई पर पड़ेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक मध्य पूर्व में तनाव कम नहीं होता और होर्मुज मार्ग सुचारू रूप से नहीं खुलता, तब तक रूसी तेल की छूट का कोई बड़ा सकारात्मक प्रभाव जमीन पर नजर नहीं आएगा।
किरिल दिमित्रीव द्वारा घोषित 100 मिलियन बैरल की राहत निश्चित रूप से एक सकारात्मक कदम है, लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य की बंदी ने इसे गौण बना दिया है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि वैश्विक महाशक्तियां इस दोहरे संकट से कैसे निपटती हैं। क्या कूटनीति के जरिए ईरान को पीछे हटने पर मजबूर किया जाएगा, या फिर दुनिया एक और बड़े ऊर्जा संकट (Energy Crisis) की ओर अग्रसर होगी? फिलहाल, अंतरराष्ट्रीय बाजार की नजरें रूस की अगली चाल और ईरान की समुद्री गतिविधियों पर टिकी हुई हैं।
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