Strait of Hormuz : ओमान की समुद्री सीमा और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के संवेदनशील क्षेत्र में हुए एक भीषण हमले ने पश्चिम एशिया में तनाव को चरम पर पहुँचा दिया है। ईरान द्वारा संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के तेल टैंकर ‘मोम्बासा’ और एलएनजी कैरियर ‘अल बहिया’ पर किए गए इस हमले में एक भारतीय नाविक की दुखद मृत्यु हो गई है। इस घटना के बाद भारत सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए दिल्ली में ईरानी दूतावास को तलब किया है और घटना पर आधिकारिक जवाब माँगा है। भारत ने ईरान के समक्ष खाड़ी क्षेत्र में कार्यरत अपने विशाल समुदाय की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है।

राजनयिक हलचल और भारतीय अधिकारियों की चिंता
भारत के कड़े तेवरों के बाद, ईरान के डिप्टी चीफ ऑफ मिशन (DCM) मोहम्मद जवाद हुसैनी सहित कई ईरानी राजनयिक भारतीय विदेश मंत्रालय पहुँचे। भारतीय अधिकारियों ने ईरान को स्पष्ट किया कि मर्चेंट जहाजों पर काम करने वाले हजारों भारतीय नागरिक अक्सर अत्यधिक जोखिम वाले समुद्री इलाकों से गुजरते हैं, और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना एक वैश्विक जिम्मेदारी है। विदेश मंत्रालय ने इस हमले की निंदा करते हुए भविष्य में ऐसे किसी भी कृत्य को रोकने के लिए ईरान पर दबाव बनाया है। यह घटना दर्शाती है कि क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक टकराव के कारण भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा किस कदर दांव पर लगी है।

हमले का विवरण: मिसाइलों से निशाना बने UAE के टैंकर
UAE के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह हमला उस समय हुआ जब ये जहाज दक्षिणी शिपिंग लेन से गुजर रहे थे। ईरान ने इन जहाजों को अपनी क्रूज मिसाइलों का निशाना बनाया, जिसके परिणामस्वरूप दोनों टैंकर्स में भीषण आग लग गई। हालाँकि, बाद में आग पर काबू पा लिया गया। इस हमले में न केवल एक भारतीय नाविक की मौत हुई, बल्कि 8 अन्य लोग भी घायल हुए हैं। घायलों में छह भारतीय और दो यूक्रेनी शामिल हैं, जिनमें से चार की स्थिति अत्यंत गंभीर बनी हुई है। ओमान की समुद्री सीमा के पास हुआ यह हमला अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों का सीधा उल्लंघन है।
UAE का कड़ा रुख और क्षेत्रीय सुरक्षा पर बढ़ता खतरा
संयुक्त अरब अमीरात ने ईरान की इस कार्रवाई की कड़ी भर्त्सना की है और इसे अंतरराष्ट्रीय कानूनों का खुला उल्लंघन करार दिया है। यूएई ने चेतावनी दी है कि उनके पास तनाव को बढ़ाने वाली इस आक्रामक कार्रवाई का उचित जवाब देने का पूरा अधिकार है। होर्मुज जलडमरूमध्य, जहाँ से दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल निर्यात होता है, अब इस संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बन गया है। इस घटना के बाद व्यावसायिक जहाजों के आवागमन (नेविगेशन) पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं, जिससे वैश्विक बाजार में ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
भू-राजनीतिक अस्थिरता और भविष्य की चुनौतियाँ
यह हमला ईरान और उसके पड़ोसी देशों के बीच पनप रहे गहरे वैमनस्य का परिणाम है। होर्मुज स्ट्रेट पर इस तरह की आक्रामकता ने पश्चिम एशिया में सुरक्षा समीकरणों को बदल दिया है। समुद्री रास्तों को युद्ध का अखाड़ा बनाए जाने से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। भारत के लिए अपने नागरिकों की सुरक्षा के साथ-साथ ऊर्जा सुरक्षा बनाए रखना अब एक बड़ी कूटनीतिक चुनौती बन गई है। यह स्थिति स्पष्ट करती है कि यदि इन समुद्री मार्गों पर तनाव कम नहीं किया गया, तो भविष्य में और भी बड़ी मानवीय और आर्थिक त्रासदियां सामने आ सकती हैं।
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