Rupee vs Dollar : अमेरिका और ईरान के बीच फिर से शुरू हुए सैन्य संघर्ष के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरे संकट के बादल छा गए हैं। इस संघर्ष के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है, जिससे ब्रेंट क्रूड का भाव 85 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का सीधा और नकारात्मक प्रभाव भारतीय रुपये पर पड़ा है। मंगलवार को शुरुआती कारोबार के दौरान भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 48 पैसे की भारी गिरावट के साथ 96.16 के स्तर पर पहुंच गया। भू-राजनीतिक अनिश्चितता के कारण न केवल भारत, बल्कि अधिकांश एशियाई मुद्राओं पर दबाव बढ़ गया है, जिससे निवेशकों में चिंता का माहौल है।

रुपये में गिरावट के मुख्य कारण
विदेशी मुद्रा विशेषज्ञों के अनुसार, रुपये में आई यह गिरावट कई कारकों का सम्मिलित परिणाम है। प्रमुख रूप से, पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव, क्रूड ऑयल की कीमतों में अप्रत्याशित तेजी और निवेशकों का सुरक्षित निवेश विकल्पों (जैसे डॉलर या गोल्ड) की ओर रुख करना अमेरिकी मुद्रा की मांग को बढ़ा रहा है। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 95.95 पर खुला और देखते ही देखते 96.16 के निचले स्तर तक गिर गया। गौरतलब है कि सोमवार को भी रुपया 30 पैसे की गिरावट के साथ 95.68 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। बाजार के जानकारों का मानना है कि तकनीकी नजरिए से 95.80-96 रुपये का स्तर इस पेयर के लिए एक महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस जोन बन गया है।

आरबीआई के हस्तक्षेप की उम्मीद और बाजार की प्रतिक्रिया
इंपोर्टर्स (आयातकों) की ओर से डॉलर की मांग में अचानक बढ़ोत्तरी ने स्थिति को और कठिन बना दिया है। बाजार के विश्लेषकों को अब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से हस्तक्षेप की उम्मीद है, ताकि रुपये में आ रही इस तीव्र गिरावट को नियंत्रित किया जा सके। हालांकि डॉलर सूचकांक (Dollar Index) में 0.06 प्रतिशत की मामूली गिरावट दर्ज की गई है, जो 101.17 के स्तर पर है, लेकिन इसका घरेलू मुद्रा पर कोई खास सकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ा है। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) का रुख भी बाजार के लिए चिंता का विषय बना हुआ है, जिन्होंने सोमवार को शुद्ध रूप से 3,062.27 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जिससे घरेलू बाजार में तरलता (liquidity) पर दबाव बढ़ा है।
शेयर बाजार और आर्थिक अनिश्चितता का मिला-जुला असर
रुपये की कमजोरी का असर सीधे तौर पर भारतीय शेयर बाजार पर भी देखा जा रहा है। सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 0.42 प्रतिशत टूटकर 77,294.12 अंकों पर और निफ्टी 0.64 प्रतिशत गिरकर 24,144.60 अंकों पर कारोबार करता दिखा। क्रूड ऑयल की कीमतों में 2.02 प्रतिशत की वृद्धि सीधे तौर पर भारत के चालू खाता घाटे (Current Account Deficit) और मुद्रास्फीति को प्रभावित कर सकती है। वर्तमान वैश्विक स्थिति को देखते हुए विशेषज्ञ आने वाले दिनों में और अधिक अस्थिरता की आशंका जता रहे हैं। निवेशकों को सलाह दी गई है कि वे बाजार की बदलती चाल और वैश्विक समाचारों पर कड़ी नजर रखें, क्योंकि भू-राजनीतिक मोर्चे पर कोई भी नई हलचल भारतीय मुद्रा और इक्विटी बाजार के लिए नई चुनौतियों का कारण बन सकती है।
Read More : Deoghar Fodder Scam : सुप्रीम कोर्ट से लालू यादव को बड़ी राहत, जमानत रद्द करने से किया इंकार











