India US Jet Engine Deal
India US Jet Engine Deal: भारत और अमेरिका ने सैन्य सहयोग के क्षेत्र में एक ऐसी बड़ी सफलता हासिल की है, जो आने वाले दशकों तक भारतीय आकाश की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी। अमेरिकी दिग्गज कंपनी जीई एयरोस्पेस (GE Aerospace) और भारत की हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के बीच लड़ाकू विमानों के इंजन के सह-उत्पादन (Co-production) को लेकर तकनीकी सहमति बन गई है। यह समझौता भारतीय वायु सेना (IAF) के लिए किसी वरदान से कम नहीं है, क्योंकि वायु सेना लंबे समय से अपने गिरते फाइटर स्क्वाड्रन की संख्या को लेकर चिंतित थी। चीन और पाकिस्तान जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए यह रक्षा सौदा मील का पत्थर साबित होगा।
वर्तमान में, भारत का स्वदेशी लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) तेजस, GE के F404 इंजनों पर निर्भर है। नए समझौते के तहत, भारत को अधिक शक्तिशाली और उन्नत F414 इंजन की तकनीक प्राप्त होगी। GE एयरोस्पेस की वाइस प्रेसिडेंट रीटा फ्लेहर्टी के अनुसार, सबसे जटिल तकनीकी चर्चाएं पूरी हो चुकी हैं। इसमें टेक्नोलॉजी का एक गहरा और विस्तृत ट्रांसफर शामिल है, जो भारत को दुनिया के उन चुनिंदा देशों की कतार में खड़ा कर देगा जिनके पास जेट इंजन बनाने की क्षमता है।
इस समझौते की सबसे बड़ी विशेषता ‘टेक्नोलॉजी ट्रांसफर’ है। जीई एयरोस्पेस इस इंजन की मैन्युफैक्चरिंग तकनीक का लगभग 80% हिस्सा भारत को हस्तांतरित कर रहा है। यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ मिशन को जबरदस्त मजबूती देगा। रीटा फ्लेहर्टी ने इसे एक ‘ऐतिहासिक समझौता’ करार देते हुए कहा कि ये मशीनें असाधारण रूप से सक्षम और जटिल हैं। अब भारत इन इंजनों का निर्माण खुद अपनी धरती पर कर सकेगा, जिससे विदेशी निर्भरता कम होगी।
तकनीकी सहमति के बाद अब GE और HAL कमर्शियल वार्ता के अगले दौर में प्रवेश करेंगे। हालांकि, वैश्विक स्तर पर पुर्जों (Components) की बढ़ती कीमतों के कारण इस प्रक्रिया में थोड़ा समय लग सकता है। उम्मीद जताई जा रही है कि इस चालू वित्त वर्ष के अंत तक अंतिम अनुबंध पर हस्ताक्षर हो जाएंगे। इसके साथ ही, वायु सेना के वर्तमान बेड़े के लिए F404 इंजनों की मरम्मत और रखरखाव हेतु भारत में ही एक डिपो सुविधा स्थापित करने पर भी सहमति बनी है।
इस समझौते के धरातल पर उतरने से भारत की सामरिक शक्ति में कई गुना वृद्धि होगी। प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं:
स्वदेशी विनिर्माण: HAL, जीई की सहायता से भारत में ही इंजनों की अत्याधुनिक मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित करेगा।
समय सीमा: अनुबंध पर हस्ताक्षर होने के मात्र दो वर्षों के भीतर यह यूनिट पूरी तरह चालू हो जाएगी।
99 इंजनों का निर्माण: योजना के अनुसार, भारत में कुल 99 इंजनों का निर्माण किया जाएगा, जो विशेष रूप से तेजस Mk2 वेरिएंट के लिए होंगे।
बेड़े की मजबूती: वायु सेना ने लगभग 120-130 तेजस Mk2 विमानों की मांग की है, जिन्हें ये स्वदेशी इंजन नई रफ्तार और मारक क्षमता प्रदान करेंगे।
यह केवल एक व्यापारिक सौदा नहीं है, बल्कि भारत और अमेरिका के बीच 40 साल पुरानी साझेदारी का नया अध्याय है। जटिल इंजन तकनीक का भारत आना यह दर्शाता है कि वैश्विक स्तर पर भारत की साख बढ़ी है। जब भारत अपने फाइटर जेट्स के दिल यानी ‘इंजन’ का निर्माण स्वयं करेगा, तब सीमाओं पर सुरक्षा की दीवार और भी ऊंची और अभेद्य हो जाएगी।
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