India US relations tension: भारत और अमेरिका के बीच चल रहे टैरिफ विवाद ने दोनों देशों के संबंधों को तनावपूर्ण कर दिया है। अमेरिका ने भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने के बाद द्विपक्षीय वार्ता रोक दी है और वर्ष 2025 में भारत में आयोजित होने वाले क्वाड सम्मेलन में हिस्सा लेने से भी इनकार कर दिया है। इस कड़ी में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस-भारत के तेल व्यापार को लेकर नाराजगी जताई है और भारत को एक बड़ा राजनीतिक झटका देने की तैयारी कर रहे हैं।
टैरिफ विवाद के बाद ट्रंप प्रशासन ने यूरोपीय देशों पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है कि वे भी भारत पर समान टैरिफ और प्रतिबंध लगाएं। व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने मीडिया को बताया कि ट्रंप यूरोपीय देशों के दोहरे व्यवहार से बेहद निराश हैं। ट्रंप चाहते हैं कि यूरोपीय देश भारत से तेल और गैस की खरीदारी बंद कर दें और भारत के साथ अपने व्यापारिक संबंधों को समाप्त कर दें। हालांकि, यूरोपीय देशों ने इस मामले में अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप शांति वार्ता कराने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने 15 अगस्त को अलास्का में रूस के राष्ट्रपति पुतिन से मुलाकात कर युद्धविराम की पहल की। पुतिन ने शांति वार्ता के लिए सहमति जताई, लेकिन शर्त रखी कि यूक्रेन को डोनबास इलाक़े को रूस को सौंपना होगा और नाटो में शामिल होने का सपना त्यागना होगा।
इसके बाद 18 अगस्त को ट्रंप ने वाशिंगटन डीसी में यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की से मुलाकात की। इस दौरान यूरोपीय संघ के कई प्रमुख नेता भी उपस्थित थे, जिन्होंने यूक्रेन की सुरक्षा की गारंटी देने और रूस से बिना शर्त युद्धविराम करने की मांग की। जेलेंस्की ने भी शांति प्रक्रिया के लिए सकारात्मक संकेत दिए।
व्हाइट हाउस ने यूरोपीय देशों पर आरोप लगाया है कि वे रूस-यूक्रेन संघर्ष को बढ़ावा देते हुए सामने से शांति प्रयासों का समर्थन कर रहे हैं, लेकिन साथ ही युद्धविराम के लिए कठोर शर्तें भी रख रहे हैं। ट्रंप ने यूरोपीय नेताओं को दोहरे मापदंड अपनाने का दोषी ठहराया है, जिससे वैश्विक शांति प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
टैरिफ विवाद और क्वाड सम्मेलन से ट्रंप का इंकार भारत-अमेरिका संबंधों में ठंडक का संकेत है। यह तनाव व्यापार, रणनीतिक सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी असर डाल सकता है। भारत सरकार ने टैरिफ को लेकर कड़ा विरोध जताया है और अमेरिकी नीतियों को अपने राष्ट्रीय हितों के खिलाफ माना है।
भारत-अमेरिका संबंधों में फिलहाल तनाव और अनिश्चितता बनी हुई है। ट्रंप प्रशासन की नीति में बदलाव और यूरोपीय देशों की भूमिका इस विवाद को और जटिल बना सकती है। वहीं, रूस-यूक्रेन युद्ध में ट्रंप की मध्यस्थता की कोशिशें वैश्विक शांति के लिए महत्वपूर्ण हैं, लेकिन उनके द्विपक्षीय रवैये से कई देशों के बीच मतभेद उभर कर सामने आ रहे हैं।
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