Khawaja Asif Aurangzeb: पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ एक बार फिर अपने विवादित और ऐतिहासिक रूप से गलत बयान को लेकर चर्चा में हैं। हाल ही में एक पाकिस्तानी टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि “भारत कभी वास्तव में एकजुट नहीं था, सिर्फ औरंगज़ेब के शासन को छोड़कर।” उनके इस ऐतिहासिक विकृति वाले बयान पर इंटरनेट जगत में जमकर मजाक उड़ाया जा रहा है।
इंटरव्यू के दौरान ख्वाजा आसिफ ने कहा, “पाकिस्तान अल्लाह के नाम पर बना था। हम आपस में झगड़ते हैं, प्रतिस्पर्धा करते हैं, लेकिन जब भारत से लड़ाई होती है, तो हम एकजुट हो जाते हैं।” इसके बाद उन्होंने यह भी जोड़ा कि भारत कभी एकजुट नहीं था, सिवाय औरंगज़ेब के शासनकाल को छोड़कर।
इतिहास विशेषज्ञों और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने इस बयान को “बेबुनियाद, हास्यास्पद और ऐतिहासिक रूप से अप्रमाणित” बताया है। इतिहास गवाह है कि भारत औरंगज़ेब से सैकड़ों वर्ष पहले और बाद में भी कई बार एकजुट और शक्तिशाली राष्ट्र रहा है।
चंद्रगुप्त मौर्य (ईसा पूर्व 4वीं शताब्दी) ने लगभग पूरे भारतीय उपमहाद्वीप को एक शासन के अधीन किया था।
सम्राट अशोक ने भारत को बंगाल से अफगानिस्तान तक एकजुट किया।
समुद्रगुप्त और हर्षवर्धन जैसे सम्राटों के काल में भी भारत मजबूत और संगठित था।
अकबर, जो औरंगज़ेब से पहले थे, को भी भारत के सबसे सफल शासकों में गिना जाता है।
1947 के बाद, लोकतांत्रिक भारत ने राजनीतिक, सांस्कृतिक और आर्थिक एकता को स्थापित कर आधुनिक भारत को वैश्विक मंच पर एक सशक्त राष्ट्र बनाया।
यह पहली बार नहीं है जब ख्वाजा आसिफ ने ऐसे अजीबोगरीब बयान दिए हों। उन्होंने पहले भी आतंकवाद से जुड़े विषयों पर पाकिस्तान की विरोधाभासी स्थिति को उजागर कर दिया था। एक पुराने बयान में वे कहते पाए गए थे कि “यह सच है कि पाकिस्तान को आतंकवाद के केंद्र के रूप में जाना जाता है और आतंकियों के परिवार यहां रहते हैं, लेकिन आतंकवाद से पाकिस्तान का कोई लेना-देना नहीं है।” उनके इस उलझे हुए बयान पर भी पहले भारी ट्रोलिंग हुई थी।
उनके ‘औरंगज़ेब एकता’ वाले बयान पर सोशल मीडिया यूजर्स ने मीम्स और व्यंग्य के ज़रिए तगड़ा जवाब दिया है। कई लोगों ने लिखा कि पाकिस्तानी नेता अब इतिहास नहीं, फैंटेसी बुक्स से प्रेरणा ले रहे हैं। कुछ यूजर्स ने तो यह भी कहा कि “अगर यही इतिहास की समझ है, तो पाकिस्तान की शिक्षा नीति पर भी सवाल उठते हैं।”पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ का यह बयान न केवल ऐतिहासिक तथ्यों का मजाक उड़ाता है, बल्कि यह दिखाता है कि किस तरह के बयान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की छवि को कमजोर कर सकते हैं। भारत के इतिहास को इस तरह तोड़-मरोड़ कर पेश करने की कोशिशें ना केवल तथ्यात्मक रूप से गलत हैं, बल्कि हास्यास्पद भी हैं।
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