Ahmedabad Air India Plane Crash : गुजरात के अहमदाबाद में हुए भीषण एयर इंडिया विमान हादसे की पहली बरसी आने वाली है। पिछले साल 12 जून 2025 को हुए इस दिल दहला देने वाले प्लेन क्रैश में कुल 260 मासूम लोगों ने अपनी जान गंवाई थी। मृतकों में 180 भारतीय यात्री, क्रू मेंबर्स के 19 सदस्य, करीब 50 ब्रिटिश नागरिक तथा पुर्तगाल और कनाडा के लोग शामिल थे। अहमदाबाद से लंदन के लिए रवाना हुई एयर इंडिया की उड़ान संख्या AI-171 ने दोपहर 1:38 बजे जैसे ही टेकऑफ किया, वह महज 32 सेकेंड के भीतर तेजी से नीचे गिर गई और एक बड़े धमाके के साथ आग के गोले में तब्दील हो गई। लाखों लीटर जलते हुए ईंधन के बीच इस भयानक त्रासदी में विश्वास कुमार रमेश नाम के एकमात्र यात्री चमत्कारिक रूप से जिंदा बच गए थे, जिनका दर्द अब एक साल बाद दोबारा छलका है।

बोइंग विमान की सीट संख्या 11A और रोंगटे खड़े कर देने वाला वो जादुई चमत्कार
हादसे के उस भयानक पल में विश्वास कुमार रमेश बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर विमान के अगले हिस्से में मौजूद इमरजेंसी एग्जिट के पास सीट नंबर 11A पर बैठे थे। एविएशन एक्सपर्ट्स के मुताबिक, यह सीट विंग बॉक्स के नजदीक होती है, जिसे हवाई जहाज का सबसे मजबूत ढांचा माना जाता है। विमान के जमीन पर गिरते ही वह दो टुकड़ों में टूट गया। रमेश ने बिना एक पल गंवाए अपनी सीटबेल्ट खोली और मलबे में बने एक अप्रत्याशित छेद से रेंगकर बाहर निकल गए। अगर उन्होंने चंद सेकेंड की भी देरी की होती, तो वह भी धधकती आग की चपेट में आ जाते। मामूली खरोंचों के साथ मलबे और धुएं के गुबार के बीच से पैदल बाहर आते हुए रमेश की तस्वीरें पूरी दुनिया में सुर्खियां बन गई थीं।

मानसिक आघात, भाई को खोने का गम और इंसाफ के लिए अनसुलझे सवाल
प्रेस एसोसिएशन और ‘द गार्डियन’ से बातचीत के दौरान रमेश ने अपना गहरा मानसिक दर्द साझा किया। इस क्रैश में उन्होंने अपनी आंखों के सामने अपने सगे छोटे भाई अजय कुमार रमेश (सीट संख्या 11J) समेत सैकड़ों यात्रियों को तड़पकर मरते देखा था। रमेश ने कहा, “मेरा दुख उस मनहूस दिन खत्म नहीं हुआ था। मैं आज भी गहरे मानसिक घावों, भाई को खोने के गम और इस सवाल के साथ जी रहा हूं कि यह सब कैसे हुआ? इस हादसे से प्रभावित हर पीड़ित परिवार को यह जानने का पूरा हक है कि आखिर सच क्या है। हमें सिस्टम से पूरी ईमानदारी, पारदर्शिता और सटीक जवाब चाहिए।”
ब्रिटेन में तन्हाई की जिंदगी और गहरे डिप्रेशन से जूझ रहा है सर्वाइवर
मूल रूप से भारत के दीव से ताल्लुक रखने वाला यह परिवार पिछले 25 वर्षों से ब्रिटेन में रह रहा था और दोनों भाई वहां फिशिंग का पारिवारिक बिजनेस संभालते थे। हादसे के ढाई महीने बाद सितंबर 2025 में रमेश बेहद डरे हुए मन से वापस लंदन लौटे। वह वर्तमान में अपनी पत्नी और 5 साल के बेटे के साथ ब्रिटेन के लीस्टर शहर में एक छोटे से घर में रहते हैं। हालांकि, शारीरिक और मानसिक अस्वस्थता के कारण वह अब ज्यादातर समय घर के भीतर ही कैद रहते हैं।
अकेले जिंदा बच जाने का अपराध बोध और अपनों को खोने का कभी न खत्म होने वाला सदमा
हादसे को एक वर्ष का समय बीत जाने के बाद भी विश्वास कुमार रमेश के मानसिक हालात सामान्य नहीं हो सके हैं। वह इस भीषण त्रासदी के खौफनाक सदमे और ‘सर्वाइवर गिल्ट’ (अकेले जिंदा बच जाने का अपराध बोध) की बीमारी से बुरी तरह जूझ रहे हैं। बीबीसी को दिए एक पुराने इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि वह डिप्रेशन के कारण अपनी पत्नी और बच्चे से भी ठीक से बात नहीं कर पाते हैं। भीड़भाड़ से दूर खुद को एक कमरे में बंद रखने वाले रमेश आज भी महसूस करते हैं कि वह मानसिक रूप से उसी भयानक हादसे वाले पल में फंसे हुए हैं।










