Indian Constitution Day 2025
Indian Constitution Day 2025:भारत का संविधान, जिसे दुनिया का सबसे बड़ा लिखित संविधान माना जाता है, के निर्माण में डॉ. भीमराव अंबेडकर का महत्वपूर्ण योगदान सर्वविदित है। हालांकि, यह जानकर आश्चर्य होता है कि संविधान की मूल प्रति को अपने हाथों से लिखने वाले कैलीग्राफर (सुलेखक) कौन थे। बिहार के मधुबनी जिले के प्रेम बिहारी नारायण रायजादा वह महान शख्सियत थे, जिन्होंने भारतीय संविधान की मूल प्रति को अपनी अद्भुत हस्तलिपि में लिखा था।
यह मूल प्रति अंग्रेजी भाषा में तैयार की गई थी, जिसका बाद में हिन्दी में भी अनुवाद किया गया। रायजादा ने इस श्रमसाध्य कार्य को पूरा करने में लगभग छह महीने का समय लिया, जिसके दौरान उनकी 432 निब घिस गईं। उन्होंने लकड़ी के होल्डर में निब लगाकर और उसे स्याही में डुबोकर, पूरी लगन और समर्पण के साथ लेखन कार्य संपन्न किया।
भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने प्रेम बिहारी नारायण रायजादा से संविधान को सुंदर इतालवी शैली में लिखने का अनुरोध किया था। रायजादा ने अपनी कला के बदले में कोई भी शुल्क या फीस लेने से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने कहा था, “एक पैसा भी नहीं। मेरे पास भगवान की दया से सब कुछ है। मैं अपनी जिंदगी से खुश हूं।”
लेकिन, उन्होंने अपनी कला के प्रति सम्मान और अपने परिवार के प्रति स्नेह दर्शाते हुए एक खास शर्त रखी: “मैं अपनी जिंदगी से खुश हूं, लेकिन मेरी एक शर्त है कि इसके हर पेज पर मैं अपना नाम और आखिरी पृष्ठ पर अपने दादा का नाम लिखूंगा।”
नेहरू ने उनकी शर्त को सहर्ष स्वीकार कर लिया। रायजादा ने जिस कक्ष में बैठकर संविधान लेखन का कार्य किया था, उसी स्थान पर बाद में संविधान क्लब का निर्माण किया गया। यह ऐतिहासिक लेखन कार्य कॉन्स्टीट्यूशन हॉल में हुआ, जिसे पूरा करने में उन्हें लगभग छह महीने का समय लगा।
भारतीय संविधान की मूल प्रति एक विशेष प्रकार के पार्चमेंट कागज (45.7 गुना 58.4 सेमी) पर लिखी गई थी, जो न चिपकने वाला था। यह खास कागज लेखन के लिए ब्रिटेन के बर्मिंघम शहर से मंगाया गया था। संविधान की मूल प्रति को लेदर की काली जिल्द में सुरक्षित रखा गया है, जिस पर सोने की कारीगरी की गई है।
अंग्रेजी भाषा की मूल प्रति में 233 पन्ने हैं, जबकि हिन्दी की प्रति में 264 पन्ने हैं, जिसका कुल वजन 13 किलोग्राम है। हिन्दी की संविधान प्रति को भी एक अन्य सुलेखक वसंत कृष्ण वैद्य ने पुणे के रिसर्च सेंटर में तैयार किया था। अंग्रेजी और हिन्दी की ये दोनों ही प्रतियां भारतीय इतिहास की अमूल्य धरोहर हैं।
संविधान की पांडुलिपि से जुड़े कुछ प्रमुख तथ्य:
13 किलो वजन संविधान की मूल प्रति का
1 हजार साल तक खराब नहीं होता यह कागज
3.75 किलो था संविधान की सिर्फ पांडुलिपि का वजन
233 पृष्ठ हैं अंग्रेजी पांडुलिपि में
6 महीने लगे संविधान को लिखने में
संविधान में 395 अनुच्छेद, 8 शेड्यूल और एक प्रस्तावना लिखी गई
प्रेम बिहारी नारायण रायजादा ने बचपन में ही अपने माता-पिता को खो दिया था, जिसके बाद उनके दादाजी रामप्रसाद सक्सेना ने उनका पालन-पोषण किया। रायजादा के दादाजी अंग्रेजी और फारसी भाषा के प्रकांड विद्वान थे। रायजादा ने दिल्ली के सेंट स्टीफन कॉलेज से स्नातक की डिग्री हासिल की और बाद में सुलेखन (कैलीग्राफिक आर्ट) में महारत हासिल की। अपने दादाजी के प्रति प्रेम और सम्मान के कारण ही उन्होंने संविधान के हर पेज पर अपना नाम और आखिरी पृष्ठ पर दादा रामप्रसाद सक्सेना का नाम लिखने की शर्त रखी थी, जो उनकी कला और परिवार के प्रति उनकी भावना को दर्शाता है।
संविधान की मूल अंग्रेजी और हिन्दी की प्रतियों को संरक्षित रखने के लिए भारतीय संसद ने 1985 में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया। पार्लियामेंट लाइब्रेरी की पहल पर, नेशनल फिजिकल लेबोरेटरी ने विशेष रूप से कांच के सीलबंद बॉक्स तैयार किए, ताकि ये अमूल्य धरोहर सैकड़ों वर्षों तक सुरक्षित रखी जा सकें।
अमेरिकी संविधान को संरक्षित करने के लिए हीलियम चैंबर के बॉक्स की कोशिश सफल नहीं रही थी, इसलिए भारतीय संविधान की मूल प्रतियों को नाइट्रोजन बॉक्स में रखा गया है।
नाइट्रोजन के 2 चैंबर बॉक्स बनाए गए।
ये सील बंद बॉक्स (180 X 305 सेमी) अमेरिकी शहर कैलीफोर्निया से नई दिल्ली भेजे गए।
इन बॉक्स में विशेष केमिकल डाला गया ताकि उनमें ऑक्सीजन न रहे।
ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में कागज खराब नहीं होता, जिससे संविधान की मूल प्रतियां सुरक्षित रहती हैं।
संविधान की प्रति पर सबसे पहले संविधान सभा अध्यक्ष और तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद का हस्ताक्षर होना तय था। हालांकि, जब हस्ताक्षर की प्रक्रिया शुरू हुई, तो प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू सबसे पहले पहुँचे और उन्होंने हस्ताक्षर कर दिए। इसके बाद अन्य सदस्यों ने भी हस्ताक्षर करना शुरू कर दिया। जब डॉ. राजेंद्र प्रसाद अंत में पहुँचे, तो उनके लिए पर्याप्त जगह नहीं बची थी। इसलिए, उन्होंने सबसे ऊपर तिरछे हस्ताक्षर किए, जो संविधान की प्रति में एक अनोखा ऐतिहासिक विवरण बन गया।
भारतीय संविधान के निर्माण की प्रक्रिया कई वर्षों तक चली:
9 दिसंबर 1946: संविधान सभा की पहली बैठक हुई।
4 नवंबर 1947: ड्रॉफ्ट समिति ने मसौदा तैयार कर संविधान सभा को सौंपा।
2 साल तक मसौदे के विभिन्न बिंदुओं पर गहन बहस चली।
मसौदे में 2 हजार से अधिक बदलाव किए गए।
26 नवंबर 1949: संविधान को अंगीकार (Adopt) किया गया और संविधान लेखन कार्य पूरा हुआ।
26 जनवरी 1950: संविधान को आधिकारिक रूप से लागू किया गया।
19 नवंबर 2015: डॉ. भीमराव अंबेडकर की 125वीं जयंती वर्षगांठ के उपलक्ष्य में, यह ऐलान किया गया कि हर साल 26 नवंबर को संविधान दिवस के रूप में मनाया जाएगा।
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