Vande Mataram controversy
Vande Mataram controversy : मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में नगर निगम के बजट सत्र के दौरान शुरू हुआ ‘वंदे मातरम्’ विवाद अब पुलिस थाने तक पहुँच गया है। राष्ट्रगीत के अपमान और सदन की गरिमा को ठेस पहुँचाने के आरोपों के बाद पुलिस ने कांग्रेस की दो महिला पार्षदों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की है। यह घटना 8 अप्रैल की है, जब नगर निगम में वित्तीय वर्ष के बजट पर चर्चा होनी थी। कार्यवाही शुरू होने से पूर्व राष्ट्रगीत के गायन को लेकर पार्षदों के बीच तकरार हुई, जिसने देखते ही देखते राजनीतिक और कानूनी रूप ले लिया। प्रशासन ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए निष्पक्ष जाँच का आश्वासन दिया है।
पुलिस विभाग द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस विवाद की मुख्य केंद्र कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख आलिम और रुबिना इकबाल खान रही हैं। आरोप है कि सत्र के दौरान जब राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ का गायन शुरू हुआ, तब इन पार्षदों ने इसमें सम्मिलित होने से स्पष्ट इनकार कर दिया। एमजी रोड थाना पुलिस ने नगर निगम के व्हिप द्वारा दी गई औपचारिक शिकायत और सदन की सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जाँच की। अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त अमरेंद्र सिंह ने पुष्टि की है कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196 (विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देना) के तहत दोनों पार्षदों पर केस दर्ज किया गया है।
प्रत्यक्षदर्शियों और रिपोर्ट के अनुसार, विवाद तब शुरू हुआ जब कांग्रेस की पार्षद सदन की कार्यवाही में देरी से पहुँचीं। नियमानुसार सत्र की शुरुआत राष्ट्रगीत से हुई थी, जिस पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के पार्षदों ने कांग्रेस पार्षदों से अपनी स्थिति स्पष्ट करने और गीत गाने को कहा। फौजिया शेख आलिम के इनकार के बाद सदन का माहौल गरमा गया। बीजेपी पार्षदों ने इसे देशभक्ति का अपमान बताते हुए नारेबाजी शुरू कर दी, जिसके चलते बजट सत्र की महत्वपूर्ण चर्चा घंटों तक बाधित रही। सत्ता पक्ष ने इसे सुनियोजित विरोध करार देते हुए कांग्रेस की मंशा पर सवाल उठाए हैं।
इस प्रकरण पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने कांग्रेस पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सार्वजनिक संवैधानिक पद पर रहते हुए ‘वंदे मातरम्’ जैसे पवित्र गीत का विरोध करना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। सीएम ने कहा कि यह कृत्य उन देशभक्तों और बलिदानियों का अपमान है जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे व्यवहार से कांग्रेस के जनप्रतिनिधियों की मानसिकता और उनके नेतृत्व के चरित्र का पता चलता है।
मुख्यमंत्री ने केवल पार्षदों तक ही अपनी आलोचना सीमित नहीं रखी, बल्कि उन्होंने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को भी कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से मांग की है कि वे इस शर्मनाक घटना पर अपनी स्थिति स्पष्ट करें। मुख्यमंत्री ने सवाल किया कि क्या कांग्रेस अपने नेताओं को राष्ट्रगीत के अपमान के लिए प्रोत्साहित कर रही है? उन्होंने कहा कि विपक्षी दल को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। फिलहाल, पुलिस मामले की विस्तृत जाँच कर रही है और कानूनी साक्ष्यों के आधार पर आगामी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
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