Strait of Hormuz
Strait of Hormuz : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति और वैश्विक अर्थव्यवस्था को बड़ी राहत देते हुए एक ऐतिहासिक घोषणा की है। बुधवार को एक बयान जारी कर ट्रंप ने कहा कि वे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को चीन और पूरी दुनिया के लिए हमेशा के लिए खोल रहे हैं। ट्रंप ने जोर देकर कहा कि यह कदम वैश्विक हित में उठाया जा रहा है ताकि भविष्य में ऐसी संकटपूर्ण स्थिति दोबारा पैदा न हो। राष्ट्रपति ने विश्वास जताया कि उनका यह फैसला न केवल व्यापारिक सुगमता बढ़ाएगा, बल्कि युद्ध की आशंकाओं को भी कम करेगा। उन्होंने शांति की वकालत करते हुए सवाल किया कि क्या कूटनीति और समझदारी, लड़ाई-झगड़े से कहीं बेहतर विकल्प नहीं है?
राष्ट्रपति ट्रंप ने चीन के साथ संबंधों पर भी सकारात्मक टिप्पणी की है। उन्होंने खुलासा किया कि चीन इस बात पर सहमत हो गया है कि वह ईरान को किसी भी प्रकार के हथियारों की आपूर्ति नहीं करेगा। ट्रंप ने बड़े उत्साह के साथ कहा, “जब मैं कुछ हफ्तों में चीन पहुंचूंगा, तो राष्ट्रपति शी जिनपिंग मेरा गर्मजोशी से स्वागत करेंगे। हम दोनों मिलकर बहुत समझदारी और बेहतरीन तरीके से काम कर रहे हैं।” हालांकि, शांति की बात करने के साथ ही ट्रंप ने अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन करना भी नहीं भुला। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि जरूरत पड़ी, तो अमेरिका युद्ध लड़ने में भी किसी भी अन्य देश से कहीं ज्यादा माहिर और सक्षम है।
गौरतलब है कि इससे पहले मंगलवार को डोनाल्ड ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नौसैनिक नाकेबंदी (Naval Blockade) का ऐलान कर दिया था। इस घोषणा ने पूरी दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया था। रणनीतिक विशेषज्ञों के बीच यह चर्चा तेज हो गई थी कि क्या ट्रंप ईरान पर दबाव बनाने के चक्कर में पूरी दुनिया को एक बड़े संघर्ष में धकेलना चाहते हैं? नाकेबंदी का मुख्य उद्देश्य ईरान की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ना और उसके तेल निर्यात को पूरी तरह ठप करना था। इस कदम से भारत, चीन और यूरोप समेत कई देशों के व्यापारिक हितों को गंभीर खतरा पैदा हो गया था।
इस तनावपूर्ण स्थिति की जड़ पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हुई वह बैठक थी, जो बिना किसी ठोस नतीजे के समाप्त हो गई। अमेरिका और ईरान के बीच लगभग 21 घंटों तक चली मैराथन वार्ता में किसी भी समझौते पर सहमति नहीं बन सकी। वार्ता विफल होने के तुरंत बाद ट्रंप ने अमेरिकी नौसेना को आदेश दिया था कि वे ईरानी बंदरगाहों की ओर जाने वाले या वहां से निकलने वाले हर जहाज को रोकें। ट्रंप का इरादा उन ‘न्यूट्रल’ देशों के जहाजों को भी इंटरसेप्ट करना था जो ईरान को सुरक्षित मार्ग के बदले भुगतान कर रहे थे। इस सख्त रुख ने खाड़ी क्षेत्र में बारूद के ढेर पर चिंगारी का काम किया था।
तनाव के इस दौर में 7 अप्रैल को हुई एक संक्षिप्त सुलह से राहत की उम्मीद जागी थी। तब अमेरिका और ईरान के बीच एक अल्पकालिक युद्धविराम समझौता हुआ था, जिसके तहत ईरान ने दो हफ्तों के लिए जहाजों को सीमित आवाजाही की अनुमति दी थी। इस कदम से वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आई थी। लेकिन 12 अप्रैल को जब बातचीत का दूसरा दौर विफल हुआ, तो ट्रंप के सख्त रुख के कारण ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई (WTI) कच्चे तेल की कीमतें फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गईं। अब ट्रंप के ताजा ‘उदार’ बयान के बाद उम्मीद है कि तेल बाजार में स्थिरता आएगी और वैश्विक महंगाई पर लगाम लगेगी।
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