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Indore Water Crisis: इंदौर में दूषित पानी से 14 की मौत, 1400 संक्रमित, परिजनों ने ठुकराया मुआवजा

Indore Water Crisis: स्वच्छता के शिखर पर रहने वाले शहर इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी ने भीषण तबाही मचाई है। जल संकट और लापरवाही के चलते अब तक 14 लोगों की जान जा चुकी है, जिससे पूरे शहर में शोक और आक्रोश का माहौल है। प्रशासन की सक्रियता के दावों के बीच मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है।

Indore Water Crisis: 14वीं मौत: माता-पिता के इकलौते बेटे अरविंद की दुखद विदाई

दूषित पानी के संक्रमण ने एक और परिवार का चिराग बुझा दिया है। 14वें मृतक की पहचान अरविंद (43 वर्ष) के रूप में हुई है, जो कुलकर्णी भट्टा का निवासी था। अरविंद रविवार को काम के सिलसिले में भागीरथपुरा आया था, जहां उसने पानी का सेवन किया। तबीयत बिगड़ने पर वह घर लौटा और प्राथमिक उपचार लेता रहा, लेकिन स्थिति गंभीर होने पर उसे निजी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हो गई। वह अपने बुजुर्ग माता-पिता का इकलौता सहारा था।

Indore Water Crisis: महामारी का रूप लेता संक्रमण: 1400 से अधिक लोग प्रभावित

भागीरथपुरा की गलियों में संक्रमण किसी महामारी की तरह फैल चुका है। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, 162 मरीज अब भी गंभीर हालत में विभिन्न अस्पतालों में उपचाराधीन हैं। कुल संक्रमितों की संख्या 1400 को पार कर गई है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा घर-घर जाकर किए जा रहे सर्वे में 2456 संदिग्ध मरीज पाए गए हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कई टीमों को तैनात किया गया है, जो मौके पर ही लोगों का प्राथमिक उपचार कर रही हैं।

पीड़ितों का आक्रोश: “हमे आपके चेक नहीं, अपनों की जान चाहिए”

गुरुवार को कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया और सात मृतक परिवारों को 2-2 लाख रुपये के मुआवजे के चेक सौंपे। हालांकि, शोक संतप्त परिजनों ने मंत्री के सामने अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया। एक भावुक परिजन ने चेक लेने से इनकार करते हुए कहा कि उन्हें आर्थिक मदद नहीं, बल्कि उनके परिजनों की जान वापस चाहिए। स्थानीय लोगों में नगर निगम और जल प्रदाय विभाग की लापरवाही को लेकर भारी नाराजगी देखी गई।

मुख्यमंत्री की बैठक: दोषियों पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन

बुधवार शाम मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्वयं इंदौर पहुंचे। उन्होंने अस्पतालों में जाकर मरीजों का हाल जाना और वरिष्ठ अधिकारियों की आपातकालीन बैठक ली। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि भविष्य में ऐसी ‘कष्टदायक स्थिति’ दोबारा उत्पन्न नहीं होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच रिपोर्ट आने के बाद इस त्रासदी के लिए जिम्मेदार बड़े अधिकारियों पर कठोरतम कार्रवाई की जाएगी।

मंत्री का विवादित बयान और बाद में सोशल मीडिया पर माफी

घटनाक्रम के बीच एक विवाद भी खड़ा हो गया। जब मीडिया ने मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से मरीजों के इलाज पर हुए खर्च के रिफंड के बारे में पूछा, तो वे अपना आपा खो बैठे। उन्होंने पत्रकारों से कहा, “अरे छोड़ो यार… तुम फोकट सवाल मत पूछो।” इस पर तीखी बहस हुई और मंत्री ने अपशब्दों का प्रयोग किया। हालांकि, मामले के तूल पकड़ने पर उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर पोस्ट साझा कर अपने व्यवहार के लिए खेद प्रकट किया।

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