मध्य प्रदेश

Indore Water Crisis : स्वच्छ इंदौर में जहरीले पानी का सच; जीतू पटवारी के खुलासे से मची खलबली!

Indore Water Crisis : मध्य प्रदेश के सबसे प्रमुख महानगर इंदौर में जल आपूर्ति की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर राजनीतिक पारा चढ़ गया है। देश के सबसे स्वच्छ शहर का गौरव रखने वाले इंदौर पर अब “संक्रमित शहर” होने का बड़ा आरोप लगा है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सनसनीखेज दावा किया है कि शहर में पीने के पानी की स्थिति बेहद चिंताजनक है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने तुरंत सुधारात्मक कदम नहीं उठाए, तो शहर को भागीरथपुरा जैसी गंभीर त्रासदी का दोबारा सामना करना पड़ सकता है।

कांग्रेस की प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार पर प्रहार

इस पूरे मामले का खुलासा मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने एक विशेष पत्रकार वार्ता में किया। इस दौरान उनके साथ पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा और इंदौर शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे भी मंच पर मौजूद थे। पटवारी ने इंदौर की जल व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है और जिम्मेदार लोग मूकदर्शक बने हुए हैं।

भागीरथपुरा की पुरानी त्रासदी का स्मरण

जीतू पटवारी ने अतीत की एक दुखद घटना को याद करते हुए कहा कि भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने की वजह से 36 मासूम लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। उस समय कांग्रेस ने एक सजग विपक्ष की भूमिका निभाते हुए पीड़ित परिवारों की आवाज को पुरजोर तरीके से उठाया था। उन्होंने बताया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने खुद पीड़ितों से मुलाकात कर ढांढस बंधाया था और पार्टी ने अंतिम संस्कार से लेकर आर्थिक सहायता तक हर संभव मदद पहुंचाई थी।

कांग्रेस की ‘वॉटर रिपोर्ट’ और व्यापक सर्वे

शहर में पानी की वास्तविक स्थिति जानने के लिए कांग्रेस ने एक व्यापक अभियान चलाया था। पार्टी का दावा है कि उन्होंने दो महीने तक इंदौर के विभिन्न वार्डों और क्षेत्रों का दौरा कर पानी के नमूने एकत्र किए। इसके लिए एक चलती-फिरती ‘लाइव लैब वैन’ का उपयोग किया गया। साथ ही, कुछ नमूनों की गहन जांच के लिए उन्हें दिल्ली की प्रतिष्ठित माइक्रोबायोलॉजिकल लैब में भी भेजा गया ताकि रिपोर्ट पूरी तरह प्रामाणिक हो।

चौंकाने वाले वैज्ञानिक नतीजे और खतरनाक बैक्टीरिया

कांग्रेस द्वारा जारी की गई इस विस्तृत रिपोर्ट के आंकड़े बेहद डराने वाले हैं। सर्वे के दौरान शहर के अलग-अलग हिस्सों से कुल 240 सैंपल लिए गए थे, जिनमें से लगभग 90 फीसदी नमूने जांच में पूरी तरह फेल साबित हुए। रिपोर्ट के अनुसार, आपूर्ति किए जा रहे पानी में मानव शरीर को नुकसान पहुंचाने वाले खतरनाक बैक्टीरिया और जहरीले तत्व पाए गए हैं, जो हैजा, टाइफाइड जैसी जानलेवा बीमारियों का कारण बन सकते हैं।

‘स्वच्छ शहर’ की छवि पर सीधा हमला

पटवारी ने इंदौर की अंतरराष्ट्रीय छवि पर सवाल उठाते हुए कहा कि जो शहर अपनी स्वच्छता के लिए जाना जाता था, वह अब भाजपा की नीतियों के कारण “सबसे संक्रमित शहर” में तब्दील होता जा रहा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि इंदौर में इस समय “ट्रिपल इंजन” की सरकार नहीं, बल्कि “ट्रिपल अराजकता” का दौर चल रहा है, जहां जनता की बुनियादी जरूरतों की कोई परवाह नहीं है।

प्रशासनिक निष्क्रियता और नेतृत्व पर सवाल

कांग्रेस अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री और नगरीय प्रशासन मंत्री को घेरते हुए कहा कि जब सूबे के मुखिया खुद इस जिले के प्रभारी हैं और विभागीय मंत्री भी यहीं से आते हैं, तब ऐसी लापरवाही अक्षम्य है। उन्होंने सवाल दागा कि क्या नगर निगम या स्वास्थ्य विभाग ने कभी खुद इन इलाकों के पानी की गुणवत्ता जांचने की जहमत उठाई? क्या इस संबंध में कोई आधिकारिक रिपोर्ट तैयार की गई?

हर वर्ग के रिहायशी इलाकों की जांच

पार्टी ने स्पष्ट किया कि पानी के सैंपल लेते समय किसी खास क्षेत्र को निशाना नहीं बनाया गया, बल्कि यह जांच तीन स्तरों—स्लम बस्तियों, मध्यम वर्गीय कॉलोनियों और वीआईपी (पॉश) इलाकों में की गई थी। यहाँ तक कि महापौर के खुद के निर्वाचन क्षेत्र सुदामा नगर और बड़े सरकारी अस्पतालों से भी पानी के नमूने लिए गए। नतीजों में लगभग हर वर्ग के इलाके का पानी पीने योग्य नहीं पाया गया।

बिना वॉटर प्यूरीफायर के पानी पीना जानलेवा

जीतू पटवारी ने इंदौर के नागरिकों को सचेत करते हुए कहा कि वर्तमान स्थितियों में बिना फिल्टर या वॉटर प्यूरीफायर के सीधे नल का पानी पीना किसी बड़े खतरे से खाली नहीं है। उन्होंने कहा कि एक नागरिक को सालभर शुद्ध पानी देने के नाम पर टैक्स के रूप में हजारों रुपए वसूले जाते हैं, लेकिन बदले में उन्हें जहरीला पानी मिल रहा है, जो नगर निगम की सबसे बड़ी नाकामी है।

निगम में भ्रष्टाचार और ‘कैंसर’ जैसी अव्यवस्था

प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में कांग्रेस ने सीधे तौर पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। पटवारी ने कहा कि इंदौर नगर निगम में पानी के बुनियादी ढांचे को सुधारने के बजाय केवल कागजी विकास और भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है। यह प्रशासनिक भ्रष्टाचार अब एक “कैंसर” की तरह हर घर तक फैल चुका है, जिससे शहर की साख और जनता की सेहत दोनों दांव पर लग गई हैं।

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