America Iran Nuclear Deal
America Iran Nuclear Deal : ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से जारी तनातनी के बीच एक बेहद चौंकाने वाली और बड़ी खबर सामने आ रही है। दोनों प्रतिद्वंदी देशों के बीच एक नए अंतरिम परमाणु समझौते को लेकर गुप्त रूप से चल रही बातचीत अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुकी है। इस संभावित समझौते से जुड़ी जो सबसे बड़ी बात सामने आई है, वह यह है कि अमेरिका इसके तहत ईरान के भीतर 28 लाख करोड़ रुपये का भारी-भरकम निवेश कर सकता है। वहीं, इस पूरे घटनाक्रम में भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान को एक बेहद महत्वपूर्ण और केंद्रीय भूमिका सौंपी जा सकती है, जिससे क्षेत्र के समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं।
वैश्विक मीडिया रिपोर्ट्स और आंतरिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, यदि यह ऐतिहासिक परमाणु समझौता पूरी तरह सफल हो जाता है, तो अमेरिका की तरफ से ईरान के आर्थिक तंत्र में करीब 300 अरब डॉलर (यानी भारतीय मुद्रा में लगभग 28 लाख करोड़ रुपये) का भारी निवेश किया जाएगा। यह विशालकाय निवेश मुख्य रूप से ईरान के तेल, प्राकृतिक गैस और बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) के विकास से जुड़े क्षेत्रों में किया जाना तय हुआ है। बताया जा रहा है कि यह प्रस्ताव सबसे पहले ओमान में दोनों पक्षों के बीच हुई एक गुप्त वार्ता के दौरान मेज पर आया था। ईरान लंबे समय से अमेरिकी प्रतिबंधों की मार झेल रहा है, इसलिए वह चाहता है कि इस विदेशी निवेश के जरिए उसकी चरमराती अर्थव्यवस्था को एक नई संजीवनी और मजबूती मिल सके।
इस पूरे मामले में सबसे दिलचस्प मोड़ पाकिस्तान का शामिल होना है। सऊदी अरब के मीडिया घरानों की रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस प्रस्तावित अंतरिम समझौते में पाकिस्तान को एक आधिकारिक ‘गारंटर’ देश के रूप में शामिल करने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। माना जा रहा है कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच आपसी अविश्वास की खाई को पाटने और एक मजबूत भरोसे का पुल बनाने में पाकिस्तान अहम भूमिका निभा सकता है। हालांकि, इस संवेदनशील विषय पर अभी तक ईरान या पाकिस्तान की सरकारों द्वारा कोई भी आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन ईरान की मेहर न्यूज एजेंसी ने पाकिस्तानी राजनयिक सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि यह रणनीतिक डील अब बहुत आगे बढ़ चुकी है।
इस समझौते के जो शुरुआती नियम और शर्तें सामने आई हैं, उनके तहत ईरान अगले 30 दिनों के भीतर ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Hormuz Strait) को अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए पूरी तरह से खोलने पर राजी हो सकता है। आपको बता दें कि यह स्ट्रेट दुनिया के सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बहुत बड़ा हिस्सा गुजरता है। डील के मुताबिक, इस समुद्री रास्ते से गुजरने वाले किसी भी कमर्शियल जहाज पर ईरान कोई अतिरिक्त प्रतिबंध या टोल टैक्स नहीं लगाएगा। इसके बदले में, अमेरिका ईरान के अंतरराष्ट्रीय बैंकों में जब्त पड़े उन फंडों को वापस जारी करने की अनुमति देगा, जो वर्तमान में कतर के बैंकों में सुरक्षित रखे गए हैं।
इस पूरी बातचीत का सबसे मुख्य बिंदु ईरान का परमाणु कार्यक्रम ही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस अंतरिम समझौते के तहत ईरान ने वैश्विक बिरादरी को यह कड़ा भरोसा दिया है कि वह भविष्य में कभी भी परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा। हालांकि, ईरान के पास पहले से मौजूद संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) के स्टॉक को कैसे नष्ट या नियंत्रित किया जाएगा, इस पर अंतिम फैसला होना अभी बाकी है। अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह समझौता हकीकत में बदल जाता है, तो इससे न केवल मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में जारी युद्ध जैसी स्थिति और तनाव काफी हद तक शांत हो जाएगा, बल्कि वैश्विक तेल बाजार को भी बड़ी राहत मिलेगी, जिससे दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रित हो सकेंगी।
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