Iran inflation protests
Iran inflation protests : ईरान की राजधानी तेहरान समेत देश के कई प्रमुख शहरों में सरकार विरोधी प्रदर्शनों ने विकराल रूप ले लिया है। आम जनता सड़कों पर उतरकर ईरानी मुद्रा ‘रियाल’ की कीमतों में हो रही ऐतिहासिक गिरावट, कमरतोड़ महंगाई और बढ़ती बेरोजगारी के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर कर रही है। पिछले कई दशकों में यह ईरान के शासकों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार देश की अर्थव्यवस्था को संभालने में पूरी तरह विफल रही है, जिससे आम नागरिक का जीवन दूभर हो गया है। इन प्रदर्शनों की गूंज अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुनाई दे रही है।
ईरान में जारी इस आंतरिक उथल-पुथल के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कड़ा रुख अपनाया है। ट्रंप ने ईरानी नेतृत्व को चेतावनी दी है कि वे शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे नागरिकों के खिलाफ किसी भी प्रकार के सैन्य या हिंसक बल का प्रयोग न करें। ट्रंप ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि ईरान की सरकार अपने ही लोगों के दमन की कोशिश करती है, तो अमेरिका मूकदर्शक बनकर नहीं बैठेगा। उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका प्रदर्शनकारियों के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए हस्तक्षेप करने को पूरी तरह तैयार है, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर पहुँच गया है।
ईरान में अमेरिका की संभावित सैन्य या कूटनीतिक दखलंदाजी की खबरों ने पश्चिम एशिया के समीकरणों को गरमा दिया है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इजराइल ने खुद को ‘हाई अलर्ट’ पर रख दिया है। इजरायली सूत्रों के अनुसार, वहाँ के सुरक्षा अधिकारी स्थिति की बारीकी से निगरानी कर रहे हैं क्योंकि ईरान में होने वाला कोई भी बड़ा बदलाव सीधे तौर पर इजराइल की सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है। इजराइल को डर है कि यदि ईरान के अंदरूनी हालात बिगड़ते हैं, तो वह ध्यान भटकाने के लिए क्षेत्रीय अस्थिरता पैदा कर सकता है।
ईरान के संकटपूर्ण हालातों पर चर्चा करने के लिए इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने शनिवार को फोन पर लंबी बातचीत की। एक उच्च पदस्थ इजरायली सूत्र के अनुसार, दोनों नेताओं के बीच मुख्य रूप से ईरान में अमेरिकी हस्तक्षेप की संभावनाओं और उसके बाद पैदा होने वाली सुरक्षा चुनौतियों पर विमर्श हुआ। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों ने आधिकारिक तौर पर बातचीत के विस्तृत विवरण साझा नहीं किए हैं, लेकिन यह साफ है कि वाशिंगटन और यरूशलेम इस मुद्दे पर एक साझा रणनीति बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं।
समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इजराइल ने अपनी सीमाओं पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। इजराइल का मानना है कि ईरान में हो रहे ये विरोध प्रदर्शन पिछले कई वर्षों के सबसे बड़े आंदोलन हैं और इनके परिणाम दूरगामी होंगे। इजरायली रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ट्रंप प्रशासन ईरान में सीधे तौर पर हस्तक्षेप करता है, तो लेबनान और सीरिया जैसे क्षेत्रों में सक्रिय ईरानी समर्थक गुट जवाबी कार्रवाई कर सकते हैं। यही कारण है कि इजराइल अपनी खुफिया एजेंसियों और रक्षा बलों के साथ पूरी तरह मुस्तैद है।
ईरान की आर्थिक दुर्दशा और उस पर ट्रंप की सक्रियता ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति को एक नए मोड़ पर खड़ा कर दिया है। यूरोपीय देश जहाँ शांति की अपील कर रहे हैं, वहीं अमेरिका का आक्रामक रवैया ईरान के शासकों के लिए सिरदर्द बना हुआ है। यदि तेहरान प्रदर्शनकारियों को दबाने के लिए कठोर कदम उठाता है, तो यह कड़े वैश्विक प्रतिबंधों या प्रत्यक्ष संघर्ष को जन्म दे सकता है। फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या ईरान की सरकार जनता की मांगों के आगे झुकेगी या अमेरिका अपने हस्तक्षेप के वादे को पूरा करेगा।
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