छत्तीसगढ़

Naxalite Papa Rao: छत्तीसगढ़ में घिरता जा रहा खूंखार नक्सली पापाराव, सरेंडर माओवादी ने खोले कई गहरे राज

Naxalite Papa Rao: छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में सुरक्षाबलों द्वारा चलाया जा रहा नक्सल विरोधी अभियान अब अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन के बढ़ते दबाव के कारण नक्सलियों का आधार तेजी से खिसक रहा है। इसी कड़ी में हाल ही में हुए एक बड़े सरेंडर ने नक्सली संगठन की आंतरिक स्थिति और उनके शीर्ष कमांडरों की गतिविधियों को उजागर कर दिया है। पुलिस की रडार पर अब सबसे बड़ा नाम ‘पापाराव’ का है, जिसकी तलाश में सर्च ऑपरेशन तेज कर दिए गए हैं।

दंतेवाड़ा में नक्सलियों का सामूहिक आत्मसमर्पण और चौंकाने वाले खुलासे

शुक्रवार को दंतेवाड़ा जिले में नक्सलियों को एक बड़ा झटका लगा जब 63 माओवादियों ने एक साथ पुलिस के सामने हथियार डाल दिए। इन आत्मसमर्पित नक्सलियों में कई बड़े कैडर के सदस्य भी शामिल हैं, जो लंबे समय से बस्तर के जंगलों में सक्रिय थे। इनमें सबसे महत्वपूर्ण नाम डीवीसीएम (Division Committee Member) मोहन कड़ती का है। मोहन ने सरेंडर के बाद पुलिस और मीडिया के सामने संगठन की वर्तमान स्थिति को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उसने बताया कि संगठन के भीतर अब भारी हताशा का माहौल है, लेकिन कुछ कट्टर नक्सली नेता अब भी सुरक्षाबलों को चुनौती देने की कोशिश कर रहे हैं।

सुरक्षाबलों की रडार पर पापाराव: 30 हथियारबंद लड़ाकों के साथ जंगल में मौजूद

मोहन कड़ती ने पुलिस को जानकारी दी कि खूंखार नक्सली पापाराव अब भी संगठन को जीवित रखने की कोशिश में जुटा है। वर्तमान में वह करीब 25 से 30 अत्यंत प्रशिक्षित और आधुनिक हथियारों से लैस साथियों के साथ सुकमा और बस्तर के सीमावर्ती जंगलों में ठिकाने बदल रहा है। मोहन के अनुसार, पापाराव फिलहाल किसी भी कीमत पर सरेंडर करने को तैयार नहीं है और वह अपने दस्ते को लगातार उकसा रहा है। इसके साथ ही जंगल में राहुल और दिलीप जैसे बड़े कैडर के नक्सलियों की मौजूदगी की पुष्टि भी हुई है, जो सुरक्षाबलों के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं।

कौन है पापाराव और क्यों माना जाता है उसे बस्तर का सबसे बड़ा खतरा?

पापाराव मूल रूप से छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले का निवासी है, जिस कारण उसे बस्तर की भौगोलिक स्थिति, पहाड़ी रास्तों और घने जंगलों की रत्ती-रत्ती जानकारी है। वह नक्सलियों की सबसे शक्तिशाली इकाई ‘दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी’ (DKSZC) का सक्रिय सदस्य है। इसके अलावा, उसके कंधों पर पश्चिम बस्तर डिवीजन कमेटी के इंचार्ज और दक्षिण सब जोनल ब्यूरो की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां हैं। पापाराव हमेशा अपने साथ एके-47 राइफल रखता है और उसके सुरक्षा घेरे में 40 के करीब खूंखार लड़ाके तैनात रहते हैं। जल-जंगल-जमीन की गहरी समझ होने के कारण वह हर मुठभेड़ के बाद चकमा देकर निकलने में माहिर माना जाता है।

पश्चिम बस्तर डिवीजन के अस्तित्व की लड़ाई और पुलिस की अंतिम चेतावनी

सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पापाराव पकड़ा जाता है या मुठभेड़ में मारा जाता है, तो पश्चिम बस्तर डिवीजन पूरी तरह से ध्वस्त हो जाएगा। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पापाराव कई बड़ी नक्सली वारदातों और हमलों का मास्टरमाइंड रहा है। प्रशासन ने बार-बार उससे सरेंडर की अपील की है ताकि वह मुख्यधारा में लौट सके। हालांकि, राज्य सरकार ने मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद के पूर्ण खात्मे का लक्ष्य रखा है। इस समय सीमा को देखते हुए ऑपरेशन्स में तेजी लाई गई है। अगर पापाराव ने जल्द आत्मसमर्पण नहीं किया, तो आगामी दिनों में सुरक्षाबलों के साथ भीषण मुठभेड़ में उसका मारा जाना लगभग तय माना जा रहा है।

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