Iran Israel War
Iran Israel War : मध्य पूर्व में जारी तनाव अब एक विनाशकारी मोड़ पर पहुँच गया है। सोमवार, 06 अप्रैल को इजराइली वायुसेना ने ईरान के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर जबरदस्त प्रहार करते हुए ‘साउथ पार्स पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स’ पर हमला शुरू कर दिया है। यह कार्रवाई अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दी गई मंगलवार (07 अप्रैल) की समय सीमा समाप्त होने से ठीक एक दिन पहले की गई है। फार्स न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के असलुयेह क्षेत्र में स्थित इस विशाल परिसर से कई जोरदार धमाकों की आवाजें सुनी गईं। इस हमले ने न केवल ईरान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ पर चोट की है, बल्कि पूरे क्षेत्र को महायुद्ध की कगार पर धकेल दिया है।
दिलचस्प बात यह है कि पिछली बार जब इजराइल ने इस ठिकाने को निशाना बनाया था, तब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के प्रति अपनी कड़ी नाराजगी व्यक्त की थी। हालांकि, इस बार ट्रंप ने खुद रविवार को सोशल मीडिया पर चेतावनी दी थी कि यदि मंगलवार तक कोई समझौता नहीं होता है, तो वह ईरान में “सबकुछ उड़ा देंगे”। ट्रंप की इस डेडलाइन से पहले ही इजराइल के हमले ने कूटनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। अब सबकी नजरें मंगलवार पर टिकी हैं कि क्या अमेरिका सीधे तौर पर इस सैन्य कार्रवाई में शामिल होगा या इजराइल अपनी स्वतंत्र रणनीति पर आगे बढ़ेगा।
इजराइल की इस कार्रवाई के बाद ईरान ने कड़ा रुख अपनाते हुए जवाबी कार्रवाई की बात कही है। तेहरान ने स्पष्ट किया है कि वह केवल इजराइल ही नहीं, बल्कि गैस और तेल के उन सभी ठिकानों पर हमला करेगा जो इस संघर्ष में शत्रु देशों का समर्थन कर रहे हैं। इस धमकी से खाड़ी देशों—विशेषकर कुवैत, सऊदी अरब और यूएई—में हड़कंप मच गया है। इतिहास गवाह है कि पिछली बार साउथ पार्स पर हमले के बाद ईरान ने कतर को निशाना बनाया था। इस बार विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान पूरे क्षेत्र की ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला (Energy Supply Chain) को ध्वस्त करने की क्षमता रखता है।
एक तरफ बमबारी जारी है, तो दूसरी तरफ कूटनीतिक गलियारों में शांति की अंतिम कोशिशें की जा रही हैं। मिस्र, तुर्की और पाकिस्तान मिलकर ईरान और अमेरिका के बीच युद्धविराम कराने का प्रयास कर रहे हैं। रॉयटर्स के मुताबिक, अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इन वार्ताओं का नेतृत्व कर रहे हैं। अमेरिका एक ‘अस्थाई युद्धविराम’ चाहता है, लेकिन ईरान इस पर सहमत नहीं है। ईरान की मांग है कि युद्धविराम पूर्ण और स्थायी होना चाहिए, साथ ही शर्तें भी उसकी अपनी होनी चाहिए। शर्तों के इस टकराव ने शांति की संभावनाओं को लगभग समाप्त कर दिया है।
साउथ पार्स केवल ईरान का ही नहीं, बल्कि दुनिया का सबसे बड़ा प्राकृतिक गैस क्षेत्र है। फारस की खाड़ी के नीचे स्थित इस फील्ड में 1800 ट्रिलियन क्यूबिक फीट गैस मौजूद है, जो दुनिया की 13 साल की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त है। ईरान के कुल गैस उत्पादन का लगभग 75% हिस्सा इसी क्षेत्र से आता है। यही कारण है कि इजराइल बार-बार यहाँ हमला कर रहा है ताकि ईरान की आर्थिक कमर तोड़ी जा सके। जून 2025 और मार्च 2026 में भी यहाँ हमले हुए थे, लेकिन इस बार का हमला काफी व्यापक और विनाशकारी बताया जा रहा है।
ट्रंप की डेडलाइन (07 अप्रैल) अब सिर पर है। सोमवार के इस हमले ने साबित कर दिया है कि इजराइल अब किसी समझौते के मूड में नहीं है। यदि कल तक कूटनीति के जरिए कोई समाधान नहीं निकलता है, तो ट्रंप की चेतावनी के अनुसार सैन्य कार्रवाई का दायरा बढ़ सकता है। वैश्विक तेल बाजारों में कीमतों के आसमान छूने का डर सता रहा है और पूरी दुनिया सांसें थामकर इस सैन्य गतिरोध के अगले कदम का इंतजार कर रही है। दक्षिण-पश्चिम एशिया का नक्शा और शांति अब चंद घंटों के फैसलों पर टिकी है।
Read more : महिला की नृशंस हत्या मामले में पुलिस की नाकामी पर कांग्रेस का मौन धरना, 7 अप्रैल को कैंडिल मार्च का ऐलान
SRH vs CSK : IPL 2026 का 27वां मैच क्रिकेट इतिहास के सबसे सांस रोक…
Giant hunting spider : प्रकृति के रहस्यों की खोज में जुटे दक्षिण अमेरिकी शोधकर्ताओं ने…
SDM Car Accident : छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले से एक बड़ी दुर्घटना की खबर सामने…
Dinesh Mahant Thakordas : कहते हैं कि उम्र केवल एक संख्या होती है, और इस…
UP Home Guard Recruitment : उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं…
Gucchi Mushroom : आधुनिक दौर में खेती अब केवल पारंपरिक फसलों तक सीमित नहीं रह…
This website uses cookies.