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US-Iran Tension : ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियन की अमेरिका को चेतावनी, दबाव की नीति होगी विफल, झुकने को तैयार नहीं ईरान

US-Iran Tension  : मध्य पूर्व में युद्ध के बादलों के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने वैश्विक मंच पर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। उन्होंने अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि ईरान युद्ध प्रिय राष्ट्र नहीं है और हमेशा से कूटनीतिक संवाद का समर्थक रहा है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि यदि वॉशिंगटन को लगता है कि वह आर्थिक या सैन्य दबाव के जरिए तेहरान को अपनी शर्तों पर झुकने के लिए मजबूर कर देगा, तो यह उसकी एक बड़ी रणनीतिक भूल होगी। पेजेश्कियन ने स्पष्ट किया कि संप्रभुता से समझौता ईरान की नीतियों का हिस्सा नहीं है।

संप्रभुता पर अडिग ईरान: मर्जी थोपने की कोशिश होगी नाकाम

राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने टेलीग्राम के माध्यम से जारी एक बयान में अपनी जनता के संकल्प को दोहराया। उन्होंने कहा कि ईरान क्षेत्रीय अस्थिरता का पक्षधर नहीं है और दूसरे देशों के साथ रचनात्मक साझेदारी के लिए सदैव तत्पर है। उन्होंने पुरजोर तरीके से कहा कि किसी भी विदेशी शक्ति द्वारा आत्मसमर्पण की मांग या अपनी इच्छा थोपने की कोई भी कोशिश पूरी तरह विफल साबित होगी। ईरानी राष्ट्रपति के अनुसार, देश की जनता अपनी स्वायत्तता की रक्षा के लिए एकजुट है और वह किसी भी ऐसी बाहरी नीति को स्वीकार नहीं करेगी जो उनके आत्मसम्मान को ठेस पहुँचाती हो।

मानवीय सिद्धांतों का उल्लंघन: स्कूलों और अस्पतालों पर हमलों से नाराजगी

क्षेत्र में जारी संघर्ष के बीच राष्ट्रपति ने मानवीय संकट पर भी गहरी चिंता जताई। उन्होंने स्कूलों, कॉलेजों और अस्पतालों जैसे नागरिक केंद्रों को निशाना बनाए जाने की कड़ी निंदा की। पेजेश्कियन ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सवाल किया कि आखिर किस कानून के तहत बच्चों और निहत्थे नागरिकों को युद्ध की आग में झोंका जा रहा है? इसी दौरान ईरान के विज्ञान मंत्री ने भी एयरोस्पेस रिसर्च इंस्टीट्यूट में अपने संबोधन के दौरान इजरायल और अमेरिका पर निशाना साधते हुए कहा कि ईरान एक ऐसे दुश्मन से लड़ रहा है जो किसी भी मानवीय व्यवस्था या नैतिक मूल्यों का सम्मान नहीं करता।

अमेरिका की सख्त घेराबंदी: ‘परमाणु कार्यक्रम बंद करना ही होगा’

दूसरी तरफ, अमेरिका ने भी अपने रुख में नरमी के कोई संकेत नहीं दिए हैं। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी प्रतिनिधि माइक वाल्ट्ज ने स्पष्ट कर दिया है कि वॉशिंगटन का दबाव तब तक कम नहीं होगा जब तक ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम (Nuclear Program) को पूरी तरह से समाप्त नहीं कर देता। वाल्ट्ज ने फॉक्स न्यूज पर चर्चा के दौरान दो-टूक कहा कि परमाणु कार्यक्रम को रोकना अब चर्चा का विषय नहीं बल्कि एक अनिवार्यता है। अमेरिका का मानना है कि परमाणु हथियारों की होड़ रोकने के लिए तेहरान पर सख्त पाबंदियां जारी रखना जरूरी है।

होर्मुज की नाकाबंदी: समुद्री नेविगेशन पर तनाव बरकरार

परमाणु विवाद के साथ-साथ समुद्र में वर्चस्व की जंग भी तेज हो गई है। माइक वाल्ट्ज ने दावा किया कि अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में अपनी नौसैनिक नाकाबंदी तब तक जारी रखेगा, जब तक ईरान वहां जहाजों की स्वतंत्र आवाजाही सुनिश्चित नहीं कर देता। वॉशिंगटन का आरोप है कि ईरान वैश्विक अर्थव्यवस्था को बंधक बनाने और जलमार्गों को बाधित करने की कोशिश कर रहा है। अमेरिका अब ईरान पर इस बात के लिए कड़ा दबाव बना रहा है कि वह अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों को तुरंत और पूरी तरह से व्यापार के लिए खोल दे।

कूटनीतिक गतिरोध: जटिल होती शांति की राह

ईरान की अडिगता और अमेरिका की सख्त शर्तों ने मध्य पूर्व के इस कूटनीतिक संकट को और अधिक उलझा दिया है। एक ओर ईरान अपने अधिकारों और संप्रभुता की दुहाई दे रहा है, तो दूसरी ओर अमेरिका वैश्विक सुरक्षा और परमाणु अप्रसार के नाम पर नाकाबंदी को जायज ठहरा रहा है। इन दोनों महाशक्तियों के बीच बढ़ता यह गतिरोध न केवल क्षेत्रीय शांति के लिए खतरा है, बल्कि वैश्विक तेल आपूर्ति और आर्थिक स्थिरता के लिए भी एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। फिलहाल, शांति की कोई ठोस उम्मीद नजर नहीं आ रही है।

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